लखनऊ, 18 अक्टूबर (आईएएनएस)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के 100 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में प्रकाशित होने वाली एक विशेष किताब में एलजीबीटी अधिकारों को लेकर एक अलग और समावेशी नजरिया सामने आया है। एलजीबीटी राइट्स एक्टिविस्ट अंकित गुप्तानी ने इस किताब में एक लेख लिखा है, जिसमें उन्होंने एलजीबीटी-प्लस राइट्स ग्रुप्स को लेकर बातचीत और सहयोग की वकालत की है।
अंकित गुप्तानी ने कहा कि उन्हें इस ऐतिहासिक किताब में योगदान देने का मौका मिलने पर बेहद खुशी है। उन्होंने अपने लेख के दो मुख्य बिंदुओं पर बात की।
उन्होंने आईएएनएस से बात करते हुए कहा, “मुझे इस बात की बहुत खुशी है कि मुझे आरएसएस के 100 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में किताब में अपना योगदान देने का मौका मिला। इस लेख में, मैंने मुख्य रूप से दो विषयों पर ध्यान केंद्रित किया है। पहला विषय यह है कि एलजीबीटी अधिकार कार्यकर्ताओं, मानवाधिकार समूहों या प्रगतिशील तबकों ने आमतौर पर संघ और गैर-वामपंथी समूहों को अपना दुश्मन माना है और अक्सर टकराव का रास्ता चुना है, जबकि मेरा नजरिया अलग है। मैं सहयोग और समावेश की वकालत करता हूं। मैं इतने सालों से संघ और गैर-वामपंथी क्षेत्र से आने वाली संस्थाओं के साथ संवाद करने की वकालत करता हूं।”
दूसरे बिंदु पर बात करते हुए अंकित ने डिकॉलोनाइजेशन की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “दूसरी बात यह है कि देश अभी ‘विकसित भारत’ के पथ पर है। उस यात्रा में हमें डिकॉलोनाइजेशन करने की आवश्यकता है। ह्यूमन राइट्स की जब बात होती है, तो वहां पर भी डिकॉलोनाइजेशन की आवश्यकता है। हम एलजीबीटी अधिकार के बारे में बात कर रहे हैं, न कि पश्चिम की संस्कृति को फॉलो करने की बात।”
उन्होंने भारत की ऐतिहासिक परंपराओं का जिक्र करते हुए कहा कि एलजीबीटी अधिकार कोई पश्चिमी अवधारणा नहीं है। भारत में एलजीबीटी राइट्स और उनसे जुड़े विषयों पर वार्तालाप सदियों से जारी हैं। हमारे शास्त्रों से लेकर आज तक कई व्यक्ति एलजीबीटी राइट्स को अपनाते हैं और अपने आप को व्यक्त कर रहे हैं। समाज को उसी को याद करने की आवश्यकता है। आरएसएस इस बात को समझता है और हम सब मिलकर इस बात को समझें, यही हमारे इस आर्टिकल का उद्देश्य रहा है।
अंकित गुप्तानी ने अलग-अलग विचारधाराओं के युवाओं से ‘विकसित भारत 2047’ के विजन के लिए मिलकर काम करने की भी अपील की। उन्होंने कहा, “पीएम मोदी ने ‘विकसित भारत 2047’ का जो विजन रखा है, वह सिर्फ उनके लिए नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए है। यह सिर्फ एक व्यक्ति नहीं, बल्कि पूरे देश का सपना है। इस महायज्ञ में हम सभी के योगदान और आहुति की आवश्यकता है। चाहे आप किसी भी प्रांत, संप्रदाय और विचारधारा से जुड़े हों। ‘विकसित भारत’ को पूरा करना हम सभी की जिम्मेदारी है।”
