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कुंदन कृष्णन पर भ्रष्टाचार का आरोप: सुधाकर सिंह बोले- पत्नी और करीबी के नाम है 150 करोड़ की बेनामी संपत्ति

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पटना, 3 नवंबर (आईएएनएस)। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के सांसद सुधाकर सिंह ने राज्य एसटीएफ के महानिदेशक कुंदन कृष्णन और उनके परिवार की संपत्ति को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि कुंदन कृष्णन की घोषित और अघोषित संपत्तियां उनकी नौकरी से हुई आय की तुलना में काफी अधिक हैं। सांसद ने इस मामले में लोकायुक्त, केंद्रीय एजेंसियों और बड़े अधिकारियों से जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि वह पहले भी इस संबंध में कई जगह शिकायत कर चुके हैं और अब अदालत का दरवाजा भी खटखटाएंगे।

सुधाकर सिंह ने आरोप लगाया कि कुंदन कृष्णन की नौकरी से कुल आय करीब पांच करोड़ रुपए है, जबकि उनकी और उनकी पत्नी की घोषित और अघोषित संपत्ति लगभग 180 करोड़ रुपए तक बताई जा रही है। इसमें से 30 से 35 करोड़ रुपए की पारिवारिक संपत्ति घटाने के बाद भी करीब 150 करोड़ रुपए की संपत्ति का सवाल बना रहता है। राजद सांसद ने रितेश सिंह उर्फ बिट्टू सिंह की संपत्ति की भी जांच कराने की मांग की। उन्होंने दावा किया कि रितेश सिंह के नाम पर करीब पौने दो सौ करोड़ रुपए की संपत्ति लिखवाई गई है। उन्होंने कहा कि जब कुंदन कृष्णन पटना के एसएसपी थे, तब एक ही खाता और प्लॉट से संबंधित लेनदेन में सफेद और काले धन का इस्तेमाल कर संपत्ति रितेश सिंह के नाम लिखवाई गई। उन्होंने कहा कि इस संबंध में उनके पास दस्तावेज हैं और रितेश सिंह की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए।

सुधाकर सिंह ने बिहार में लोकायुक्त व्यवस्था को निष्क्रिय बताते हुए कहा कि वह पिछले तीन वर्षों से लोकायुक्त की नियुक्ति और व्यवस्था को लेकर हाई कोर्ट जा रहे हैं। इस मामले में गृह मंत्री, मुख्यमंत्री, राज्यपाल, संघ लोक सेवा आयोग, केंद्रीय सतर्कता आयोग और केंद्रीय लोकायुक्त तक पत्र भेजे गए हैं। उन्होंने कहा कि कुंदन कृष्णन केंद्रीय सेवाओं से जुड़े अधिकारी हैं, इसलिए इस मामले को दिल्ली में संबंधित संस्थाओं के सामने भी उठाया जाएगा। सांसद ने स्पष्ट किया कि वह बिहार और केंद्र दोनों स्तरों पर जांच की मांग करेंगे।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की ओर से पहले की गई शिकायत पर जांच शुरू होने के सवाल पर उन्होंने कहा कि अभी तक सरकार की तरफ से उन्हें कोई जवाब नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि सरकार को लिखित रूप में बताना चाहिए कि लगाए गए आरोप सही हैं या नहीं। यदि सरकार कहती है कि संपत्तियां वैध हैं और कोई वित्तीय भ्रष्टाचार नहीं हुआ है, तो वह उसका जवाब स्वीकार करेंगे। उन्होंने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से इस मामले में स्पष्ट स्थिति बताने की मांग की।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की ओर से सक्षम लोगों से मुफ्त बिजली का लाभ छोड़ने की अपील पर भी सुधाकर सिंह ने निशाना साधा। उन्होंने कहा कि चुनाव के समय सरकार ने सभी के लिए मुफ्त बिजली की बात कही थी और तब किसी तरह की आर्थिक क्षमता की शर्त नहीं बताई गई थी। लेकिन, सत्ता में आने के बाद सरकार अब लोगों की आर्थिक स्थिति के आधार पर लाभ छोड़ने की अपील कर रही है। उन्होंने इसे बिहार की खराब वित्तीय स्थिति का संकेत बताया और कहा कि सरकार के पास पर्याप्त पैसा नहीं है, इसलिए इस तरह की अपील की जा रही है।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के घुसपैठियों से जुड़े बयान पर राजद सांसद ने सवाल किया कि वह गृह मंत्री हैं, तो अब तक कथित तीन करोड़ घुसपैठियों की पहचान क्यों नहीं हो पाई। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि गृह मंत्री की जिम्मेदारी देश की सुरक्षा से जुड़े मामलों पर कार्रवाई करना है। सिंह ने दावा किया कि उन्होंने सूचना के अधिकार के तहत चुनाव आयोग से भी पूछा था कि बिहार और पश्चिम बंगाल में रोहिंग्या तथा बांग्लादेशी नागरिकों के नाम मतदाता सूची में होने के आरोपों की जांच में कितने लोगों की पहचान हुई। जवाब में दोनों राज्यों के लिए संख्या शून्य बताई गई। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार विरोधियों के नाम मतदाता सूची से हटाने में लगी है, जबकि कथित विदेशी नागरिकों की पहचान नहीं कर पा रही है।

मुस्लिम संगठनों से जुड़े कथित लीक वीडियो और जनसांख्यिकीय बदलाव के दावों पर सुधाकर सिंह ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (संघ) और भाजपा पर भी हमला बोला। उन्होंने महात्मा गांधी की हत्या का उल्लेख करते हुए संघ से जुड़े लोगों पर सवाल उठाए। साथ ही, राम मंदिर के नाम पर चंदा चोरी के आरोपों का जिक्र करते हुए कहा कि राजनीतिक लोग कुछ भी कह सकते हैं। उन्होंने अपराध के आरोपों में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

नेहा बोरा की ओर से मंदिरों के पुजारियों पर यौन शोषण से जुड़े आरोपों पर सांसद ने कहा कि महिलाओं के साथ अत्याचार और दुष्कर्म की घटनाओं से इनकार नहीं किया जा सकता, लेकिन यह कहना कि ऐसी घटनाएं मंदिरों में होती हैं, उचित नहीं है। उन्होंने इस बयान को गैर-जिम्मेदाराना बताते हुए इससे असहमति जताई।