जयपुर, 15 अक्टूबर (आईएएनएस)। राजस्थान लोक सेवा आयोग (आरपीएससी) के निलंबित सदस्य बाबूलाल कटारा का कार्यकाल जेल में रहते हुए ही समाप्त हो गया। वे भर्ती परीक्षा का पेपर लीक होने के मामले में जेल में बंद थे।
राज्य सरकार ने इस मामले को भारत के राष्ट्रपति के पास भेजा था और उन्हें पद से हटाने की मांग की थी लेकिन उनका कार्यकाल खत्म होने से पहले कोई फैसला नहीं लिया जा सका।
बुधवार को कटारा का कार्यकाल पूरा होने के साथ ही आरपीएससी में सदस्यों के खाली पदों की संख्या बढ़कर चार हो गई है।
स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (एसओजी) ने 18 अप्रैल 2023 को ‘सीनियर टीचर भर्ती परीक्षा 2022’ का पेपर लीक होने के मामले में बाबूलाल कटारा, आयोग के बर्खास्त ड्राइवर गोपाल सिंह और विजय कटारा को गिरफ्तार किया था।
जनवरी 2024 में तत्कालीन राज्यपाल कलराज मिश्र ने कटारा को निलंबित कर दिया था। बाद में जांचकर्ताओं ने उन्हें ‘पुलिस सब-इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा 2021’ के पेपर लीक मामले से भी जोड़ दिया।
एंटी-करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने उनकी संपत्ति के बारे में भी जानकारी जुटाई थी। आरपीएससी से जुड़े संवैधानिक नियमों के अनुसार, राष्ट्रपति कुछ तय आधारों और निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन करते हुए आयोग के अध्यक्ष या सदस्य को पद से हटा सकते हैं। इन आधारों में अयोग्यता, दिवालियापन, या शारीरिक या मानसिक रूप से अक्षम होना शामिल है।
अगर किसी सदस्य पर गलत व्यवहार का आरोप लगता है, तो संविधान के अनुच्छेद 317 के तहत सुप्रीम कोर्ट से जांच कराने का प्रावधान है। राज्य सरकार ने कटारा को हटाने के लिए राष्ट्रपति के पास सिफारिश भेजी थी। हालांकि, उनका कार्यकाल खत्म होने से पहले यह प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी और उन्हें पद से हटाने का कोई आदेश जारी नहीं हुआ।
जून से ही आरपीएससी में कोई स्थायी अध्यक्ष नहीं है। फिलहाल, आयोग के सदस्य लेफ्टिनेंट कर्नल केसरी सिंह के पास अध्यक्ष का अतिरिक्त प्रभार है।
अन्य सदस्यों में प्रोफेसर अयूब खान, हेमंत प्रियदर्शी, प्रोफेसर दीपक शर्मा, प्रोफेसर सुशील बिसू और प्रोफेसर संतोष आनंद शामिल हैं। अपने कार्यकाल के अंत में कटारा के जाने से आयोग में रिक्त पदों की संख्या बढ़ गई है, जिससे इसकी प्रशासनिक क्षमता और भर्ती से जुड़े लंबित मामलों की प्रगति पर सवाल खड़े हो गए हैं।
