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बंगाल की नई औद्योगिक नीति होगी घोषित, ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ पर होगा जोर

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कोलकाता, 5 नवंबर (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी गुरुवार को राज्य सरकार की नई औद्योगिक नीति की घोषणा करेंगे। इस नीति में निवेश प्रस्तावों के लिए अनावश्यक सरकारी नियमों को हटाकर और त्वरित मंजूरी सुनिश्चित करके ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ (व्यापार करने में आसानी) पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।

राज्य सचिवालय के अंदरूनी सूत्रों ने बताया कि इसमें निवेशकों के लिए राज्य की प्रोत्साहन नीति को फिर से शुरू करने के प्रस्ताव शामिल होंगे। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार के दौरान इस नीति को खत्म कर दिया गया था लेकिन अब इसे अधिक व्यवस्थित और व्यापक रूप में वापस लाया जाएगा।

राज्य सचिवालय के एक सूत्र ने बताया, “औद्योगिक नीति का यह मसौदा उन नीतियों के आधार पर तैयार किया गया है जिन्हें औद्योगिक रूप से विकसित राज्यों ने अपनाया है।”

राज्य मंत्रिमंडल ने 28 अक्टूबर को इस औद्योगिक नीति के मसौदे को मंजूरी दे दी। अब, राज्य सचिवालय ‘नबन्ना’ में एक प्रशासनिक समीक्षा बैठक के बाद गुरुवार दोपहर को अंतिम औद्योगिक नीति की घोषणा की जाएगी।

नई औद्योगिक नीति का मसौदा मंत्रियों के एक समूह द्वारा तैयार किया गया है। इसे बनाने की प्रक्रिया में उद्योगपतियों, उद्योग संघों और आर्थिक विशेषज्ञों से भी परामर्श लिया गया था।

पश्चिम बंगाल औद्योगिक विकास निगम (डब्ल्यूबीआईडीसी) के सूत्रों ने बताया, “राज्य सरकार चाहती थी कि नई औद्योगिक नीति अधिक व्यवस्थित और व्यापक हो। इसमें निवेशकों के हितों, रोजगार सृजन की संभावनाओं और अन्य हितधारकों (जैसे कि वे जमीन मालिक जिनकी जमीन औद्योगिक परियोजनाओं के लिए अधिग्रहित की जाएगी) के हितों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की गई है। इसी वजह से, इस नीति की घोषणा की समय-सीमा को बार-बार आगे बढ़ाना पड़ा।”

शुरुआत में यह घोषणा की गई थी कि नई औद्योगिक नीति 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर जारी की जाएगी। हालांकि, ऐसा नहीं हो सका और इसकी समय-सीमा को बार-बार आगे बढ़ा दिया गया।

आखिरकार 28 अक्टूबर को राज्य मंत्रिमंडल ने औद्योगिक नीति के मसौदे को मंजूरी दे दी और यह घोषणा की गई कि इस नीति को गुरुवार को औपचारिक रूप से पेश किया जाएगा।

नई औद्योगिक नीति में निवेशकों के लिए प्रस्तावित प्रोत्साहनों के बारे में राज्य सचिवालय के सूत्रों ने बताया कि मुख्य जोर पिछड़े इलाकों में निवेश आकर्षित करने पर होगा, ताकि वहां विकसित होने वाली औद्योगिक परियोजनाओं को उस क्षेत्र के सामाजिक-आर्थिक विकास से जोड़ा जा सके।

राज्य सरकार के एक अधिकारी ने बताया, “इन प्रोत्साहनों में कई चीजें शामिल हो सकती हैं, जैसे कि परियोजना के शुरुआती वर्षों में बिजली शुल्क में छूट, उद्यमी द्वारा लिए गए ऋण पर ब्याज का एक निश्चित हिस्सा राज्य सरकार द्वारा वहन करना, और कर्मचारियों के भविष्य निधि (पीएफ) में कंपनी के योगदान की प्रतिपूर्ति करना।”

इस साल मई में पश्चिम बंगाल के नौवें मुख्यमंत्री के रूप में कार्यभार संभालने के बाद सुवेंदु अधिकारी ने घोषणा की थी कि राज्य में बड़े निवेश को बढ़ावा देने के लिए इसी साल एक व्यापक नई औद्योगिक नीति तैयार करके घोषित की जाएगी। इसके तहत जून में मंत्रियों के एक समूह को नई नीति तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।

नई औद्योगिक नीति की घोषणा से पहले मुख्यमंत्री ने दावा किया था कि इस नीति को इस तरह तैयार किया गया है जिससे राज्य में निवेश के लिए एक आदर्श माहौल बने, मंजूरियों में आने वाली नौकरशाही की अड़चनें दूर हों और बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा हों।