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एसआईआर के बाद कर्नाटक की अंतिम मतदाता सूची जारी, 99 लाख से अधिक नाम हटाए गए, अब कुल वोटर 4.55 करोड़

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बेंगलुरु, 27 अक्टूबर (आईएएनएस)। कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) कार्यालय ने मंगलवार को राज्य की अंतिम मतदाता सूची जारी की, जिसमें 4,55,00,011 मतदाता शामिल हैं। यह सूची मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर)-2026 के पूरा होने के बाद जारी की गई।

दरअसल, एसआईआर शुरू होने से पहले कर्नाटक में 5,54,32,314 मतदाता थे, लेकिन अब यह संख्या कम हो गई है, क्योंकि इस पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान 99.32 लाख से अधिक नाम सूची से हटा दिए गए हैं।

प्रकाशित अंतिम मतदाता सूची के अनुसार, राज्य में 2,25,40,493 पुरुष मतदाता, 2,29,12,355 महिला मतदाता और थर्ड जेंडर के 2,841 मतदाता हैं। सर्विस वोटरों (सेवा मतदाताओं) की संख्या 44,322 है।

भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशों के अनुसार, सभी 224 विधानसभा क्षेत्रों में मतदाता सूची का पुनरीक्षण किया गया, जिसमें 1 अक्टूबर 2026 को अर्हता तिथि (क्वालिफाइंग डेट) माना गया है।

अंतिम मतदाता सूची में 18-19 वर्ष की आयु के 6,83,364 युवा मतदाता शामिल हैं, जिनमें 3,64,551 पुरुष, 3,18,795 महिलाएं और थर्ड जेंडर के 18 मतदाता हैं। 20-29 आयु वर्ग में 86,56,838 मतदाता हैं, जिनमें 45,08,240 पुरुष, 41,47,863 महिलाएं और थर्ड जेंडर के 735 मतदाता शामिल हैं।

राज्य में दिव्यांग मतदाताओं की संख्या 5,65,340 है, जिनमें 3,26,716 पुरुष, 2,38,589 महिलाएं और 35 तृतीय लिंग के मतदाता हैं। 85 वर्ष और उससे अधिक आयु के मतदाताओं की संख्या 3,92,134 है, जिनमें 1,62,522 पुरुष, 2,29,609 महिलाएं और तीन तृतीय लिंग के मतदाता शामिल हैं। इसके अलावा, 3,252 अनिवासी भारतीय (एनआरआई) मतदाता भी हैं, जिनमें 2,043 पुरुष और 1,209 महिलाएं शामिल हैं।

24 अगस्त को जारी मतदाता सूची के मसौदे (ड्राफ्ट) में 4,46,35,975 सामान्य मतदाता और 44,176 सर्विस वोटर शामिल थे। 16 जून, 2026 तक मतदाता सूची में शामिल 5,54,32,314 मतदाताओं के लिए गणना फॉर्म (एन्यूमरेशन फॉर्म) तैयार किए गए थे।

इनमें से 4,46,35,975 मतदाताओं (जो कुल मतदाताओं का 80.52 प्रतिशत हैं) ने अपने गणना फॉर्म बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) को जमा कर दिए। बाकी बचे 1,07,96,339 मतदाताओं (यानी 19.48 प्रतिशत) के फॉर्म जमा नहीं हुए, इसलिए उन्हें ड्राफ्ट मतदाता सूची में शामिल नहीं किया गया।

सीईओ कार्यालय ने इन 1,07,96,339 मतदाताओं को ‘अनुपस्थित’, ‘स्थायी रूप से स्थानांतरित’, ‘मृत’ या ‘दोहरी प्रविष्टि’ (डुप्लिकेट एंट्री) की श्रेणियों में बांटा। इन आंकड़ों में 19,00,926 अनुपस्थित मतदाता (3.43 प्रतिशत), 65,45,679 स्थायी रूप से स्थानांतरित मतदाता (11.81 प्रतिशत), 16,39,864 मृत मतदाता (2.96 प्रतिशत) और 7,09,870 दोहरी प्रविष्टियां (1.28 प्रतिशत) शामिल हैं।

