मैसूर, 21 अक्टूबर (आईएएनएस)। कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने बुधवार शाम मैसूर पैलेस में 750 किलोग्राम वजनी सोने के हौदे में विराजमान देवी चामुंडेश्वरी की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित किए। इसके साथ ही मैसूर दशहरा उत्सव के अंतर्गत ऐतिहासिक 417वीं ‘जंबू सवारी’ शोभायात्रा की शुरुआत हुई।
यह अनुष्ठान महल परिसर में शुभ ‘मीन लग्न’ के दौरान किया गया, जिसके साथ ही भव्य जुलूस की शुरुआत हुई। मैसूर पैलेस में सुबह से ही इंतजार कर रहे हजारों लोगों ने खुशी जताई और देवी चामुंडेश्वरी की स्तुति में नारे लगाए।
इस अवसर पर मौजूद लोगों में शिवकुमार की पत्नी उषा शिवकुमार, तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी, केरल के मुख्यमंत्री वी.डी. सतीसन, शहरी विकास मंत्री और मैसूर जिले के प्रभारी यतींद्र सिद्धारमैया, कन्नड़ और संस्कृति मंत्री शिवराज तंगदगी, मैसूर पुलिस आयुक्त सीमा लातकर, मुख्य सचिव शालिनी रजनीश, मैसूर के शाही वंशज और भाजपा सांसद यदुवीर वाडियार, और उपायुक्त लक्ष्मिकांत रेड्डी शामिल थे।
जुलूस के लिए देवी चामुंडेश्वरी की प्रतिमा को हरी साड़ी पहनाई गई थी। यह जुलूस मैसूर दशहरा उत्सव के मुख्य आकर्षणों में से एक है।
इस साल सोने का हौदा ‘कैप्टन प्रशांत’ नाम के हाथी पर रखा गया। यह हाथी अब तक 16 बार ‘जंबू सवारी’ जुलूस में हिस्सा ले चुका है, लेकिन यह पहली बार है जब उसने मुख्य देवता की प्रतिमा वाले सोने के हौदे को लेकर जुलूस का नेतृत्व किया।
इस साल की जंबू सवारी में 12 प्रशिक्षित हाथी हिस्सा ले रहे हैं। कैप्टन प्रशांत के दोनों तरफ ‘रूपा’ और ‘कावेरी’ नाम के ‘कुम्की’ (सहायक) हाथी चल रहे हैं।
मैसूर दशहरा उत्सव के समापन पर निकाली जाने वाली ‘जंबू सवारी’ को देखने के लिए हर साल लाखों लोग कर्नाटक की सांस्कृतिक राजधानी में आते हैं।
जंबू सवारी मैसूर दशहरा (कर्नाटक का 10 दिवसीय राज्य उत्सव) का अंतिम भव्य जुलूस है, जो विजयादशमी के दिन निकाला जाता है। इसमें देवी चामुंडेश्वरी की प्रतिमा को 750 किलोग्राम वजनी सोने के हौदे में रखा जाता है। इस हौदे को सजा-धजा हाथी मैसूर पैलेस से बन्नीमंटप तक ले जाता है।
इस जुलूस में सजे-धजे हाथी, पुलिस बैंड, सैन्य घुड़सवार, लोक नर्तक और सरकारी विभागों की रंग-बिरंगी झांकियां शामिल होती हैं। यह परेड बन्नीमंटप में एक पारंपरिक ‘मशाल परेड’ (टॉर्चलाइट परेड) के साथ संपन्न होती है।
बुधवार सुबह महलों के शहर में विजयादशमी का जुलूस शुरू हुआ, जो 11 दिनों तक चलने वाले मैसूर दशहरा उत्सव के भव्य समापन का प्रतीक है। ‘नादा हब्बा’ (राज्य उत्सव) के रूप में मनाया जाने वाला दशहरा या ‘शरण नवरात्रि’ का उत्सव इस साल बेहद भव्य रहा। इसमें कर्नाटक की समृद्ध संस्कृति और परंपराओं की झलक देखने को मिली, जो शाही ठाठ-बाट और वैभव की याद दिलाती है।
