ढाका, 3 नवंबर (आईएएनएस)। बांग्लादेश में हिंदू महिला अधिकार कार्यकर्ता शम्पा गोस्वामी के खिलाफ दर्ज किए गए देशद्रोह के मामले को लेकर गंभीर चिंता जताई जा रही है। स्थानीय मीडिया के अनुसार, प्रमुख मानवाधिकार संगठनों ने उनकी सुरक्षा को लेकर चिंता व्यक्त की है और आरोप लगाया है कि मामला दर्ज होने के बाद उन्हें लगातार परेशान किया जा रहा है।
बांग्लादेश के प्रमुख समाचार पत्र ‘द डेली स्टार’ की रिपोर्ट के अनुसार, शम्पा गोस्वामी सतखीरा जिले में स्थित महिला संगठन ‘प्रेरणा नारी उन्नयन संगठन’ की कार्यकारी निदेशक हैं। सोमवार को जारी एक बयान में ‘ह्यूमन राइट्स फोरम बांग्लादेश’ (एचआरएफबी) ने उनकी सुरक्षा को लेकर चिंता जताई और अधिकारियों से अपील की कि उन्हें बिना डर के वैध मानवाधिकार गतिविधियां जारी रखने का अवसर दिया जाए। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि उनके परिवार या उनके संगठन से जुड़े लोगों को किसी तरह की धमकी, उत्पीड़न या प्रताड़ना का सामना न करना पड़े।
एचआरएफबी बांग्लादेश के 20 मानवाधिकार और विकास संगठनों का एक गठबंधन है। इनमें ‘आइन ओ सालिश केंद्र’ (एएसके), ‘मानुषेर जोन्यो फाउंडेशन’ (एमजेएफ), ‘बांग्लादेश लीगल एड एंड सर्विसेज ट्रस्ट’ (बीएलएएसटी), ‘बांग्लादेश महिला परिषद’ (बीएमपी) और ‘ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल बांग्लादेश’ (टीआईबी) जैसे संगठन शामिल हैं।
एचआरएफबी के अनुसार, शम्पा गोस्वामी के खिलाफ 29 सितंबर को सतखीरा के श्यामनगर पुलिस स्टेशन में देशद्रोह का मामला दर्ज किया गया था। गोस्वामी का आरोप है कि पुलिसकर्मी उनके घर और उनके संगठन के कार्यालय पर नजर रख रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उनके परिवार के सदस्यों को परेशान किया जा रहा है।
फोरम का कहना है कि इन आरोपों को गंभीरता से लेने की जरूरत है, खासकर इसलिए क्योंकि बांग्लादेश का संविधान नागरिकों को मौलिक अधिकार और निजी जीवन की सुरक्षा प्रदान करता है। संविधान में नागरिकों को स्वतंत्र रूप से आने-जाने और अपने घर व निजी पत्राचार की गोपनीयता का अधिकार दिया गया है। एचआरएफबी ने कहा कि निगरानी और उत्पीड़न के आरोपों की ठीक से जांच होनी चाहिए।
फोरम ने कहा कि मानवाधिकार कार्यों से जुड़े लोगों पर देशद्रोह जैसे गंभीर आरोप लगाने के लिए ठोस और स्पष्ट आधार होना जरूरी है। एचआरएफबी ने संबंधित अधिकारियों से मांग की कि गोस्वामी के खिलाफ लगाए गए आरोपों के कानूनी आधार और उनकी विश्वसनीयता की निष्पक्ष जांच की जाए। साथ ही, उनके द्वारा लगाए गए उत्पीड़न के आरोपों की भी निष्पक्ष जांच हो।
पिछले महीने आयरलैंड स्थित मानवाधिकार संगठन ‘फ्रंट लाइन डिफेंडर्स’ (एफएलडी) ने भी शम्पा गोस्वामी के खिलाफ हो रहे कथित हमलों और परेशानियों पर चिंता जताई थी। संगठन का कहना था कि यह उत्पीड़न उनकी महिला और धार्मिक अल्पसंख्यक पहचान से जुड़ा है और बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों के खिलाफ बढ़ती हिंसा और भेदभाव के माहौल का हिस्सा है।
एफएलडी ने गोस्वामी पर लगाए गए यात्रा प्रतिबंध और बांग्लादेश के गृह मंत्रालय की ओर से उनके खिलाफ शुरू की गई पुलिस जांच पर भी गंभीर चिंता व्यक्त की।
