नई दिल्ली, 19 जनवरी (आईएएनएस)। आय से अधिक संपत्ति के मामले में शिरोमणि अकाली दल के नेता और पूर्व मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया को फिलहाल सुप्रीम कोर्ट से कोई राहत नहीं मिली है। सुप्रीम कोर्ट में उनकी जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान सरकार ने जवाब दाखिल करने के लिए दो हफ्ते का समय मांगा है। अब अगली सुनवाई 2 फरवरी को होगी।
वहीं, अदालत ने मजीठिया को जेल में खतरे को लेकर सवाल भी उठाया। अब इस मामले की अगली सुनवाई 2 फरवरी को होगी। मजीठिया की ओर से पेश वकील ने अंतरिम जमानत की मांग की। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगली सुनवाई पर अंतरिम जमानत की मांग पर विचार करेंगे।
बिक्रम सिंह मजीठिया को 25 जून को गिरफ्तार किया गया था। अमृतसर स्थित उनके आवास और 25 अन्य जगहों पर विजिलेंस टीम ने छापेमारी की थी। इस दौरान डिजिटल उपकरण, प्रॉपर्टी डॉक्यूमेंट्स और वित्तीय रिकॉर्ड्स जब्त किए गए थे। 26 जून को उन्हें सात दिन की पुलिस रिमांड पर भेजा गया, जो बाद में चार दिन बढ़ाई गई। 6 जुलाई से वह न्यायिक हिरासत में हैं और फिलहाल नाभा जेल में बंद हैं।
विजिलेंस ने 22 अगस्त को चार्जशीट दाखिल की, जो 40,000 पन्नों से ज्यादा की है। इसमें 200 से ज्यादा गवाहों के बयान भी शामिल हैं। यह मामला मूल रूप से 2013 की उस जांच से जुड़ा है, जिसमें 6,000 करोड़ के सिंथेटिक ड्रग रैकेट का खुलासा हुआ था। उस समय पूर्व डीएसपी जगदीश सिंह भोला ने मजीठिया का नाम जांच में लिया था।
हालांकि, ड्रग से जुड़े आरोप बाद में अदालत ने खारिज कर दिए। मौजूदा केस भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग पर केंद्रित है।
चार्जशीट में बताया गया है कि मजीठिया की 700 करोड़ रुपए की संपत्ति अवैध और बेमानी है। पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश और दिल्ली में 15 जगहों की जांच के बाद यह रिपोर्ट तैयार की गई। इसमें कई अकाली और भाजपा नेताओं के बयान भी दर्ज हैं। विजिलेंस का कहना है कि उन्होंने तय समय पर चार्जशीट दाखिल की है।

