काबुल, 4 नवंबर (आईएएनएस)। अफगानिस्तान में गंभीर कुपोषण का संकट लगातार गहराता जा रहा है। संयुक्त राष्ट्र के मानवीय मामलों के समन्वय कार्यालय (ओचा) ने बुधवार को कहा कि दक्षिणी अफगानिस्तान के अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में मरीजों की संख्या बढ़ने से वार्डों में भीड़ बढ़ रही है। गंभीर कुपोषण से पीड़ित लोगों को बड़ी संख्या में अस्पताल में भर्ती कराया जा रहा है।
अफगानिस्तान स्थित समाचार एजेंसी खामा प्रेस के मुताबिक, ओचा ने कहा कि दक्षिणी अफगानिस्तान के लोग कई तरह की समस्याओं का सामना कर रहे हैं। वहीं, मानवीय सहायता संगठनों को भी संसाधनों में लगातार कटौती का सामना करना पड़ रहा है। यह बयान ऐसे समय आया है, जब देश में खाद्य सुरक्षा की स्थिति बिगड़ने को लेकर चिंता बढ़ रही है।
इससे पहले अक्टूबर में खाद्य एवं कृषि संगठन और विश्व खाद्य कार्यक्रम ने आशंका जताई थी कि इस सर्दी में अफगानिस्तान की करीब 40 प्रतिशत आबादी गंभीर खाद्य असुरक्षा का सामना कर सकती है। दोनों एजेंसियों ने 2027 में तीव्र कुपोषण के मामलों में भी भारी बढ़ोतरी की आशंका जताई है।
संयुक्त राष्ट्र की दोनों एजेंसियों ने अक्टूबर में जारी एकीकृत खाद्य सुरक्षा चरण वर्गीकरण (आईपीसी) के ताजा विश्लेषण का हवाला देते हुए बताया था कि नवंबर से अप्रैल के बीच करीब 1.92 करोड़ लोग, यानी देश की 38 प्रतिशत आबादी, गंभीर खाद्य असुरक्षा का सामना करेगी। पिछले वर्ष इसी अवधि के लिए यह आंकड़ा 1.74 करोड़ रहने का अनुमान था।
रिपोर्ट के अनुसार, करीब 50 लाख लोगों के भुखमरी के आपातकालीन स्तर (आईपीसी फेज-4) तक पहुंचने की आशंका है। यह अप्रैल-सितंबर 2026 के लिए अनुमानित संख्या से दोगुना है। बदख्शां, बदगीस, दायकुंडी, घोर, समांगन, सर-ए-पोल और ग्रामीण गजनी में हालात सबसे खराब रहने की आशंका जताई गई है।
दोनों एजेंसियों ने कहा कि 2026 की तुलना में कुपोषण के मामलों में करीब 10 प्रतिशत की वृद्धि हो सकती है और इनकी संख्या 40 लाख तक पहुंच सकती है। इनमें लगभग एक चौथाई मामले गंभीर और जानलेवा कुपोषण के होंगे। रोकथाम और उपचार सेवाओं की कमी के कारण महिलाएं और बच्चे सबसे अधिक प्रभावित हो सकते हैं।
इस संकट के पीछे कई कारण बताए गए हैं। इनमें इस साल ईरान और पाकिस्तान से 12 लाख से अधिक अफगान नागरिकों की जबरन वापसी, सीमा बंद होने और होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से जरूरी वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि तथा मानवीय सहायता के लिए धन की भारी कमी शामिल है।
एजेंसियों ने यह भी कहा कि 2026 में अनुकूल बारिश के कारण फसल उत्पादन में सुधार हुआ है, लेकिन लगातार बेरोजगारी के चलते वे परिवार पौष्टिक भोजन खरीदने में सक्षम नहीं हैं, जो खुद खाद्यान्न का उत्पादन नहीं करते।
इससे पहले अगस्त में संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनिसेफ) ने बताया था कि अफगानिस्तान में 37 लाख बच्चे तीव्र कुपोषण से पीड़ित हैं। इनमें करीब 10 लाख बच्चे गंभीर तीव्र कुपोषण की जानलेवा स्थिति में हैं। यूनिसेफ के मुताबिक, दक्षिणी अफगानिस्तान के कई अस्पतालों में उपलब्ध प्रत्येक बिस्तर पर तीन से चार गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों को रखा जा रहा था।
