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उदयनिधि स्टालिन ने कृषि ऋण माफी में देरी को लेकर सीएम विजय की आलोचना की, सभी किसानों के लिए राहत की मांग

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चेन्नई, 5 नवंबर (आईएएनएस)। तमिलनाडु में विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन ने मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री ने फसल ऋण माफी के अपने वादे को लागू करने में देरी की है और राज्य सरकार ने किसानों को धोखा दिया है तथा अपने चुनावी वादों को पूरा करने में विफल रही है।

गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में उदयनिधि ने सवाल किया कि मुख्यमंत्री कृषि ऋण पूरी तरह से माफ करने की घोषणा कब करेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों और विपक्षी दलों के बढ़ते विरोध के बावजूद सरकार चुप बैठी है।

उदयनिधि ने पूछा कि यह ‘डमी’ मुख्यमंत्री किसानों के फसल ऋण माफ करने की घोषणा कब करेंगे? उन्होंने विजय के नेतृत्व वाली सरकार पर किसान समुदाय को गुमराह करने का आरोप लगाया।

उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता में आने से पहले सत्तारूढ़ दल ने सभी फसल ऋण माफ करने का वादा किया था लेकिन बाद में सरकार एक ‘स्लैब-आधारित’ प्रणाली ले आई, जिसके तहत केवल एक सीमित राशि ही माफ की जाएगी।

इस प्रस्ताव का डीएमके, अन्य विपक्षी दलों और किसान संगठनों ने कड़ा विरोध किया। उन्होंने बिना किसी शर्त के पूरा कर्ज माफ करने की मांग की।

उदयनिधि ने याद दिलाया कि मंत्रियों ने विरोध कर रहे किसानों को आश्वासन दिया था कि धारापुरम और मदुरंतकम विधानसभा उपचुनावों के बाद बातचीत की जाएगी। हालांकि, चुनाव के लगभग एक महीने बाद भी, सरकार ने न तो कोई सार्थक बातचीत शुरू की है और न ही कर्ज माफी पर अपना रुख स्पष्ट किया है।

उन्होंने कहा कि किसानों को डर है कि सरकार अपना मूल वादा पूरा करने के बजाय, एक और सीमित राहत देने की घोषणा करने की तैयारी कर रही है।

आने वाले त्योहारों का जिक्र करते हुए डीएमके नेता ने कहा कि जो किसान पहले से ही त्योहार न मना पाने के कारण निराश हैं, वे अब इस बात को लेकर चिंतित हैं कि क्या वे बिना किसी आर्थिक तंगी के आने वाला ‘पोंगल’ त्योहार मना पाएंगे।

उदयनिधि ने ‘कुरुवई’ फसल सीजन की विफलता को लेकर भी सरकार की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि कावेरी नदी का पानी समय पर और पर्याप्त मात्रा में न छोड़े जाने से किसानों को भारी नुकसान हुआ है।

उन्होंने मुख्यमंत्री विजय पर विधानसभा को गुमराह करने का आरोप लगाया। मुख्यमंत्री ने दावा किया था कि ‘कुरुवई’ विशेष सहायता पैकेज सूखा राहत का हिस्सा है और मुआवजा पहले ही दिया जा चुका है।

विपक्षी नेता ने मांग की कि सरकार और शर्तें थोपने के बजाय, सभी पात्र किसानों का पूरा फसल ऋण तुरंत माफ करने की घोषणा करे। उन्होंने सत्तारूढ़ सरकार पर यह आरोप भी लगाया कि वह कृषि संकट को सुलझाने में पिछली सरकारों की तरह ही विफल रही है।