नई दिल्ली, 13 अक्टूबर (आईएएनएस)। जंतर मंतर परिसर में अनधिकृत रूप से घुसने को लेकर अतिक्रमण का मामला दर्ज किया गया है। सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि दिल्ली पुलिस ने हाउस के माध्यम से अनधिकृत अतिक्रमण करने को लेकर संबंधित धाराओं में एफआईआर दर्ज की है।
इससे पहले दिन में दिल्ली पुलिस ने दिल्ली हाईकोर्ट को बताया था कि उसने जंतर मंतर को निर्धारित धरना स्थल के रूप में डी-नोटिफाई कर दिया है और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में राजधानी में शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए तीन वैकल्पिक स्थानों की पहचान की है।
न्यायमूर्ति अमित महाजन की एकल पीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस की ओर से पेश हुए एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) चेतन शर्मा ने कहा कि वैकल्पिक स्थलों की पहचान करने का निर्णय शीर्ष अदालत द्वारा पिछले सप्ताह पारित आदेश के अनुसार लिया गया है।
केंद्र के विधि अधिकारी ने कहा, “सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि उपयुक्त स्थलों की पहचान कर उन्हें निर्धारित किया जाना चाहिए और हमने ठीक वैसा ही किया है।”
यह दलील भारतीय युवा कांग्रेस (आईवाईसी) के अध्यक्ष उदय भानु चिब द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जंतर मंतर पर विरोध प्रदर्शन की अनुमति देने से दिल्ली पुलिस के इनकार को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान दी गई।
एएसजी शर्मा ने तर्क दिया कि चूंकि जंतर मंतर को निर्धारित धरना स्थल के रूप में डी-नोटिफाई कर दिया गया है, इसलिए याचिका निष्फल हो गई है। रामलीला ग्राउंड, बुराड़ी ग्राउंड और पूर्वी दिल्ली में सीबीडी ग्राउंड नए निर्धारित विरोध स्थल हैं। हालांकि, याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा ने दलील दी कि याचिका में उठाई गई अन्य प्रार्थनाएं अभी भी विचारणीय हैं और उन पर नोटिस जारी करने की मांग की।
दिल्ली पुलिस के वकील ने नोटिस जारी करने के अनुरोध का विरोध किया। दलीलें सुनने के बाद न्यायमूर्ति महाजन ने याचिका में उठाई गई तीन प्रार्थनाओं पर नोटिस जारी किया।
यह घटनाक्रम सुप्रीम कोर्ट द्वारा सक्षम अधिकारियों से राजधानी में शांतिपूर्ण और वैध विरोध प्रदर्शन के लिए बुनियादी सुविधाओं और बुनियादी ढांचे से लैस उपयुक्त वैकल्पिक स्थलों की पहचान करने और उन्हें निर्धारित करने पर विचार करने के लिए कहे जाने के कुछ दिनों बाद आया है।
