नई दिल्ली, 9 अक्टूबर (आईएएनएस)। भारत ने शुक्रवार को कहा कि वह अमेरिकी श्रम विभाग की ओर से कुछ कंपनियों के लिए ‘परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन’ (पीईआरएम) कार्यक्रम को लेकर किए गए फैसले से अवगत है। भारत ने स्पष्ट किया कि पीईआरएम आवेदन प्रक्रिया को निलंबित किए जाने का मौजूदा एच-1बी वीजा या एच-1बी वीजा धारकों और उनके आश्रितों की स्थिति पर सीधा असर नहीं पड़ेगा।
विदेश मंत्रालय (एमईए) ने कहा कि पीईआरएम प्रक्रिया पर रोक का असर प्रभावित कंपनियों के उन कर्मचारियों पर पड़ सकता है, जो स्थायी निवास या ग्रीन कार्ड हासिल करने की प्रक्रिया में हैं। मंत्रालय ने कहा कि अमेरिका की ओर से उठाए गए ये कदम दोनों देशों की साझा आकांक्षाओं को आगे बढ़ाने वाले नहीं हैं।
विदेश मंत्रालय ने बयान में कहा, “हम कुछ कंपनियों के संबंध में अमेरिकी श्रम विभाग के पीईआरएम कार्यक्रम पर लिए गए फैसले से अवगत हैं। यह समझना जरूरी है कि पीईआरएम, एच-1बी वीजा कार्यक्रम से अलग है। पीईआरएम आवेदनों के निलंबन से अपने आप मौजूदा एच-1बी वीजा या एच-1बी धारकों और उनके परिवारों की कानूनी स्थिति प्रभावित नहीं होती। हालांकि, इससे प्रभावित कंपनियों के पात्र कर्मचारियों की ग्रीन कार्ड प्रक्रिया पर कुछ असर पड़ सकता है।”
मंत्रालय ने कहा कि प्रतिभाओं की आवाजाही (टैलेंट मोबिलिटी) दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं के लिए फायदेमंद है। यह भारतीयों के लिए अवसर पैदा करती है, वहीं अमेरिकी कंपनियों को उच्च कौशल वाले प्रतिभाशाली पेशेवर, नवाचार, शोध, उत्पादकता, प्रतिस्पर्धा और रोजगार सृजन में मदद मिलती है। इससे अमेरिकी शेयरधारकों को भी लाभ होता है। यह ऐसा क्षेत्र है जिसमें दोनों देशों को बड़ा पारस्परिक लाभ मिलता है। हमारी उम्मीद है कि इस प्रक्रिया से जुड़े सभी पक्ष इस तथ्य को समझेंगे। अमेरिका की ओर से घोषित कदम दोनों देशों की साझा महत्वाकांक्षाओं को आगे नहीं बढ़ाते।
भारत ने इस मुद्दे पर अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की टिप्पणियों की भी आलोचना की और उन्हें ‘अनावश्यक’ बताया। विदेश मंत्रालय ने कहा कि हमने अमेरिकी उपराष्ट्रपति की कुछ टिप्पणियां भी देखी हैं। हमारा मानना है कि इस तरह के बयान अनुचित हैं और इस तथ्य को नजरअंदाज करते हैं कि अमेरिका में काम कर रहे भारतीय पेशेवर उच्च शिक्षित और कुशल लोग हैं, जो वहां की अर्थव्यवस्था और नवाचार तंत्र में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।
मंत्रालय ने कहा, “खुद अमेरिका का इतिहास भी ऐसे प्रवासियों की कई पीढ़ियों से जुड़ा है, जिनके श्रम, उद्यम और नवाचार ने देश की समृद्धि और विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।”
भारत ने कहा कि ऐसे शब्दों का इस्तेमाल, जिनसे ऐतिहासिक और औपनिवेशिक दौर की पीड़ादायक यादें जुड़ी हों, बेहद आपत्तिजनक है। मंत्रालय ने कहा कि वह इस मामले से जुड़े घटनाक्रमों पर नजर बनाए हुए है।
