बर्थडे स्पेशल: ‘काकाबाबू’ के जासूसी किरदार से भरा रोमांच, पहला उपन्यास लिखकर डर गए...
नई दिल्ली, 6 सितंबर (आईएएनएस)। बंगाली साहित्य के सबसे प्रसिद्ध और बहुआयामी लेखकों में से एक, सुनील गंगोपाध्याय ने बंगाली साहित्य की दुनिया में बतौर कवि प्रवेश किया था। 1953 में उन्होंने कृत्तिबास नाम की पत्रिका की शुरुआत की, जो बाद में युवा कवियों के लिए एक मंच बन गई। इसके बाद 1965 में उन्होंने पहला उपन्यास 'आत्मप्रकाश' लिखा, लेकिन कवि से उपन्यासकार बनने का अनुभव उनके लिए डरावना था।
साहित्य अकादमी दिल्ली में ‘संतोष चौबे के नए कहानी संग्रह ‘ग़रीबनवाज़’ का हुआ लोकार्पण
भोपाल : 5 सितम्बर/ वरिष्ठ कवि–कथाकार, निदेशक विश्व रंग एवं रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय के कुलाधिपति श्री संतोष चौबे के ताजा कहानी संग्रह 'ग़रीबनवाज़' का...
एक लेखक की जिंदगी में बहुत सी बाधाएं, कहानी लिखते वक्त हुआ एहसास: दिव्या...
मुंबई, 29 अगस्त (आईएएनएस)। अभिनेत्री दिव्या दत्ता को हाल ही में वेब सीरीज ‘मायासभा’ में देखा गया था। ये एक साउथ इंडियन पॉलिटिकल-थ्रिलर वेब सीरीज है। नेशनल अवॉर्ड जीत चुकीं एक्ट्रेस दिव्या दत्ता को अलग-अलग प्रोजेक्ट में कई बेहतरीन किरदारों में देखा गया। वो एक बेहतरीन एक्ट्रेस होने के साथ ही एक अच्छी लेखिका भी हैं। उन्होंने 'मी एंड मा' और 'द स्टार्स इन माई स्काई: दोज हू ब्राइटन्ड माई फिल्म जर्नी' नाम की दो किताबें लिखी हैं।
सुप्रतिष्ठित कवि–कथाकार श्री संतोष चौबे “सुदीर्घ सेवा सम्मान–2025” से हुए सम्मानित
भोपाल : 28 अगस्त/ आकार वीडियोटेक के प्रतिष्ठित आयोजन ‘आकार फिल्मोत्सव’ में सुप्रसिद्ध कवि–कथाकार एवं विश्व रंग के निदेशक श्री संतोष चौबे को साहित्य,...
भारतीय ज्ञान परंपरा का अंतिम लक्ष्य ब्रह्मज्ञान तक पहुँचना – संतोष चौबे
भोपाल : 22 अगस्त/ रबींद्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय, भोपाल में मानविकी एवं उदार कला संकाय तथा संस्कृत प्राच्य भाषा एवं भारतीय ज्ञान परंपरा केंद्र के...
‘वैष्णव की फिसलन’, परसाई की कृति जो आज भी समाज को आईना दिखाती है
नई दिल्ली, 21 अगस्त (आईएएनएस)। आज के दौर में लोग अपने अंदर की कमी को दूर करने से ज्यादा दूसरों में कमी ढूंढने की तलाश में रहते हैं। लोगों को सोच ऐसी हो गई है कि उन्हें लगता है कि वह जो कहते हैं, बोलते हैं वह एकदम सही है और दूसरा व्यक्ति जो कह रहा है वह गलत है उसमें सुधार की जरूरत है। हिंदी साहित्य के एक प्रसिद्ध व्यंग्यकार हरिशंकर परसाई का व्यंग्य ‘वैष्णव की फिसलन’ उन लोगों पर सटीक बैठती है तो अपनी कमियों को छिपाने के लिए नैतिकता का मुखौटा पहन लेते हैं।
कला केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं, यह समाज की आत्मा और उसकी संवेदनाओं को...
भोपाल : 19 अगस्त/ मध्यप्रदेश की कला और संस्कृति को समर्पित तीन दिवसीय आयोजन “सृजन साधना – कला प्रदर्शनी एवं चर्चा” का भव्य उद्घाटन...
ज़मीं लाल थी आसमां काला का मंचन हुआ एलबीटी में
भोपाल : 17 अगस्त/ रबीन्द्रनाथ टैगोर विष्वविद्यालय के टैगोर राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के एम.ए. ड्रामाटिक्स के फाइनल इयर के विद्यार्थियों की अंतिम नाट्य प्रस्तुति...
RNTU में हिन्दी छंद लेखन सर्टिफिकेट कोर्स के दो बैच सम्पन्न हुवा, प्रमाण पत्र...
भोपाल : 7 अगस्त/ छंद ही काव्य का वास्तविक स्वरूप है, आज के मंचों से जिस तरह से मूल छंदों का लोप हो रहा...
दिव्या यादव की पुस्तक “स्टारडस्ट ऑफ इमोशंस” का अरेरा क्लब में आयोजित कार्यक्रम...
भोपाल : 7 अगस्त/ आईसेक्ट पब्लिकेशन, क्लब लिटरटी और स्कोप ग्लोबल स्किल विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित पुस्तक विमोचन कार्यक्रम में सुश्री दिव्या...











