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नवंबर के पहले सप्ताह में बहुआयामी कूटनीति संग आगे बढ़ा भारत, सुरक्षा, व्यापार और रणनीतिक साझेदारी पर रहा जोर

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नई दिल्ली, 8 नवंबर (आईएएनएस)। नवंबर का पहला सप्ताह भारत के लिए संभावनाओं और उम्मीदों से भरा रहा। दुनिया के कई देशों में हमारी कूटनीतिक साझेदारी की चर्चा रही तो दीपावली का उल्लास सात समंदर पार भी दिखा।1 से 7 नवंबर के बीच भारत की कूटनीतिक गतिविधियों में वियतनाम के साथ रणनीतिक संबंधों को मजबूत करने, कॉमनवेल्थ देशों के साथ आर्थिक सहयोग बढ़ाने और नेपाल के साथ द्विपक्षीय संपर्कों को आगे बढ़ाने पर विशेष जोर दिखाई दिया।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल की विभिन्न देशों के नेताओं के साथ हुई मुलाकातों ने भारत की बहुआयामी कूटनीति को रेखांकित किया।

इस अवधि में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने 1 और 2 नवंबर को वियतनाम की आधिकारिक यात्रा की। हनोई में उन्होंने वियतनाम के सार्वजनिक सुरक्षा मंत्री जनरल लुओंग टैम क्वांग के साथ उच्चस्तरीय बातचीत की। दोनों देशों ने सुरक्षा और खुफिया सहयोग को और मजबूत करने पर सहमति जताई। बातचीत में कानून प्रवर्तन, साइबर सुरक्षा, समुद्री सुरक्षा और आर्थिक सुरक्षा जैसे मुद्दे प्रमुख रहे। दोनों पक्षों ने इन क्षेत्रों में क्षमता निर्माण और सूचनाओं के आदान-प्रदान को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया।

डोभाल ने वियतनाम की कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव और राष्ट्रपति तो लाम से भी मुलाकात की। इसके अलावा उन्होंने उपप्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री जनरल फान वान जियांग तथा विदेश मंत्री ले होआई ट्रुंग के साथ भी चर्चा की। इन बैठकों में रक्षा सहयोग, क्षेत्रीय स्थिरता, ऊर्जा सुरक्षा और आपूर्ति श्रृंखला से जुड़े मुद्दों पर विचार-विमर्श हुआ।

भारत और वियतनाम ने अपने संबंधों को एन्हांस्ड कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप के स्तर तक पहुंचाया है। डोभाल की यात्रा इस साझेदारी को जमीन पर आगे बढ़ाने के लिहाज से महत्वपूर्ण रही। दोनों देशों के बीच 2027 में राजनयिक संबंधों की स्थापना के 55 वर्ष पूरे होंगे। भारत के लिए वियतनाम दक्षिण-पूर्व एशिया में एक महत्वपूर्ण साझेदार है। इस क्षेत्र में भारत की एक्ट ईस्ट नीति, समुद्री सुरक्षा और आर्थिक संपर्क को मजबूत करने में वियतनाम की अहम भूमिका है।

इसी दौरान विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अमेरिका में भारत के महावाणिज्य दूतों के साथ बैठक कर भारत-अमेरिका संबंधों की समीक्षा की। 2 नवंबर को हुई इस चर्चा में दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों और विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग पर विचार किया गया।

भारत की कूटनीतिक सक्रियता का एक महत्वपूर्ण पड़ाव एंटीगुआ और बारबुडा में आयोजित कॉमनवेल्थ शासनाध्यक्षों की बैठक (सीएचओजीएम) 2026 भी रही। जयशंकर ने इस बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व किया। इस दौरान उन्होंने विकासशील देशों के बीच आर्थिक सहयोग, व्यापारिक संपर्क और आपूर्ति श्रृंखलाओं को अधिक मजबूत बनाने की जरूरत पर जोर दिया।

कॉमनवेल्थ देशों के व्यापारिक नेताओं की बैठक में जयशंकर ने कहा, “सदस्य देशों को अपनी आपूर्ति श्रृंखलाओं में जोखिम कम करने और उनमें विविधता लाने की दिशा में काम करना चाहिए।” उन्होंने छोटे और भरोसेमंद व्यापारिक मार्गों, बेहतर संपर्क व्यवस्था तथा स्थानीय वितरण नेटवर्क को मजबूत करने की जरूरत बताई। उनके अनुसार, डिजिटल समाधान, कौशल विकास और व्यावसायिक प्रशिक्षण भी सदस्य देशों के बीच आर्थिक साझेदारी को नई गति दे सकते हैं।

