SGSU Advertisement
Home राजनीति प्रशांत भूषण के बयान पर भड़के एनडीए नेता, बोले- सड़क पर हंगामा...

प्रशांत भूषण के बयान पर भड़के एनडीए नेता, बोले- सड़क पर हंगामा करके सत्ता परिवर्तन नहीं होता

0
9

पटना, 16 अक्टूबर (आईएएनएस)। विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जारी विरोध-प्रदर्शन के बीच सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण के ‘सत्ता परिवर्तन’ वाले बयान ने सियासी माहौल को गरमा दिया है। इस बयान पर एनडीए नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।

दरअसल, प्रशांत भूषण ने गुरुवार को कहा था, “अगर सरकार को यह लगता है कि यह सत्ता परिवर्तन की लड़ाई है तो हां, हम रिजीम चेंज करना चाहते हैं।” उनके इस बयान के बाद सत्तारूढ़ गठबंधन ने इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था पर हमला बताया है।

इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता गुरु प्रकाश ने कहा कि विरोध-प्रदर्शन की आड़ में विपक्ष का असली एजेंडा सामने आ गया है। उन्होंने कहा, “उनके मंसूबे साफ हो गए हैं। नेहा बोरा कहती हैं कि बांग्लादेश के मॉडल से इंस्पायर्ड हैं। प्रशांत भूषण कहते हैं कि यहां चेंज करना है।”

गुरु प्रकाश ने कहा कि लोकतंत्र में सत्ता परिवर्तन का एक ही रास्ता है और वह संवैधानिक तरीका है। उन्होंने कहा, “रिजीम चेंज का लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीका होता है। चुनाव लड़िए, उम्मीदवार उतारिए, मुद्दों को लेकर जनता के बीच जाइए, अपनी नीति और नेतृत्व को स्पष्ट करिए। इस प्रकार से सड़क पर हंगामा करके सत्ता परिवर्तन नहीं होता। देश संसद और संविधान की संवैधानिक मर्यादा के अंतर्गत चलता है। यह किसी की निजी इच्छाओं और कल्पनाओं के आधार पर नहीं चलता। किसी भ्रम में मत रहिए।”

वहीं, जदयू के प्रवक्ता राजीव रंजन ने भी प्रशांत भूषण के बयान की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि सत्ता परिवर्तन आंदोलनों या खोखली धमकियों से नहीं हो सकता।

राजीव रंजन ने कहा, “जनता का जनादेश ही किसी को सत्ता में लाता है और किसी को सत्ता से बाहर करता है। जनादेश पाने के लिए जनता का भरोसा जीतना जरूरी है, जिसे कोई भी राजनीतिक दल अराजक तरीकों से हासिल नहीं कर सकता। प्रशांत भूषण से बेहतर यह कौन जान सकता है?”

उन्होंने आम आदमी पार्टी का उदाहरण देते हुए कहा, “उन्होंने ‘आप’ के साथ रहते हुए भी ऐसे ही दावे किए थे, लेकिन वे खुद भी उस पार्टी के साथ नहीं टिक पाए। ‘आप’ ने दिल्ली और पूरे देश में अपने कामों से ‘वैकल्पिक राजनीति’ पर जनता का भरोसा तोड़ दिया है और लोगों ने अब उनसे उम्मीदें लगाना छोड़ दिया है।”