सत्यमेव मानसिक विकास केंद्र ने “कोई सुनता तो जी उठते हम” ट्रेनिंग प्रोग्राम का किया आयोजन, डायरेक्टर स्मिता कुमारी ने दी ट्रेनिंग

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नई दिल्ली : 11 सितम्बर/ आत्महत्या एक संवेदनशील विषय है. इस विषय पर बात तो होती है लेकिन यह चर्चा तब शुरू होती जब कोई बड़ा नाम इस तरह का कदम उठाता है. इसके पूर्व आभासों और लक्षणों पर चर्चा शायद ही होती है. ऐसे में आत्महत्या के साथ इसके कारण और लक्षणों पर बात करना बेहद जरुरी है. हर साल 10 सितंबर को विश्व भर में विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस के रूप में मनाया जाता है. इसके लिए सत्यमेव मानसिक विकास केंद्र द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर वेबिनार कम ट्रेनिंग का आयोजन किया गया था. लेकिन ट्रेनिंग लेने में ज्यादा रुचि रखने वालों के रजिस्ट्रेशन को देखकर इसे ट्रेनिंग प्रोग्राम के रूप में आयोजित किया गया. कार्यक्रम में सत्यमेव मानसिक विकास केंद्र की डायरेक्टर और रिहैबिलिटेशन साइकोलॉजिस्ट स्मिता कुमारी ने ट्रेनिंग में भाग लेने वाले 30 प्रतिभागियों को ट्रेनिंग दी.

इस ट्रेनिंग कार्यक्रम में देश के कई राज्यों से प्रतिभागी जुड़े हुए थे. अलग-अलग प्रोफेशन से जुड़े लोगों के कारण यह ट्रेनिंग प्रोग्राम काफी रोचक हो गया. ट्रेनिंग कार्यक्रम को लेकर केंद्र की डायरेक्टर स्मिता कुमारी ने कहा, ”पहले इस कार्यक्रम को वेबिनार के रूप में 100 लोगों की एंट्री के साथ आयोजित किया जा रहा था. लेकिन अलग-अलग देश के कई प्रतिष्ठित संस्थानों से स्टूडेंट और अधिकारियों ने प्रशिक्षण लेने के लिए खुद को रजिस्टर कराया. इसके कारण इस वेबिनार को 30 प्रतिभागियों की एंट्री के बाद रजिस्ट्रेशन बंद कर के इसे एक ट्रेनिंग प्रोग्राम के रूप में आयोजित किया गया. चूंकि ट्रेनिंग प्रोग्राम एक छोटे समूह में करना ही संभव हो पाता इसलिए अन्य इच्छुक लोगों के लिए अलग से ट्रेनिंग प्रोग्राम आने वाले समय में आयोजित किया जाएगा.’

स्मिता कुमारी ने आगे कहा ”यह देखकर खुशी महसूस हुई कि लोग इस संवेदनशील विषय को समझने और समाज में मेंटल हेल्थ पर अवेयरनेस फैलाने में रुचि रखते हैं. आज हम सबको आत्महत्या को लेकर और इसके कारणों को लेकर संवेदनशीलता के साथ बात करनी चाहिए. ताकि लोग ऐसे कदम उठाने से पहले अपनों के साथ सहजता के साथ बात कर सकें. ऐसा माहौल बनाने में यह ट्रेनिंग कार्यक्रम हमारे प्रतिभागियों की मदद करेगा.”

रिहैबिलिटेशन साइकोलॉजिस्ट स्मिता ने बताया कि इस ट्रेनिंग कार्यक्रम में मध्यप्रदेश, दिल्ली, बिहार, पंजाब, और राजस्थान से लेकर कई राज्यों के प्रतिभागी जुड़े थे. इसमें देश के प्रतिष्ठित संस्थान जैसे जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के छात्र, इग्नू से मनोविज्ञान के छात्र-छात्राएं, एयरफोर्स से रिटायर्ड विंग कमांडर, प्रोफेसर, टीचर, डॉक्टर, बैंकर, सामाजिक कार्यकर्ता और अन्य लोग भी शामिल थे. यहां तक कि इस कार्यक्रम में बाल कलाकार भी शामिल थे जो देशभर में अपनी कलाओं का प्रदर्शन करते हें. इस ट्रेनिंग कार्यक्रम का नाम “कोई सुनता तो जी उठते हम” रखा गया था.