नई दिल्ली, 18 अक्टूबर (आईएएनएस)। कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (सीएआईटी) के महासचिव और चांदनी चौक के सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने रविवार को कहा कि दिल्ली में हो रहे विरोध-प्रदर्शनों के कारण हर पिछले 10 दिनों में 4 हजार का नुकसान व्यापारियों को झेड़ना पड़ा है।
लंबे समय तक चलने वाले विरोध-प्रदर्शनों के आर्थिक असर पर चिंता जताते हुए खंडेलवाल ने कहा कि ट्रैफिक, परिवहन, ग्राहकों की आवाजाही और बाजारों तक पहुंच में रुकावटें राजधानी की व्यावसायिक गतिविधियों पर गहरा असर डाल सकती हैं। ऐसा खास तौर पर त्योहारों और शादियों के अहम सीजन के दौरान हो सकता है।
प्रवीण खंडेलवाल ने आईएएनएस से बातचीत में कहा, “हम व्यापारियों के लिए अक्टूबर से जनवरी तक के महीने, पूरे साल के सबसे खास त्योहारी सीजन होते हैं। इस दौरान बड़े पैमाने पर व्यापार होता है। इस बार पूरे देश में लगभग 7 लाख करोड़ रुपये का व्यापार होने का अनुमान है। अगर इस तरह से विरोध-प्रदर्शन होते हैं, बिना किसी पूर्व सूचना के प्रदर्शन किए जाते हैं और ऐसी स्थिति पैदा हो जाती है तो इससे दिल्ली के व्यापार को भारी नुकसान उठाना पड़ता है। अगर पिछले 10 दिनों का आकलन किया जाए, तो दिल्ली के व्यापारियों को लगभग 4,000 करोड़ रुपये के व्यापारिक नुकसान का सामना करना पड़ा है। कोई भी उनके दर्द को समझने को तैयार नहीं है। सिर्फ व्यापारी ही नहीं, बल्कि हमारे रेहड़ी-पटरी और ठेले वाले की आजीविका पर एक बहुत बड़ी चोट पड़ी है।”
खंडेलवाल ने इस बात पर जोर दिया कि भले ही संविधान नागरिकों को बोलने की आजादी और शांतिपूर्ण तरीके से इकट्ठा होने का अधिकार देता है, लेकिन व्यापारियों को भी बिना किसी अनावश्यक रुकावट के अपना कारोबार करने और अपनी आजीविका कमाने का हक होना चाहिए।
खंडेलवाल ने आगे कहा, “विरोध करने का अधिकार और व्यापार करने का अधिकार, दोनों ही एक स्वस्थ लोकतंत्र का अहम हिस्सा हैं। एक की रक्षा करने का मतलब दूसरे की अनदेखी करना नहीं होना चाहिए। व्यापक जनहित के लिए एक जिम्मेदार रवैया अपनाना जरूरी है, जिसमें लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति, कानून के शासन, आर्थिक गतिविधियों और लाखों लोगों की आजीविका का पूरा सम्मान किया जाए।”
खंडेलवाल के अनुसार, दिल्ली में रोजाना का औसत कारोबार लगभग 2,200 करोड़ रुपये का है। अगर व्यावसायिक गतिविधियों में 10 प्रतिशत की भी गिरावट आती है, तो इससे रोजाना 220 करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित हो सकता है, जबकि 15 प्रतिशत की गिरावट आने पर 330 करोड़ रुपये का कारोबार खतरे में पड़ सकता है। अगर इन रुकावटों की वजह से कारोबार में 20 प्रतिशत की कमी आती है, तो यह आंकड़ा रोजाना 440 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है।
