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सावरकर की परिभाषा से मुसलमान-ईसाई हो जाते हैं अलग : उदित राज

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नई दिल्ली, 6 नवंबर (आईएएनएस)। कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह के हिंदुत्व वाले बयान पर कांग्रेस प्रवक्ता उदित राज ने सावरकर की परिभाषा पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि सावरकर के पुण्यभूमि वाले फॉर्मूले से मुसलमानों और ईसाइयों के लिए भारत जन्मभूमि तो है, लेकिन पुण्यभूमि नहीं रह जाती, इसलिए यह हिंदुत्व नहीं, बल्कि बांटने वाली सोच है।

उदित राज ने यह भी कहा कि आजादी की लड़ाई में 61 हजार मुसलमानों और 8 हजार सिखों ने कुर्बानी दी और सवर्ण हिंदुओं का योगदान अपेक्षाकृत कम रहा था। इसके बावजूद इस तरह की बातें की जाती हैं। इसलिए यह हिंदुत्व नहीं है, बल्कि बांटने वाली सोच है। एक बात और है, हिंदू है कौन? यहां मुझे तो नहीं लगता कि एक भी व्यक्ति केवल हिंदू है। यहां हिंदू कौन है? अगर सही रूप से बातों को रखा जाए, तो इसका जवाब देना आसान नहीं है। लेकिन चर्चा करने और बहस करने की हिम्मत नहीं है।

उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने चुनौती दी है कि पीएम मोदी चर्चा करें। संसद को तो इन्होंने बंधक बना रखा है। स्पीकर माइक म्यूट करा देते हैं, बोलने नहीं देते। विपक्ष के लोग भी हंगामा करते हैं, जिससे चर्चा नहीं हो पाती। यही कारण है कि हिंदुत्व की राजनीति करने वाले लोग स्वयं उसके जाल में फंस गए हैं। जहां तक संघियों की बात है, उनका देश की आजादी से कोई विशेष संबंध नहीं रहा है। इसलिए यदि वे हिंदू राष्ट्र के बारे में बात करें, तो उससे बड़ा विरोधाभास कुछ नहीं हो सकता। जिनके पूर्वजों ने आजादी की लड़ाई में भाग नहीं लिया, वे आज राष्ट्रवाद का सबसे बड़ा प्रमाण पत्र बांट रहे हैं।

उन्होंने कहा कि आप यह कह रहे हैं कि आजादी की लड़ाई में 61 हजार मुसलमानों ने कुर्बानी दी, सिखों का योगदान भी बड़ा रहा और हिंदुओं का योगदान अपेक्षाकृत कम रहा। नेतृत्व भले अलग-अलग समुदायों के लोगों ने किया हो, लेकिन जो लोग शहीद हुए और जिन्होंने वास्तव में कुर्बानी दी, उनका योगदान याद रखा जाना चाहिए।

झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने दावा किया कि 40 लाख युवा राहुल गांधी के इशारे का इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि भारत का हाल बांग्लादेश और नेपाल से भी बुरा हो सकता है। इसे लेकर उदित राज ने कहा कि अब इरफान अंसारी ही जानते होंगे कि वे 40 लाख युवा कहां हैं? 40 लाख नहीं, 4 करोड़ लोग भी हों, तब भी हमारा संघर्ष लोकतांत्रिक और जनतांत्रिक है। हमारा रास्ता न बांग्लादेश वाला है और न नेपाल वाला। हम लोकतंत्र में विश्वास करते हैं।

उन्होंने कहा कि नेपाल में उन्माद के दौरान अपनी ही धरोहर जला दी गई, संसद तक को आग लगा दी गई। बांग्लादेश में भी जो हुआ, वह बेहद वीभत्स था। हमारा मार्ग वह नहीं है। हमारा मार्ग अहिंसा का है। अराजकता तो इस देश में गृह मंत्री पैदा कर रहे हैं। गृह मंत्री का काम कानून-व्यवस्था बनाए रखना है, न कि पदयात्रा करना। कई बार ऐसा लगता है कि मानो वे सत्ता में नहीं, विपक्ष में हों।