नई दिल्ली, 2 नवंबर (आईएएनएस)। दिल्ली भाजपा अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा ने सोमवार को वसुंधरा एन्क्लेव स्थित समरविले स्कूल में ‘सेफ वॉक टू स्कूल जोन’ सड़क सुरक्षा पायलट प्रोजेक्ट की शुरुआत की। इसका उद्देश्य पूर्वी दिल्ली में स्कूली बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। इस कार्यक्रम में भाजपा विधायक अरविंदर सिंह लवली भी मौजूद थे।
मल्होत्रा ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि सड़क सुरक्षा न केवल सड़क परिवहन मंत्रालय के लिए बल्कि पूरे समाज के लिए एक महत्वपूर्ण चिंता का विषय है।
उन्होंने कहा, “सड़क सुरक्षा एक गंभीर मुद्दा है। यह सिर्फ सड़क परिवहन मंत्रालय का मुद्दा नहीं है, बल्कि पूरे समाज का मुद्दा है। सीएसआर पहल के तहत, हमने पूर्वी दिल्ली के 28 स्कूलों के बाहर सड़क सुरक्षा, विशेष रूप से बच्चों की सुरक्षा के लिए विशेष उपाय किए हैं।”
उन्होंने बताया कि इन उपायों में प्रमुख जेब्रा क्रॉसिंग का निर्माण, दुर्घटनाओं को रोकने के लिए स्पीड ब्रेकर, बच्चों के लिए रेलिंग, स्कूल बसों के रुकने के लिए निर्धारित स्थान और ‘स्कूल आगे है’, गति सीमा और आने वाली जेब्रा क्रॉसिंग को दर्शाने वाले साइनबोर्ड शामिल हैं।
मल्होत्रा ने कहा, “हम पूर्वी दिल्ली के 28 स्कूलों के बाहर इस पहल पर काम शुरू करेंगे। ग्रैप प्रतिबंध हटते ही काम शुरू हो जाएगा। यह हमारी पायलट परियोजना है। हमें विश्वास है कि यह सफल होगी। इसके बाद, हम इसे पूर्वी दिल्ली के सभी 270 स्कूलों में लागू करने का प्रयास करेंगे।”
भारत में स्कूल सुरक्षा एक महत्वपूर्ण चिंता का विषय बनी हुई है, जहां लगभग 14.67 लाख स्कूलों में 24 करोड़ से अधिक छात्र पढ़ते हैं, जिससे बच्चों की सुरक्षा एक प्रमुख राष्ट्रीय जिम्मेदारी बन जाती है।
इस बीच, दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने जुलाई में पीएचडी हाउस में आयोजित राष्ट्रीय सुरक्षित स्कूल नेतृत्व शिखर सम्मेलन 2026 को संबोधित करते हुए स्कूल सुरक्षा और लचीलेपन के लिए एक व्यापक और भविष्य के लिए तैयार दृष्टिकोण अपनाने का आह्वान किया था।
संधू ने इससे पहले जुलाई को ‘बाल सुरक्षा माह’ घोषित करने में अग्रणी भूमिका निभाई थी। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य एक ऐसा वातावरण बनाना है, जहां युवा मस्तिष्क सीख सकें, विकसित हो सकें और अपनी क्षमता का एहसास कर सकें, जो सुरक्षा की मूलभूत भावना के बिना असंभव है।
उन्होंने कहा कि स्कूली सुरक्षा की अवधारणा वर्षों में काफी विकसित हुई है। भौतिक बुनियादी ढांचा, अग्नि सुरक्षा और आपातकालीन प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण बने हुए हैं, लेकिन आज सुरक्षा में साइबर सुरक्षा, मानसिक स्वास्थ्य, परिवहन सुरक्षा और अप्रत्याशित परिस्थितियों से प्रभावी ढंग से निपटने की क्षमता भी शामिल है।
उपराज्यपाल ने आगे कहा था कि भारत 2047 तक ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य की ओर अग्रसर है, ऐसे में भावी नागरिकों के निर्माण में शिक्षण संस्थानों की अहम भूमिका होगी।
