इस्लामाबाद, 15 अक्टूबर (आईएएनएस)। बुधवार को जारी ग्लोबल हंगर इंडेक्स 2025 में पाकिस्तान का स्कोर दक्षिण एशिया में सबसे अधिक रहा है। यानी भुखमरी के मामलों में यहां तेज गति से इजाफा हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक आर्थिक अस्थिरता, जलवायु संबंधी झटकों और वैश्विक संघर्षों के कारण देश में खाद्य सुरक्षा संकट और गहरा गया है।
‘वेल्थंगरहिल्फे,’ रूर यूनिवर्सिटी बोचुम के ‘इंस्टीट्यूट फॉर इंटरनेशनल लॉ ऑफ पीस एंड आर्म्ड कॉन्फ्लिक्ट,’ और स्विस संगठन ‘हेल्वेटास’ द्वारा संयुक्त रूप से जारी इस रिपोर्ट की थीम “खाद्य सुरक्षा के बिना कोई सुरक्षा नहीं” है। रिपोर्ट बताती है कि दक्षिण एशिया में प्रगति काफी हद तक रुक गई है, और 2018 के बाद से पाकिस्तान तथा अफगानिस्तान में हालात और खराब हुए हैं।
पाकिस्तान में आर्थिक अस्थिरता और खाद्य पदार्थों की कीमतों में भारी उछाल के कारण लोगों की खरीदने की क्षमता कम हो गई है और भोजन तक उनकी पहुंच सीमित हो गई है। देश में कुपोषण का स्तर 2018 के मुकाबले बढ़ा है। जहां पहले ये ‘कम’ था, वहीं अब ‘मध्यम’ श्रेणी में आ गया है, जबकि बच्चों में ‘वेस्टिंग’ (उम्र के हिसाब से वजन बहुत कम होना) की समस्या ‘उच्च’ स्तर की हो गई है।
पूरे दक्षिण एशिया में स्थिति गंभीर बनी हुई है, जहां का क्षेत्रीय स्कोर 23.5 है। हालांकि, यह स्कोर 2000 के चिंताजनक स्तर 37.5 से काफी नीचे आया है, लेकिन इसमें से अधिकांश सुधार 2018 से पहले ही हो चुका था।
2000 के बाद से पाकिस्तान और अफगानिस्तान ‘चिंताजनक’ श्रेणी से ‘गंभीर’ श्रेणी में तो आ गए हैं, लेकिन बच्चों में ‘स्टंटिंग’ (उम्र के हिसाब से कद बहुत कम होना) की दर अभी भी बहुत अधिक बनी हुई है। दोनों देशों में बाल मृत्यु दर 2000 के बहुत उच्च स्तर से घटकर मध्यम स्तर पर आ गई है।
रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि पूरे क्षेत्र में गंभीर खाद्य असुरक्षा बनी रहेगी। पाकिस्तान और बांग्लादेश के कुछ हिस्सों में भारी बारिश और बाढ़ के कारण फसलों को नुकसान पहुंचा है, जबकि अफगानिस्तान में औसत से कम बारिश और औसत से अधिक तापमान ने वहां के अनाज उत्पादन सीजन पर बुरा असर डाला है।
‘खाद्य एवं कृषि संगठन’ (एफएओ) के अनुसार, 2023 से 2025 के बीच दक्षिण एशिया (ईरान सहित) में 218 मिलियन लोग कुपोषण का शिकार थे, जो दुनिया भर में कुपोषित लोगों की कुल संख्या का लगभग एक तिहाई है।
वैश्विक स्तर पर, लगभग दो दशकों की प्रगति के बाद भुखमरी एक बार फिर बढ़ रही है। 2026 का वैश्विक स्कोर 18.1 है, जो 2018 के 17.6 के स्कोर से बदतर है।
2018 के बाद से 32 देशों में भुखमरी बढ़ी है, और 57 देश ऐसे हैं जो 2030 तक भुखमरी के निम्न स्तर को भी हासिल करने में विफल रहने की राह पर हैं।
इस सूचकांक के चार संकेतकों में से तीन—कुपोषण, बच्चों का कम कद (स्टंटिंग) और बच्चों का कम वजन (वेस्टिंग)—की स्थिति खराब हुई है, जबकि केवल बाल मृत्यु दर में थोड़ी कमी आई है।
दूसरे विश्व युद्ध के बाद से अपने उच्चतम स्तर पर चल रहे सशस्त्र संघर्ष और बार-बार आने वाली भीषण प्राकृतिक आपदाएं, इस स्थिति के बिगड़ने के मुख्य कारण हैं।
ईरान में चल रहे संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य तथा बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य में शिपिंग (माल ढुलाई) में आ रही बाधाओं के कारण ईंधन, परिवहन और उर्वरकों की लागत बढ़ रही है।
इसके साथ ही, यूक्रेन में रूस का युद्ध और काला सागर से निर्यात पर लगी पाबंदियों के कारण गेहूं की कीमतें बढ़ने का खतरा है, जिससे ‘ग्लोबल साउथ’ में बुनियादी जरूरत की चीजें आम लोगों की पहुंच से बाहर हो सकती हैं।
इस संकट को और गहराते हुए, खाद्य सुरक्षा पर होने वाला अंतरराष्ट्रीय खर्च 2016-2017 के स्तर पर आ गया है, जिसके चलते सहायता कार्यक्रमों और आपातकालीन राशन वितरण में कटौती करनी पड़ रही है। रिपोर्ट में सरकारों से आग्रह किया गया है कि वे भविष्य के संकटों को रोकने और उनसे निपटने के लिए मानवीय सहायता तथा डेटा संग्रह के लिए की गई फंडिंग कटौती को वापस लें।