जयशंकर ने अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन और आपदा रोधी अवसंरचना गठबंधन जैसी पहलों के जरिए जलवायु कार्रवाई को आगे बढ़ाने की बात भी रखी। उन्होंने आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में भारत के अनुभव का उल्लेख करते हुए स्थानीय स्तर पर ऐसे केंद्र विकसित करने पर जोर दिया, जो आपात स्थितियों में राहत और बचाव कार्यों को अधिक प्रभावी बना सकें।

कॉमनवेल्थ बैठक के दौरान जयशंकर ने गुयाना के राष्ट्रपति इरफान अली से मुलाकात की। दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय सहयोग की समीक्षा की। इस दौरान गुयाना में सड़क, स्वास्थ्य और रक्षा क्षेत्र की परियोजनाओं के लिए 500 मिलियन डॉलर की लाइन ऑफ क्रेडिट बढ़ाने की घोषणा की गई। दोनों देशों के बीच सूक्ष्म और लघु उद्यमों के लिए विनिर्माण परियोजनाओं, त्वरित प्रभाव वाली परियोजनाओं और डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना के क्षेत्र में भी समझौते हुए। गुयाना में भारत की यूपीआई जैसी भुगतान प्रणाली विकसित करने में सहयोग पर भी सहमति बनी।

जयशंकर ने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम से भी मुलाकात की। दोनों नेताओं ने व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौते (सीईटीए) के संदर्भ में द्विपक्षीय आर्थिक सहयोग को आगे बढ़ाने और बदलते वैश्विक हालात पर विचारों का आदान-प्रदान किया। उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज से भी बातचीत की। इसके अलावा एंटीगुआ और बारबुडा के गवर्नर जनरल रॉडनी विलियम्स से मुलाकात तथा वहां बसे भारतीय समुदाय के सदस्यों के साथ संवाद किया।

वहीं, विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने 4 और 5 नवंबर को नेपाल की यात्रा की। उन्होंने नेपाल के शीर्ष नेतृत्व और अधिकारियों के साथ मुलाकात कर द्विपक्षीय साझेदारी की समीक्षा की। दोनों पक्षों ने विकास सहयोग, संपर्क परियोजनाओं और आपसी संबंधों को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई।

भारत की पड़ोसी प्रथम नीति के लिहाज से नेपाल के साथ नियमित उच्चस्तरीय संवाद महत्वपूर्ण है। दोनों देशों के बीच गहरे सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक संबंध हैं। सीमा पार संपर्क, ऊर्जा, व्यापार और बुनियादी ढांचे की परियोजनाएं इस साझेदारी के प्रमुख आधार हैं।

भारत और भूटान के विशेष संबंधों की एक सांस्कृतिक झलक भी बीते सप्ताह का आकर्षण रही। भूटान के गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी में 1 नवंबर को 108 बौद्ध स्तूपों की स्थापना और अभिषेक का कार्यक्रम आयोजित किया गया।

भूटान के राजा जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक ने इनमें से 76वें स्तूप को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को समर्पित किया। यह सम्मान गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी परियोजना के लिए पीएम मोदी के समर्थन और भारत-भूटान संबंधों को मजबूत करने में उनके योगदान के प्रति सम्मान के तौर पर दिया गया।

भारत की ओर से केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने इस समारोह में हिस्सा लिया। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी की ओर से भूटान के राजा के प्रति आभार व्यक्त किया।

दूसरी ओर दीपावली की धूम भी विदेशों में अलग-अलग समय में देखने को मिली। भारत की सांस्कृतिक कूटनीति का प्रभाव दुनिया के कई देशों में दिखाई दिया। अमेरिका के पांच राज्यों के गवर्नरों ने आधिकारिक स्थानों पर दिवाली समारोह आयोजित कर भारतीय-अमेरिकी समुदाय के योगदान को सम्मान दिया।

जापान में भारतीय दूतावास के आयोजन में जापानी मंत्रियों और सांसदों ने हिस्सा लिया। वहीं यूरोप के कई राजनयिकों ने भी दिवाली की शुभकामनाएं दीं और भारतीय परंपराओं की सराहना की।

न्यूयॉर्क राज्य और कनाडा के टोरंटो शहर ने 8 नवंबर को आधिकारिक तौर पर दिवाली दिवस घोषित किया। टोरंटो ने नवंबर को हिंदू विरासत माह के रूप में भी मान्यता दी।

यह घटनाक्रम भारत की सॉफ्ट पावर, प्रवासी भारतीयों के प्रभाव और सांस्कृतिक जुड़ाव के बढ़ते महत्व को दर्शाता है। कुल मिलाकर नवंबर के पहले सप्ताह की कूटनीतिक गतिविधियों में भारत ने सुरक्षा सहयोग से लेकर आर्थिक साझेदारी और क्षेत्रीय संपर्क तक कई मोर्चों पर अपनी भागीदारी बढ़ाई।