दावों और आपत्तियों की प्रक्रिया के दौरान, 43,82,824 नोटिस जारी किए गए और संबंधित लोगों तक पहुंचाए गए। इन सभी 43,82,824 मामलों में सुनवाई की गई। कुल 61,867 मतदाताओं को अंतिम मतदाता सूची में शामिल किए जाने के लिए अयोग्य घोषित किया गया।

नाम हटाने के अनुरोधों से जुड़े ‘फॉर्म-7’ के आंकड़ों में मृत्यु के 1,091 मामले, दोहरी प्रविष्टियों के 762 मामले, स्थायी रूप से स्थानांतरित होने के 1,24,327 मामले, अनुपस्थिति के 184 मामले और अन्य श्रेणियों के 61,960 मामले दर्ज किए गए। इनमें सुनवाई के दौरान अयोग्य पाए गए लोगों के मामले भी शामिल हैं।

यह प्रक्रिया (एसआईआर) कई चरणों में पूरी की गई, जिसमें घर-घर जाकर सत्यापन करना, गणना फॉर्मों का डिजिटलीकरण, ड्राफ्ट मतदाता सूची का प्रकाशन, और उसके बाद दावों व आपत्तियों पर कार्रवाई, सुनवाई तथा ईआरओ (निर्वाचक पंजीकरण अधिकारियों) द्वारा नोटिसों का निपटारा करना शामिल था।

बीएलओ द्वारा घर-घर जाकर किए जाने वाले दौरे 30 जून से 17 अगस्त तक चले। दावे और आपत्तियां दाखिल करने की अवधि 24 अगस्त से 23 सितंबर तक रही, जबकि नोटिस और उनके निपटारे की प्रक्रिया 22 अक्टूबर तक जारी रही। अंतिम मतदाता सूची 27 अक्टूबर को प्रकाशित की गई।

सीईओ कार्यालय ने इस प्रक्रिया के सफलतापूर्वक पूरे होने का श्रेय राज्य भर के अधिकारियों और चुनाव कर्मियों के समन्वित प्रयासों को दिया है। इस प्रक्रिया में सभी 34 चुनावी जिलों के जिला चुनाव अधिकारी, 34 रोल ऑब्जर्वर, 31 जिला पंचायतों के मुख्य कार्यकारी अधिकारी, 224 ईआरओ, 336 सहायक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (एईआरओ), 3,926 अतिरिक्त एईआरओ, 6,092 बीएलओ सुपरवाइजर और 60,923 मतदान केंद्रों पर तैनात 60,923 बीएलओ शामिल थे।

इस प्रक्रिया में स्वयंसेवकों और सात पंजीकृत व मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के 1,33,092 बूथ-स्तरीय एजेंटों (जिनमें उनके पदाधिकारी भी शामिल थे) ने भी सहयोग दिया।

सीईओ कार्यालय ने बताया कि अंतिम मतदाता सूचियों की प्रतियां राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ साझा कर दी गई हैं।

कार्यालय ने यह भी स्पष्ट किया कि मतदाता सूची को लगातार अपडेट करने की सुविधा खुली रहेगी। साल भर नाम जुड़वाने, प्रविष्टियों में सुधार, आपत्तियां दर्ज कराने, निवास स्थान बदलने, मतदाताओं को ‘दिव्यांग व्यक्ति’ के रूप में चिह्नित करने और बिना किसी सुधार के मतदाता फोटो पहचान पत्र को बदलवाने के लिए आवेदन दिए जा सकते हैं।

यदि कोई व्यक्ति ईआरओ के फैसले से असंतुष्ट है तो वह ‘जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950’ की धारा 24(ए) और ‘निर्वाचक पंजीकरण नियम, 1960’ के नियम 23 के तहत जिला मजिस्ट्रेट के पास अपील कर सकता है। यदि वह जिला मजिस्ट्रेट के आदेश से भी संतुष्ट नहीं है, तो वह इसी अधिनियम की धारा 24(बी) और संबंधित नियमों के नियम 27 के तहत मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) के पास दूसरी अपील दायर कर सकता है।