भारत की यह प्रतिक्रिया उस घोषणा के बाद आई है, जिसमें ट्रंप प्रशासन ने गुरुवार को भारत की इन्फोसिस, टाटा, विप्रो और एचसीएल समेत आठ बड़ी टेक्नोलॉजी और आउटसोर्सिंग कंपनियों के लिए रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड प्रक्रिया के एक महत्वपूर्ण हिस्से पीईआरएम को निलंबित करने की घोषणा की थी।
इस कार्रवाई में कॉग्निजेंट, कैपजेमिनी, माइक्रोसॉफ्ट और एडोबी भी शामिल हैं। इसके तहत इन कंपनियों को नए पीईआरएम आवेदन दाखिल करने से रोका गया है और पहले से लंबित आवेदनों की प्रक्रिया भी रोक दी गई है।
अमेरिकी श्रम मंत्री कीथ सोंडरलिंग ने जेडी वेंस के साथ आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस फैसले की घोषणा करते हुए कहा कि यह कदम चल रही आपराधिक और संघीय जांचों के आधार पर उठाया गया है।
उन्होंने कहा, “श्रम विभाग के इंस्पेक्टर जनरल एंथनी डीएस्पोसिटो की अगुवाई में चल रही जांच के कारण मैं दुनिया की कुछ सबसे बड़ी आईटी आउटसोर्सिंग कंपनियों, कॉग्निजेंट, इन्फोसिस, टाटा, विप्रो, एचसीएल और कैपजेमिनी को पीईआरएम कार्यक्रम से निलंबित कर रहा हूं।”
सोंडरलिंग ने बताया कि माइक्रोसॉफ्ट और एडोब को भी कई संघीय जांचों के चलते इस कार्रवाई में शामिल किया गया है। उन्होंने कहा, “हम इन कंपनियों से जुड़े किसी भी नए या लंबित पीईआरएम आवेदन को स्वीकार या प्रोसेस नहीं करेंगे।”
पीईआरएम कार्यक्रम उन नियोक्ताओं के लिए एक अहम प्रक्रिया है, जो विदेशी कर्मचारियों के लिए रोजगार आधारित स्थायी निवास (ग्रीन कार्ड) हासिल करना चाहते हैं।
सोंडरलिंग के अनुसार, जिन कंपनियों पर कार्रवाई की गई है, उन्होंने 2009 से अब तक सामूहिक रूप से करीब 30 लाख विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त करने के लिए आवेदन किए थे। उन्हें 2.3 लाख से अधिक एच-1बी वीजा मंजूरियां और एक लाख से ज्यादा स्थायी श्रम प्रमाणन प्राप्त हुए थे।
जेडी वेंस ने आरोप लगाया कि कुछ कंपनियां एच-1बी कार्यक्रम का इस्तेमाल कम वेतन पर विदेशी कर्मचारियों को रखकर अमेरिकी कर्मचारियों की जगह भरने के लिए कर रही हैं।
उन्होंने कहा, “एच-1बी वीजा कार्यक्रम का उद्देश्य कंपनियों को ऐसे सर्वश्रेष्ठ वैश्विक प्रतिभाशाली लोगों को नियुक्त करने की अनुमति देना है, जिन पदों को अमेरिकी कर्मचारियों से भरना संभव नहीं है।”
वेंस ने माइक्रोसॉफ्ट का उदाहरण देते हुए आरोप लगाया कि कंपनी ने 6,000 अमेरिकी कर्मचारियों की छंटनी की, जबकि उसे 6,300 एच-1बी वीजा और लगभग 3,000 ग्रीन कार्ड मिले। उन्होंने कहा कि प्रशासन का उद्देश्य कंपनियों को अमेरिकी बाजार छोड़ने के लिए मजबूर करना नहीं, बल्कि उनकी भर्ती नीतियों में बदलाव लाना है।
जब उनसे पूछा गया कि पीईआरएम पर रोक अस्थायी है या स्थायी, तो उन्होंने जवाब दिया, “यह निलंबन उतने समय तक जारी रहेगा, जितने समय तक इसकी जरूरत होगी।” उन्होंने यह भी कहा कि प्रशासन के पास इस निलंबन को लंबे समय तक जारी रखने के लिए पर्याप्त अधिकार हैं, लेकिन उसका उद्देश्य कंपनियों के व्यवहार में सुधार लाना है।
