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सूखा और अल नीनो प्रबंधन पर बीआरएस का सरकार पर हमला, एमएलसी श्रवण दासोजू ने सीएम रेवंत रेड्डी से मांगा श्वेत पत्र

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हैदराबाद, 19 अक्टूबर (आईएएनएस)। भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के विधान परिषद सदस्य डॉ. श्रवण दासोजू ने मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी और हाल ही में गठित सूखा और अल नीनो परिस्थितियों पर कैबिनेट उप-समिति को संबोधित एक खुला पत्र जारी कर राज्य सरकार की कार्यशैली पर तीखा हमला बोला है।

डॉ. दासोजू ने आरोप लगाया कि सरकार ने सूखे और अल नीनो संकट को समय रहते गंभीरता से नहीं लिया। उन्होंने 19 अक्टूबर को जारी जीओआरटी संख्या 1523 के तहत गठित कैबिनेट उप-समिति को वास्तविक संकट प्रबंधन के बजा दिया।

बीआरएस नेता ने कहा कि भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) और मौसम विशेषज्ञों ने अप्रैल 2026 में ही सामान्य से कम वर्षा और अल नीनो के खतरे को लेकर चेतावनी जारी कर दी थी। इसके बावजूद सरकार ने अक्टूबर के मध्य तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया। उन्होंने कहा कि जब तक जलाशयों का जल स्तर घट चुका था, खरीफ फसलें सूख चुकी थीं और बिजली की मांग रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई, तब जाकर उप-समिति का गठन किया गया।

दासोजू ने आरोप लगाया कि सरकार के आदेश में कई महत्वपूर्ण कमियां हैं। उन्होंने कहा कि उप-समिति की रिपोर्ट पेश करने के लिए कोई निश्चित समय सीमा तय नहीं की गई है, समिति के लिए कोई विशेष आपातकालीन बजट नहीं रखा गया है और शहरी क्षेत्रों में संभावित पेयजल संकट के बावजूद नगर प्रशासन एवं शहरी विकास विभाग को इसमें शामिल नहीं किया गया।

उन्होंने दावा किया कि कृष्णा और गोदावरी बेसिन में जलस्तर लगातार गिर रहा है और राज्य के 40 प्रतिशत से अधिक तालाबों में जल भंडारण 25 प्रतिशत से भी कम रह गया है। इसके साथ ही बिजली की रिकॉर्ड मांग के चलते राज्य को खुले बाजार से महंगी दरों पर बिजली खरीदनी पड़ी।

बीआरएस एमएलसी ने सरकार पर राजनीतिक प्रतिशोध और आपराधिक लापरवाही का भी आरोप लगाया। उनका कहना है कि कन्नेपल्ली पंप हाउस का प्रभावी संचालन नहीं किए जाने के कारण गोदावरी का बड़ी मात्रा में पानी बहकर आगे निकल गया, जबकि उत्तर तेलंगाना के किसान सिंचाई संकट से जूझते रहे।

अपने पत्र में डॉ. दासोजू ने सरकार के सामने 10 प्रमुख मांगें रखीं। इनमें उप समिति को 15 दिनों के भीतर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश देने के लिए सरकारी आदेश में संशोधन, सूखा प्रबंधन पर हुए खर्च का विस्तृत श्वेत पत्र जारी करना, कालेश्वरम परियोजना और बिजली क्षेत्र के संचालन से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक करना, सूखा प्रभावित मंडलों की आधिकारिक घोषणा करना तथा किसानों के लिए तत्काल राहत पैकेज, इनपुट सब्सिडी और पेयजल सुरक्षा उपाय लागू करना शामिल है।

उन्होंने कहा कि केवल इस संकट को प्राकृतिक आपदा बताकर सरकार अपनी संवैधानिक जिम्मेदारियों से बच नहीं सकती। दासोजू ने राज्य सरकार से पारदर्शिता बरतने और सूखे से प्रभावित लोगों की मदद के लिए तत्काल प्रभावी कदम उठाने की मांग की।