जयपुर, 21 अक्टूबर (आईएएनएस)। राजस्थान कैडर के आईपीएस अधिकारी पंकज चौधरी ने बुधवार को ‘सूचना का अधिकार’ (आरटीआई) अधिनियम के तहत जानकारी देने में हुई देरी से जुड़े एक मामले में संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) को एक पक्ष के रूप में शामिल किया।
यह मामला 17 नवंबर को नई दिल्ली में केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) के समक्ष सुनवाई के लिए रखा गया है। मामला आरटीआई अधिनियम के तहत तय समय सीमा के भीतर जानकारी न दिए जाने से जुड़ा है।
यूपीएससी को इस मामले में एक पक्ष बनाकर चौधरी ने आयोग को भी इस कार्यवाही में शामिल कर लिया है। उम्मीद है कि आगामी सुनवाई से इस मामले पर और स्पष्टता आएगी।
केंद्रीय सूचना आयोग, आरटीआई अधिनियम के लागू होने से जुड़ी शिकायतों और अपीलों पर सुनवाई करने की अपनी भूमिका के तहत इस मामले को देखेगा।
जैसे-जैसे कार्यवाही आगे बढ़ेगी, दोनों पक्षों की दलीलों और सुनवाई के दौरान जिन मुद्दों पर विचार किया जाना है, उनके बारे में और अधिक स्पष्टता आने की उम्मीद है।
इस मामले ने सबका ध्यान खींचा है, क्योंकि आरटीआई अधिनियम में सरकारी प्राधिकरणों के लिए आवेदकों को जानकारी देने के लिए एक निश्चित समय सीमा तय की गई है।
सरकारी कार्यालयों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए समय पर जानकारी देना एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस बीच, राजस्थान में भी आरटीआई से जुड़ा एक और मामला सामने आया है।
रिपोर्टों के अनुसार, राजस्थान सूचना आयोग (आरआईसी) ने आरटीआई प्रक्रिया से जुड़े एक अन्य मामले में कार्मिक विभाग की सचिव और आईएएस अधिकारी अर्चना सिंह को नोटिस जारी किया है।
राजस्थान के इस मामले में भी जल्द ही सुनवाई होने की उम्मीद है। हालांकि, नोटिस के बारे में विस्तृत जानकारी, इसमें शामिल विशिष्ट मुद्दों और संबंधित अधिकारी की प्रतिक्रिया के बारे में अभी तक कोई जानकारी नहीं मिली है।
इन दोनों मामलों ने आरटीआई अधिनियम के कार्यान्वयन और जानकारी मांगने वाले आवेदनों पर तय समय सीमा के भीतर जवाब देने की सरकारी प्राधिकरणों की जिम्मेदारी की ओर ध्यान आकर्षित किया है।
17 नवंबर को केंद्रीय सूचना आयोग के समक्ष होने वाली सुनवाई यह तय करने में महत्वपूर्ण होगी कि पंकज चौधरी और यूपीएससी से जुड़ा यह मामला आगे कैसे बढ़ता है।
संबंधित सूचना आयोगों द्वारा इन मामलों को अपने हाथ में लेने के बाद, दोनों ही मामलों में आगे क्या होता है, इस पर नजर रहेगी।
बता दें कि आरटीआई अधिनियम को एक महत्वपूर्ण साधन माना जाता है, जो नागरिकों को सरकारी प्राधिकरणों से जानकारी मांगने का अधिकार देता है और सार्वजनिक प्रशासन में पारदर्शिता को मजबूत करता है।
