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यूएसटीआर ने भारत की फिशरीज सब्सिडी को बताया चिंता का विषय, कहा- अमेरिकी मछुआरों पर पड़ रहा असर

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वाशिंगटन, 29 अक्टूबर (आईएएनएस)। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (यूएसटीआर) ने अपने मछुआरों का हवाला देते हुए भारत की मत्स्य सब्सिडी नीति पर सवाल उठाया है। उनके मुताबिक इससे भारतीय समुद्री खाद्य उत्पाद (सी फूड) अमेरिकी बाजार में बाजार भाव से कम कीमतों पर पहुंच रहे हैं। अमेरिका का दावा है कि इससे उसके मछुआरों और समुद्री खाद्य आपूर्ति श्रृंखला को नुकसान हो रहा है।

यूएसटीआर ने बुधवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की ‘अमेरिका फर्स्ट सीफूड स्ट्रैटेजी’ को बढ़ावा देते हुए जारी बयान में भारत की मत्स्य सब्सिडी और वियतनाम में अवैध, असूचित और अनियमित (आईयूयू) मछली पकड़ने की गतिविधियों का उल्लेख किया। कार्यालय के अनुसार, ये गतिविधियां अमेरिकी मछुआरों और आपूर्ति श्रृंखला को सीधे प्रभावित करती हैं।

23 अक्टूबर को जारी रणनीति दस्तावेज में भी कहा गया है कि यूएसटीआर भारत के व्यापक मत्स्य सब्सिडी कार्यक्रमों से जुड़ी चिंताओं पर काम जारी रखेगा। अमेरिकी पक्ष का आरोप है कि इन सब्सिडी के कारण भारतीय उत्पादक अमेरिका को समुद्री खाद्य उत्पाद बाजार भाव से कम कीमतों पर निर्यात कर पाते हैं।

हालांकि, इसी दिन जारी व्हाइट हाउस के तथ्यपत्र में भारत या किसी अन्य देश का नाम नहीं लिया गया था। भारत का उल्लेख रणनीति दस्तावेज में किया गया है।

अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय ने भारत और वियतनाम के अलावा जापान तथा यूरोपीय संघ की व्यापार नीतियों पर भी आपत्ति जताई है। यूएसटीआर के अनुसार, जापान में 10 प्रतिशत तक आयात शुल्क और आयात कोटा अमेरिकी निर्यातकों को नुकसान पहुंचाते हैं। वहीं, यूरोपीय संघ की कैच योजना अमेरिकी मछुआरों पर दस्तावेजीकरण और रिपोर्टिंग से जुड़ी अतिरिक्त जिम्मेदारियां डालती है।

यूएसटीआर ने कहा कि अवैध रूप से पकड़े गए और भारी सब्सिडी वाले विदेशी समुद्री खाद्य उत्पाद अमेरिकी मछुआरों के लिए अनुचित प्रतिस्पर्धा पैदा कर रहे हैं। कार्यालय ने उन उत्पादों पर भी चिंता जताई, जिनके उत्पादन में मछली पकड़ने वाले जहाजों पर जबरन श्रम का इस्तेमाल किया जाता है।

अमेरिकी कार्यालय के मुताबिक, वर्ष 2025 में अमेरिका का समुद्री खाद्य निर्यात 5.53 अरब डॉलर रहा, जो 2024 की तुलना में 12 प्रतिशत अधिक है। उसने कहा कि ताइवान, अर्जेंटीना, बांग्लादेश, इक्वाडोर और इंडोनेशिया ने अमेरिका के साथ पारस्परिक व्यापार समझौतों के तहत हानिकारक मत्स्य सब्सिडी या अवैध मछली पकड़ने की गतिविधियों से जुड़ी चिंताओं को दूर करने की प्रतिबद्धता जताई है।

इस सूची में बांग्लादेश का शामिल होना भारत के लिए भी महत्वपूर्ण है। दक्षिण एशिया के इस पड़ोसी देश ने मत्स्य क्षेत्र से जुड़ी प्रतिबद्धताएं स्वीकार की हैं, जबकि जारी दस्तावेज में भारत के लिए ऐसी किसी प्रतिबद्धता का उल्लेख नहीं है।

यूएसटीआर ने कहा, “अमेरिकी समुद्री खाद्य उद्योग का भविष्य अमेरिकी मछुआरों, श्रमिकों और घरेलू उद्योग के हाथों में होना चाहिए, न कि अवैध रूप से पकड़े गए और भारी सब्सिडी वाले विदेशी उत्पादों पर निर्भर रहना चाहिए।”

व्हाइट हाउस के तथ्यपत्र के अनुसार, नई रणनीति का उद्देश्य आयात प्रमाणन और नियमों के अनुपालन को मजबूत करके अमेरिकी मछुआरों को अनुचित प्रतिस्पर्धा से बचाना तथा विदेशी बाजारों में अमेरिकी उत्पादों की पहुंच बढ़ाना है। इसके अतिरिक्त, अमेरिकी कृषि विभाग के माध्यम से मांस और समुद्री खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के लिए 5 अरब डॉलर से अधिक के गारंटीशुदा ऋण उपलब्ध कराने की घोषणा भी की गई है।

भारत अमेरिका को झींगा निर्यात करने वाले प्रमुख देशों में शामिल है। हालांकि, हाल के वर्षों में भारतीय समुद्री खाद्य निर्यातकों को अमेरिकी शुल्कों के साथ-साथ एंटी-डंपिंग और प्रतिपूरक शुल्कों का भी सामना करना पड़ा है।

भारत विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) में अपनी मत्स्य सहायता नीति का बचाव करता रहा है। उसका तर्क है कि यह सहायता लाखों छोटे और पारंपरिक मछुआरों की आजीविका के लिए जरूरी है। ऐसे में अमेरिकी रणनीति में भारत की सब्सिडी का उल्लेख दोनों देशों के बीच समुद्री खाद्य व्यापार को लेकर मतभेद का एक और मुद्दा बन सकता है।