नई दिल्ली, 15 अक्टूबर (आईएएनएस)। समाजवादी पार्टी के सांसद मोहिबुल्लाह नदवी ने नेहा बोरा के बयान की सराहना करते हुए उनमें भारतीय संस्कृति और इतिहास की झलक बताई। उन्होंने कहा कि भारत में ऐसी बहादुर महिलाओं की परंपरा रही है, जिन्होंने अन्याय के खिलाफ संघर्ष किया और अंग्रेजों का मुकाबला किया। नदवी ने नेहा बोरा के व्यक्तित्व की तुलना बेगम हजरत महल और झांसी की रानी से करते हुए कहा कि उनके भीतर भारतीय महिलाओं के संघर्ष और साहस की झलक दिखाई देती है।
इसके अलावा, सपा सांसद ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के परिवारवाद संबंधी बयान पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने स्कूलों, मेडिकल कॉलेजों और स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर भी सवाल उठाए। वहीं, जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाए जाने के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि ऐसे स्थान गरीबों और वंचितों की आवाज उठाने का माध्यम हैं।
मोहिबुल्लाह नदवी ने कहा कि नेहा बोरा के व्यक्तित्व में भारतीय समाज, संस्कृति और इतिहास की झलक दिखाई देती है। भारत की बहादुर बेटियों ने क्रांति लाने और अंग्रेजों से मुकाबला करने में अहम भूमिका निभाई है। जिस तरह भारतीय पुरुष मैदान में लड़ सकते हैं, उसी तरह देश की बेटियां भी अन्याय के खिलाफ खड़ी होने का साहस रखती हैं। आज भी कुछ लोग अंग्रेजों द्वारा बनाए गए रास्ते पर चल रहे हैं और उनके खिलाफ संघर्ष की जरूरत है।
सपा सांसद ने कहा कि नेहा बोरा ने भारतीय महिलाओं के संघर्ष के इतिहास को फिर से याद दिलाया है। दिल्ली और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) से जुड़ी उनकी छवि में उन्हें बेगम हजरत महल और झांसी की रानी जैसी वीरांगनाओं की झलक दिखाई देती है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के परिवारवाद संबंधी बयान पर नदवी ने कहा कि परिवार व्यक्ति को रिश्तों और मानवीय संवेदनाओं को समझने का अवसर देता है। उन्होंने कहा कि बड़े परिवार से जुड़े लोग अलग-अलग रिश्तों को निभाने और उनके महत्व को समझने का अनुभव रखते हैं। उन्होंने धार्मिक ग्रंथों का उल्लेख करते हुए कहा कि व्यक्ति परिवार के साथ जीवन के कई मानवीय पहलुओं को समझता है। नदवी ने यह भी कहा कि जिनके बच्चे नहीं हैं, वे बच्चों के दर्द को नहीं समझ सकते।
इस दौरान उन्होंने सरकार से शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में किए गए कामों पर सवाल पूछने की बात कही। उन्होंने पूछा कि भाजपा सरकार आने के बाद कितने स्कूल बंद हुए, कितने नए मेडिकल कॉलेज बने और कितने बीमार लोगों को इलाज मिला।
जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाए जाने के बाद स्वाति सिंह की ओर से सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल किए जाने पर नदवी ने कहा कि जंतर-मंतर, इंडिया गेट और सेंट्रल दिल्ली जैसे स्थान गरीबों, मजलूमों और वंचितों की आवाज उठाने के माध्यम हैं। लोग यहां अपनी समस्याएं सामने रखने और इंसाफ की उम्मीद लेकर पहुंचते हैं। ऐतिहासिक व्यवस्था का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि पुराने समय में राजा-महाराजाओं तक अपनी शिकायत पहुंचाने के लिए फरियादी विशेष माध्यमों का इस्तेमाल करते थे, ताकि उनकी बात सुनी जा सके।
