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धनतेरस पर क्या करें, क्या न करें, जानिए प्रयागराज की ज्योतिषाचार्य शिप्रा सचदेव से

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प्रयागराज, 6 नवंबर (आईएएनएस)। धनतेरस यानी धन्वंतरि त्रयोदशी का त्योहार सुख-समृद्धि, आरोग्य और खुशहाली का प्रतीक है। मान्यता है कि इस दिन शुभ मुहूर्त में की गई खरीदारी और पूजा घर में सालभर बरकत बनाए रखती है। प्रयागराज की प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य शिप्रा सचदेव ने आईएएनएस से बातचीत में धनतेरस पर क्या करें और क्या न करें, इसके बारे में विस्तार से जानकारी दी।

उन्होंने कहा कि धनतेरस के दिन सुबह से ही खरीदारी की जा सकती है। इस बार पूरे दिन खरीदारी का शुभ योग बन रहा है। सिर्फ सुबह 10.30 बजे से दोपहर 12 बजे तक के समय को छोड़कर खरीदारी करनी चाहिए। इसके अलावा संपूर्ण दिन खरीदारी के लिए शुभ है।

उन्होंने कहा कि धनतेरस पर पांच चीजें अवश्य खरीदकर घर लानी चाहिए। सबसे पहले झाड़ू, दूसरी चीज नमक, तीसरी धनिया, चौथी हल्दी और पांचवीं धातु से बनी कोई भी वस्तु। इन पांच चीजों का धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व है।

शिप्रा सचदेव ने बताया कि झाड़ू राहु का प्रतीक होता है। यह घर से नकारात्मकता को दूर करता है और मां लक्ष्मी का सूचक माना जाता है। झाड़ू खरीदने से राहु संतुलित होता है और घर में अच्छी ग्रोथ आती है। इसलिए धनतेरस पर झाड़ू जरूर लाना चाहिए।

नमक शनि का प्रतीक होता है। यह नकारात्मकता को दूर करता है और घर में किसी भी चीज की कमी नहीं होने देता। मान्यता है कि धनतेरस पर नमक खरीदने से शनि की शुभ दृष्टि बनी रहती है।

धनिया बुध और भगवान गणेश का प्रतीक है। इससे घर में सुख, समृद्धि, वैभव और बुद्धि का विकास होता है। जब हमारी बुद्धि सही रहती है, तो जीवन के सभी कार्य सही ढंग से पूरे होते हैं। इसलिए धनतेरस पर धनिया खरीदना अत्यंत शुभ माना गया है।

हल्दी गुरु का प्रतीक है और भगवान विष्णु को समर्पित मानी जाती है। इससे घर में धन-धान्य की कभी कमी नहीं होती और बीमारियों से मुक्ति मिलती है। इसलिए धनतेरस पर हल्दी अवश्य लेकर आनी चाहिए।

शिप्रा सचदेव ने कहा कि अन्य चीजें समय के साथ खराब हो जाती हैं, लेकिन धातु लंबे समय तक चलती है और कभी खराब नहीं होती। इसलिए सोना, चांदी, तांबा या पीतल से बनी कोई भी वस्तु अवश्य खरीदनी चाहिए, ताकि बरकत हमेशा जीवन में बनी रहे।

उन्होंने बताया कि शाम को पूजा का शुभ मुहूर्त 6 बजकर 2 मिनट से शुरू होकर 7 बजकर 58 मिनट तक रहेगा। इस समय पूजा करना सबसे उत्तम रहेगा। इस दौरान भगवान धन्वंतरि की पूजा अवश्य करनी चाहिए, ताकि निरोगी काया मिले और घर में किसी को लंबे समय से चली आ रही बीमारी से मुक्ति मिले।

उन्होंने यह भी कहा कि पूजा के समय चौमुखी दीया घर के अंदर और बाहर दोनों तरफ अवश्य जलाना चाहिए। इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा आती है और मां लक्ष्मी का वास होता है।