नई दिल्ली, 16 अक्टूबर (आईएएनएस)। दफ्तर में घंटों कुर्सी पर बैठकर काम करना, गलत खान-पान और शारीरिक गतिविधियों की कमी कमर और पेट समेत कई तरह की शारीरिक समस्याओं का घर बन जाती हैं। ऐसे में कटिचक्रासन एक सरल और प्रभावशाली आसन है। यह न केवल रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाता है बल्कि पाचन तंत्र को मजबूत करने और मन को शांत करने में भी मदद करता है।
संस्कृत में ‘कटि’ का अर्थ है कमर और ‘चक्र’ का अर्थ है पहिया या घुमाव, यानी कमर को घुमाने वाला आसन। यह आसन दिखने में जितना आसान है, इसके फायदे उतने ही प्रभावशाली होते हैं। कटिचक्रासन सांस लेने की समस्याओं से लेकर पाचन संबंधी परेशानियों तक को दूर करने में बेहद कारगर माना जाता है। योग विशेषज्ञों के अनुसार, कटिचक्रासन एक आसान लेकिन प्रभावी आसन है। नियमित अभ्यास से कमर के आसपास मांसपेशियां मजूबत होने के साथ उनमें लचीलापन भी बढ़ता है और शरीर की गतिशीलता बनी रहती है।
भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के अनुसार, कटिचक्रासन एक अत्यंत प्रभावी और सरल योगासन है। इस योगासन को कमर घुमाकर किया जाता है। यह रीढ़ की हड्डी के लचीलेपन को बनाए रखने का भी कार्य करता है। नियमित अभ्यास से रीढ़ की हड्डी के लचीले होने के साथ कमर, पीठ और कूल्हों की मांसपेशियों की स्ट्रेचिंग अच्छे तरह से होती है। साथ ही, पेट की मांसपेशियां भी सक्रिय होती हैं, जिससे पाचन तंत्र मजबूत होता है। अभ्यास से कमर दर्द, कंधों की अकड़न और थकान दूर होती है। शारीरिक और मानसिक तनाव को कम कर मन को तरोताजा करता है।
योग विशेषज्ञों के अनुसार, कटिचक्रासन शरीर में प्राण शक्ति के प्रवाह को बेहतर बनाता है। इससे ऊर्जा बढ़ती है और मन भी शांत रहता है। जो लोग लंबे समय तक डेस्क जॉब करते हैं, उनके लिए यह आसन काफी लाभदायक है। हृदय रोगियों, गंभीर पीठ दर्द, हर्निया या पेट की हालिया सर्जरी के बाद इस आसन को न करें।
