चंडीगढ़, 21 अक्टूबर (आईएएनएस)। दिल्ली सरकार में मंत्री और भाजपा नेता मनजिंदर सिंह सिरसा ने पंजाब विधानसभा की 22 अक्टूबर को प्रस्तावित श्रद्धांजलि सूची में परविंदर सिंह झोटा का नाम शामिल न किए जाने पर भगवंत मान सरकार पर निशाना साधा है। सिरसा ने आरोप लगाया कि श्री अकाल तख्त साहिब द्वारा शहीद के रूप में मान्यता प्राप्त झोटा को जानबूझकर श्रद्धांजलि सूची से बाहर रखा गया है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी एक पोस्ट में सिरसा ने सवाल उठाया कि आखिर परविंदर सिंह झोटा का नाम सूची से क्यों हटाया गया। उन्होंने कहा कि क्या उनकी एकमात्र गलती यह थी कि उन्होंने नशा माफिया के खिलाफ आवाज उठाई और पंजाब के युवाओं को नशे की गिरफ्त से बचाने के लिए संघर्ष किया।
सिरसा ने आम आदमी पार्टी और उसके नेतृत्व पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि जो लोग नशे के कारोबार के खिलाफ लड़ते हैं, उन्हें सरकार स्वीकार नहीं कर पा रही है। उन्होंने दावा किया कि झोटा का नाम किसी कागज से हटाया जा सकता है, लेकिन पंजाब के लोगों के दिलों से नहीं मिटाया जा सकता।
भाजपा नेता ने यह भी सवाल किया कि ऐसी कौन सी मजबूरी है जिसके कारण सरकार एक शहीद की बजाय नशा तस्करी से जुड़े तत्वों के पक्ष में दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि पंजाब के लोगों की भावनाओं का सम्मान किया जाना चाहिए और नशे के खिलाफ लड़ाई लड़ने वालों को उचित सम्मान मिलना चाहिए।
सिरसा का यह बयान ऐसे समय आया है, जब हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पंजाब का दौरा कर उन परिवारों से मुलाकात की थी, जिनके परिजनों की मौत नशे और गैंगस्टर नेटवर्क के खिलाफ संघर्ष के दौरान हुई थी।
भाजपा नेताओं ने अमित शाह की यात्रा को पंजाब में नशा माफिया और संगठित अपराध के खिलाफ केंद्र सरकार की सख्त नीति का संकेत बताया है। भाजपा का आरोप है कि राज्य में नशे के कारोबार और अपराध को लेकर कानून-व्यवस्था की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
इससे पहले भी मनजिंदर सिंह सिरसा ने दावा किया था कि केंद्र के बढ़ते दबाव के बाद पंजाब सरकार को कुछ मामलों में सीबीआई जांच की घोषणा करनी पड़ी। उन्होंने कहा था कि भाजपा पंजाब को नशामुक्त बनाने के लिए अभियान जारी रखेगी और प्रभावित परिवारों को न्याय दिलाने की दिशा में काम करेगी।
