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    शेयर बाजार की हालिया कमजोरी का संबंध आसान निकासी से है, लेकिन अर्थव्यवस्था की बुनियाद मजबूत : वित्त मंत्री सीतारमण

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    नई दिल्ली, 19 अक्टूबर (आईएएनएस)। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि भारतीय शेयर बाजार में हालिया कमजोरी का एक कारण यह भी है कि निवेशकों के लिए अपने निवेश से बाहर निकलना अपेक्षाकृत आसान है। हालांकि उन्होंने जोर देकर कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था की बुनियादी स्थिति मजबूत बनी हुई है।

    सीएनबीसी की एक रिपोर्ट के अनुसार, आईएमएफ और विश्व बैंक की वार्षिक बैठकों के इतर बातचीत में सीतारमण ने कहा कि बाजार में पर्याप्त तरलता (लिक्विडिटी) उपलब्ध होने के कारण निवेशक आसानी से निकासी कर पा रहे हैं।

    उन्होंने कहा कि भारत की आर्थिक बुनियाद मजबूत है, लेकिन यदि पूंजी का लगातार बहिर्वाह जारी रहता है तो वर्ष 2027 में यह एक महत्वपूर्ण चुनौती बन सकता है।

    गौरतलब है कि इस वर्ष अब तक घरेलू शेयर बाजार में लगभग 12 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। इसके बावजूद व्यापारिक अनिश्चितताओं और भू-राजनीतिक तनावों के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर बनी हुई है।

    वित्त मंत्री ने कहा कि 2027 में भारत के सामने मौजूद प्रमुख जोखिमों में निरंतर पूंजी बहिर्वाह भी शामिल है।

    उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से जुड़े वैश्विक निवेशों की मौजूदा लहर में भारत प्रमुख लाभार्थियों में शामिल नहीं रहा है। इसके विपरीत ताइवान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों को एआई से जुड़ी कंपनियों में अधिक हिस्सेदारी और निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी का लाभ मिला है।

    सीतारमण ने कहा, “एआई और अमेरिका की ओर पूंजी का प्रवाह, जो सामान्य परिस्थितियों में विभिन्न देशों और क्षेत्रों में निवेश के रूप में जाता है, चिंता का विषय है।”

    हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि यदि वैश्विक स्तर पर एआई निवेशों में गिरावट आती है और उसके चलते व्यापक बाजार बिकवाली होती है, तो भारत को उससे अपेक्षाकृत कम नुकसान होने की संभावना है।

    इस वर्ष अब तक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफआईआई) ने भारतीय शेयर बाजार से 33 अरब डॉलर से अधिक की इक्विटी निकाली है। डिपॉजिटरी एनएसडीएल के आंकड़ों के अनुसार विदेशी निवेशकों ने घरेलू शेयरों से बड़ी मात्रा में धन निकाला है।

    हालांकि, पिछले कारोबारी सत्र (16 अक्टूबर) में 15 लगातार सत्रों तक बिकवाली करने के बाद एफआईआई शुद्ध खरीदार बने थे। उन्होंने लगभग 1,166 करोड़ रुपए के शेयर खरीदे थे। वहीं घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने 45 सत्रों तक जारी खरीदारी का सिलसिला तोड़ते हुए करीब 3,661 करोड़ रुपए की शुद्ध बिकवाली की थी।

    वित्त मंत्री ने कहा कि भारत को अभी उस स्तर के एआई निवेश प्राप्त नहीं हुए हैं, जो दुनिया के कुछ अन्य क्षेत्रों में देखने को मिले हैं। उन्होंने कहा कि यही कारण है कि एआई निवेशों में संभावित गिरावट का असर भारत पर अपेक्षाकृत सीमित रह सकता है।

    उन्होंने यह भी कहा कि भारत अब उन्नत प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में पिछड़ने वाला देश नहीं है और सरकार सेमीकंडक्टर विनिर्माण में तेजी से निवेश बढ़ा रही है।