जयपुर, 20 अक्टूबर (आईएएनएस)। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राज्य में पानी और चारे के संभावित संकट को लेकर चेतावनी दी है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया है कि तुरंत बचाव के उपाय किए जाएं और अन्य राज्यों से इनकी आपूर्ति जुटाने की व्यवस्था तलाशी जाए।
अशोक गहलोत सोमवार को जोधपुर में थे। जयपुर रवाना होने से पहले उन्होंने हवाई अड्डे पर मीडिया से बात की। उन्होंने बांधों में पानी की कम आवक, फसलों के नुकसान और चारे के कम उत्पादन पर चिंता जताई। उन्होंने चेतावनी दी कि यह स्थिति पशुधन की सुरक्षा और ग्रामीण रोजगार के लिए गंभीर चुनौतियां पैदा कर सकती है।
उन्होंने कहा कि जोधपुर में पानी से जुड़ी समस्याएं पहले ही शुरू हो गई हैं। उन्होंने आगाह किया कि राजस्थान के अन्य हिस्सों में भी हालात बिगड़ सकते हैं, जहां कई इलाकों में सूखे जैसे हालात हैं। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि स्थिति और अधिक बिगड़ने से पहले, पीने के पानी की उपलब्धता और चारे की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए एक व्यापक कार्य योजना तैयार की जाए।
पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत ने सुझाव दिया कि सरकार को सूखे से प्रभावित तहसीलों और गांवों की पहचान करनी चाहिए और उन्हें आधिकारिक तौर पर सूखाग्रस्त घोषित करने की प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए। उन्होंने चारे के डिपो बनाने, चारा जुटाने की व्यवस्था करने और पशुधन के लिए राहत शिविर खोलने की मांग की।
उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि चारे की बढ़ती कीमतें पशुपालकों पर आर्थिक बोझ बढ़ा सकती हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को प्रभावित परिवारों की मदद के लिए सब्सिडी और अन्य राहत उपायों पर विचार करना चाहिए। अग्रिम योजना बनाने की आवश्यकता पर जोर देते हुए गहलोत ने कहा कि ग्रामीण समुदायों की परेशानी को और बढ़ने से रोकने के लिए पीने के पानी, चारे और पशुधन की सुरक्षा के लिए समय रहते इंतजाम करना जरूरी है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने फसलों के नुकसान का ग्रामीण आजीविका पर पड़ने वाले असर को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि जिन गरीब परिवारों के पास अपनी कृषि भूमि नहीं है और जो अपनी आजीविका के लिए दिहाड़ी मजदूरी पर निर्भर हैं, उन्हें कृषि कार्य कम होने की वजह से गंभीर आर्थिक संकट का सामना करना पड़ सकता है।
‘विकसित भारत रोजगार और आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण)’ का जिक्र करते हुए पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने चेतावनी दी कि इस योजना के तहत रोजगार के अवसरों के बंद होने से स्थिति और खराब हो सकती है। उन्होंने सवाल उठाया कि फसलों के नुकसान और दिहाड़ी रोजगार के कम मौकों के बीच ग्रामीण मजदूर अपनी आजीविका कैसे चलाएंगे। गहलोत ने नगर निगम चुनावों के संचालन और उनमें कथित अनियमितताओं को लेकर भी चिंता जताई।
उन्होंने जोधपुर और जयपुर का उदाहरण देते हुए दावा किया कि स्थानीय निकायों के गठन के नतीजे कांग्रेस को मिले अधिक वोट शेयर को नहीं दर्शाते हैं। उन्होंने ग्रामीण मतदाताओं से अपील की कि वे आगामी पंचायत और जिला परिषद चुनावों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें और अपने प्रतिनिधि चुनें। गहलोत ने रितु बराला मामले में एफआईआर दर्ज करने में हुई देरी को लेकर सरकार की आलोचना की।
उन्होंने कहा कि अगर पुलिस ने तुरंत कार्रवाई की होती तो स्थिति इतनी नहीं बिगड़ती कि राजस्थान कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और पार्टी के अन्य नेताओं को धरने पर बैठना पड़ा। उन्होंने कहा कि राज्य कांग्रेस अध्यक्ष सहित पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को धरना देना पड़ा, यह सरकार के कामकाज और पुलिस प्रशासन द्वारा शिकायतों को संभालने के तरीके पर सवाल खड़े करता है।
