पटना, 15 अक्टूबर (आईएएनएस)। बिहार के वैशाली जिले के राघोपुर में नाव हादसे में 13 बच्चों की असमय मौत के बाद अब सत्ता पक्ष से लेकर विपक्ष तक के नेता पीड़ित परिवारों के बीच पहुंचकर उन्हें सांत्वना देने और उनके आंसू पोंछने की कोशिश कर रहे हैं। इस दुखद घटना के बीच राजनीतिक बयानबाजी भी तेज है। नेता अपनी-अपनी सुविधा के अनुसार हादसे को लेकर सवाल उठा रहे हैं और जनता के प्रति अपनी संवेदनशीलता दिखाने में जुटे हैं।
हालांकि, इस हादसे ने नाव परिचालन की व्यवस्था और सुरक्षा मानकों को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हादसे के बाद सामने आई परिस्थितियों से नाव की सुरक्षा व्यवस्था और निर्धारित मानकों के अनुपालन पर सवाल उठ रहे हैं। इस बीच वैशाली जिला प्रशासन ने नाव परिचालन को लेकर सख्ती बरतने का फैसला किया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सूर्यास्त के बाद नाव परिचालन पर प्रतिबंध का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, लापरवाही सामने आने पर संबंधित लोगों की जवाबदेही भी तय की जाएगी।
प्रशासन की कोशिश है कि नियमों का उल्लंघन कर यात्रियों की जान जोखिम में डालने वालों पर प्रभावी कार्रवाई हो। स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने की दिशा में भी पहल की जाएगी। इसके तहत मोहनपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) के रूप में विकसित करने की दिशा में कदम उठाने की बात कही गई है। इससे क्षेत्र के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने में मदद मिलने की उम्मीद है।
उधर, आपदा प्रबंधन विभाग ने भी लोगों को नाव से यात्रा के दौरान सुरक्षा नियमों का पालन करने की सलाह दी है। विभाग के मुताबिक, यात्रियों को केवल पंजीकरण संख्या वाली नाव से ही सफर करना चाहिए। नाव पर सवार होने से पहले यह देख लेना चाहिए कि निर्धारित भार सीमा का निशान पानी में डूबा तो नहीं है। यदि निशान डूबा हो तो यात्रियों को तत्काल नाव से उतर जाना चाहिए। विभाग ने खराब मौसम में नाव की यात्रा नहीं करने और जानवरों को ढोने वाली नाव पर सवार होने से बचने की भी सलाह दी है।
इसके अलावा सूर्योदय से पहले और सूर्यास्त के बाद नाव से यात्रा नहीं करने की अपील की गई है। इन सावधानियों का पालन कर संभावित दुर्घटनाओं के जोखिम को कम किया जा सकता है। दूसरी ओर, गोपालगंज जिला प्रशासन ने भी गंडक नदी में नाव परिचालन को लेकर सख्ती बढ़ा दी है। वैसे, कहा यह भी जा रहा है कि प्रशासनिक स्तर पर उठाए जा रहे इन कदमों के बीच अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सुरक्षा नियमों का पालन जमीन पर किस हद तक सुनिश्चित हो पाता है। हालांकि उम्मीद की जा रही है कि सरकार और जिला प्रशासन की सख्ती से भविष्य में राघोपुर जैसे दर्दनाक हादसों की पुनरावृत्ति रोकी जा सकेगी।
–आईएएनएस
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