कोलकाता, 20 अक्टूबर (आईएएनएस)। कलकत्ता हाईकोर्ट ने मंगलवार को नंदीग्राम विधानसभा के हाल ही में हुए उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार रहे मिलन प्रधान की अंतरिम जमानत की अवधि 25 नवंबर तक बढ़ा दी है।
न्यायमूर्ति पार्थ प्रतीम रॉय की एकल जज वेकेशन बेंच ने अंतरिम जमानत की अवधि बढ़ा दी है। पश्चिम बंगाल प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने भी न्यायमूर्ति रॉय के फैसले का हवाला देते हुए एक प्रेस बयान जारी किया है।
मिलन प्रधान को सबसे पहले नंदीग्राम उपचुनाव लड़ने के लिए 29 सितंबर तक जमानत दी गई थी, जिसे बाद में सुप्रीम कोर्ट ने भी बरकरार रखा। सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाईकोर्ट के अंतरिम जमानत आदेश में कोई हस्तक्षेप नहीं किया बल्कि राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह कलकत्ता हाईकोर्ट वापस जाए और इस मामले में आगे की कार्यवाही करे।
मिलन की पिछली अंतरिम जमानत की अवधि 21 अक्टूबर तक थी और उन्हें पूर्वी मेदिनीपुर जिले के हल्दिया स्थित एक जिला अदालत में आत्मसमर्पण करना था। हालांकि, अंतरिम जमानत की अवधि खत्म होने से एक दिन पहले मंगलवार को कलकत्ता उच्च न्यायालय ने इस अवधि को बढ़ा दिया।
पश्चिम बंगाल कांग्रेस अध्यक्ष सुवंकर सरकार ने मंगलवार के इस आदेश पर संतोष जताते हुए मीडियाकर्मियों से कहा कि कांग्रेस को न्यायिक प्रणाली पर पूरा भरोसा है और वह आगे भी मिलन प्रधान का मामला लड़ती रहेगी।
मिलन प्रधान ने कांग्रेस उम्मीदवार के तौर पर उपचुनाव लड़ा। उन्हें तृणमूल कांग्रेस के उस गुट का समर्थन हासिल था, जिसका नेतृत्व पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी कर रहे हैं।
ममता बनर्जी ने कांग्रेस उम्मीदवार को अपना समर्थन देने की घोषणा तब की, जब उनकी पार्टी की उम्मीदवार संचिता डे प्रधान ने पश्चिम बंगाल के मौजूदा मुख्यमंत्री (सुवेंदु अधिकारी) के साथ बैठक के बाद आखिरी मौके पर अपना नामांकन वापस ले लिया था।
