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महाराष्ट्र: बीड में सुनेत्रा पवार ने की सूखे की स्थिति की समीक्षा, राहत कार्य तेज करने के दिए निर्देश

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मुंबई, 17 अक्‍टूबर (आईएएनएस)। महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री और बीड जिले की पालक मंत्री सुनेत्रा पवार ने जिले में बारिश के लंबे अंतराल के कारण उत्पन्न सूखे की गंभीर स्थिति और प्रशासन की ओर से किए जा रहे उपायों की शनिवार को जिलाधिकारी कार्यालय में समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने प्रशासन को सूखे से निपटने के लिए तत्काल प्रभावी कदम उठाने के निर्देश दिए।

इस बैठक में विधायक प्रकाश सोलुंके, विधायक धनंजय मुंडे, जिलाधिकारी विवेक जॉन्सन, जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी जितिन रहमान, पुलिस अधीक्षक नवनीत कावत, उपजिलाधिकारी शिवकुमार स्वामी सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

बैठक में जिले में सूखे की स्थिति पर विस्तार से चर्चा की गई और प्रभावित नागरिकों को तत्काल राहत पहुंचाने के लिए प्रशासन को आवश्यक निर्देश दिए गए। बारिश की कमी के कारण किसानों की फसलें सूख गई हैं। इसके साथ ही पीने के पानी और पशुओं के चारे की गंभीर समस्या पैदा हो गई है। इस स्थिति को देखते हुए उपमुख्यमंत्री ने फसल नुकसान के पंचनामे जल्द से जल्द पूरे करने के निर्देश दिए। अधिकांश पंचनामे पूरे होने की स्थिति में हैं। रिपोर्ट प्राप्त होते ही नियमानुसार आगे की कार्रवाई में तेजी लाने को कहा गया। साथ ही, फसल बीमा प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता और सटीकता बनाए रखने के निर्देश कृषि एवं राजस्व विभाग के अधिकारियों को दिए गए।

उप मुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने सूखे और पानी की किल्लत को देखते हुए नागरिकों से अनावश्यक खर्च से बचने की अपील की। उन्होंने कहा कि लोग शादी और जन्मदिन जैसे आयोजनों पर होने वाले खर्च को कम करें और सामूहिक विवाह समारोहों के आयोजन को प्राथमिकता दें। जिले में पीने के पानी की उपलब्धता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। फिलहाल जिले में 225 टैंकरों के माध्यम से पानी की आपूर्ति की जा रही है। उपमुख्यमंत्री ने इन टैंकरों की आवाजाही और पानी के वितरण पर जीपीएस प्रणाली के जरिए निगरानी रखने के निर्देश दिए।

उन्होंने स्पष्ट किया कि पीने योग्य पानी का इस्तेमाल किसी भी परिस्थिति में निर्माण कार्यों के लिए नहीं किया जाना चाहिए। पानी का उपयोग बेहद सावधानी और किफायत के साथ किया जाए। इसके अलावा जलस्रोतों के पुनर्भरण,नदियों और नालों को गहरा करने, गाद निकालने तथा कुओं की मरम्मत जैसे जल संरक्षण कार्य तत्काल शुरू करने के निर्देश भी दिए गए।

पशुओं के चारे की समस्या से निपटने के लिए प्रशासन को अभी से योजना तैयार करने को कहा गया। बैठक में किसानों को साइलेज यानी संरक्षित हरे चारे,हाइड्रोपोनिक्स तकनीक और अजोला चारा उत्पादन का प्रशिक्षण देने पर भी जोर दिया गया।

इसके साथ ही वीबी-जी रामजी योजना के अंतर्गत रोजगार गारंटी के कार्यों को जल संरक्षण से जोड़कर प्रभावी ढंग से लागू करने के निर्देश दिए गए। इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों के किसानों और मजदूरों को स्थानीय स्तर पर ही रोजगार उपलब्ध कराना है, ताकि उन्हें रोजगार के लिए पलायन न करना पड़े।

सूखे की गंभीरता को देखते हुए सभी विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों को अपने-अपने मुख्यालय में मौजूद रहने और जरूरतमंद नागरिकों की हरसंभव मदद करने के निर्देश दिए गए। उपमुख्यमंत्री ने अधिकारियों से किसानों के साथ संवाद बढ़ाने, उनकी समस्याएं सुनने, उनका समुपदेशन करने और उन्हें मानसिक संबल देने को भी कहा।

बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि पेयजल, पशुओं के चारे और रोजगार सृजन जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर सभी विभाग आपसी समन्वय से काम करें ताकि प्रभावित लोगों को जल्द से जल्द राहत मिल सके।

सुनेत्रा पवार ने कहा कि सूखे के बढ़ते संकट के बीच राज्य सरकार और प्रशासन नागरिकों के साथ मजबूती से खड़े हैं और सभी आवश्यक उपाय युद्धस्तर पर किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसानों को इस प्राकृतिक संकट से सुरक्षित बाहर निकालने और उन्हें जल्द राहत दिलाने के लिए राज्य सरकार हर स्तर पर प्रयास कर रही है। प्रशासन पूरी क्षमता के साथ काम कर रहा है।