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तमिलनाडु में अब हर 7 सेकंड पर होगी पवन-सौर ऊर्जा की निगरानी, उत्पादकों ने ट्रायल की मांग की

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चेन्नई, 20 अक्टूबर (आईएएनएस)। तमिलनाडु की बिजली कंपनी ग्रिड प्रबंधन को मजबूत करने के लिए पवन और सौर ऊर्जा उत्पादन के डेटा को हर सात सेकंड में इकट्ठा करने की योजना बना रही है। हालांकि, रिन्यूएबल एनर्जी प्रोड्यूसर्स ने इसे लागू करने से पहले ट्रायल रन की मांग की है, क्योंकि मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर इसे लेकर तैयार नहीं है।

नई प्रस्तावित प्रणाली में एससीएडीए (सुपरवाइजरी कंट्रोल एंड डेटा एक्विजिशन) तकनीक के जरिए जनरेशन डेटा को स्टेट लोड डिस्पैच सेंटर तक भेजा जाएगा। इसका मकसद रिन्यूएबल एनर्जी उत्पादन में होने वाले उतार-चढ़ाव पर तेजी से प्रतिक्रिया देना और बिजली की मांग को बेहतर तरीके से मैनेज करना है।

बिजली कंपनी ने पवन ऊर्जा उत्पादकों को मई में शुरू होने वाले विंड सीजन से पहले 30 अप्रैल 2027 तक कनेक्टिविटी का काम पूरा करने का निर्देश दिया है। वहीं सौर ऊर्जा जनरेटरों को इस साल दिसंबर तक जरूरी कनेक्शन स्थापित करने को कहा गया है।

यह नियम तमिलनाडु इलेक्ट्रिसिटी ग्रिड कोड, 2026 का हिस्सा है, जिसके तहत रिन्यूएबल एनर्जी जनरेटरों के लिए लोड डिस्पैच सेंटर के साथ रियल-टाइम कनेक्टिविटी बनाए रखना अनिवार्य है। फिलहाल जनरेशन डेटा ऑटोमेटेड मीटर रीडिंग के जरिए 15 दिन से लेकर एक महीने के अंतराल पर इकट्ठा किया जाता है।

अधिकारियों को उम्मीद है कि नई निगरानी प्रणाली से रिन्यूएबल एनर्जी का एकीकरण बेहतर होगा, पीक-आवर प्लानिंग में मदद मिलेगी और महंगी बिजली खरीदने पर निर्भरता कम होगी। लेकिन जनरेटरों ने सवाल उठाया है कि क्या मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर तय समय सीमा में इस बदलाव को संभाल पाएगा।

हाल ही में अधिकारियों के साथ हुई बैठक में इंडस्ट्री प्रतिनिधियों ने इस बात पर भी आपत्ति जताई कि कंपनी ने इस साल की शुरुआत में वादा किए गए ट्रायल रन के बिना ही इसे आगे बढ़ा दिया। प्रोड्यूसर्स के मुताबिक, मूल प्रस्ताव में करीब 1,000 विंड एनर्जी जनरेटरों के साथ सिस्टम का परीक्षण करने और फिर पूरे सेक्टर में लागू करने की योजना थी।

इस पायलट प्रोजेक्ट से तकनीकी दिक्कतों की पहचान, इंफ्रास्ट्रक्चर जरूरतों का आकलन और बार-बार डेटा ट्रांसमिशन के फायदों को समझने में मदद मिलने की उम्मीद थी।

तमिलनाडु में लगभग 9,000 पवन ऊर्जा प्रतिष्ठान हैं, जिनकी कुल क्षमता लगभग 12,000 मेगावाट है, ऐसे में यह बदलाव काफी बड़ा है। जनरेटरों का कहना है कि पायलट प्रोजेक्ट के नतीजों से व्यापक लागू करने से पहले ऑपरेशनल समस्याओं को हल करने में मदद मिलेगी।

जून में घोषित अनुपालन ढांचे के तहत, समय सीमा चूकने वाले उत्पादकों के उत्पादन का 10 प्रतिशत हिस्सा शुरू में एनर्जी अकाउंटिंग से बाहर रखा जाएगा। 30 दिनों तक लगातार गैर-अनुपालन पर उनका पूरा उत्पादन सेटलमेंट से बाहर कर दिया जाएगा। 45 दिनों के बाद आगे की कार्रवाई हो सकती है। अधिकारियों ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि प्रस्तावित ट्रायल रन को अब पूरे सेक्टर में लागू करने से पहले क्यों नहीं किया जा रहा है।