मैसूरु दशहरा का उद्घाटन करेंगे अभिनव गविसिद्धेश्वर महास्वामीजी, सीएम शिवकुमार की सांस्कृतिक भव्यता देखने...
बेंगलुरु, 28 सितंबर (आईएएनएस)। कर्नाटक सरकार ने सोमवार को अभिनव गविसिद्धेश्वर महास्वामीजी को ऐतिहासिक मैसूरु दशहरा उत्सव का उद्घाटन करने के लिए औपचारिक रूप से आमंत्रित किया।
केदारनाथ के रास्ते पर पत्थर गिरने से पांच साल के बच्चे की मौत; 1200...
रुद्रप्रयाग, 28 सितंबर (आईएएनएस)। उत्तराखंड में केदारनाथ ट्रेकिंग रूट पर चिरबासा के पास पहाड़ी से गिरे पत्थर की चपेट में आने से पांच साल के एक बच्चे की मौके पर ही मौत हो गई।
पितृपक्ष विशेष: बोधगया में बुद्ध मंदिर परिसर में भी होता है पिंडदान, वर्षों पुरानी...
बोधगया, 27 सितंबर (आईएएनएस)। बिहार के गया जिले में स्थित बोधगया दुनिया भर में भगवान बुद्ध की ज्ञानस्थली और यूनेस्को विश्व धरोहर महाबोधि मंदिर के लिए प्रसिद्ध है। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि बोधगया का पितृपक्ष और श्राद्धकर्म की परंपरा से भी गहरा संबंध है। सनातन परंपरा के अनुसार यहां पितृ तर्पण और पिंडदान का विशेष महत्व माना जाता है और पितृपक्ष के दौरान देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए यहां पहुंचते हैं।
बंगाल सरकार गौमाता की रक्षा करेगी, संतों का अपमान करने वालों को जेल भेजेगी:...
कोलकाता, 27 सितंबर (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने रविवार को कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाली राज्य सरकार गौमाता की रक्षा करेगी और साधुओं का अपमान करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करेगी और उन्हें जेल भेजेगी।
गयाजी में इन प्रमुख स्थानों पर पिंडदान का है विशेष महत्व, अलग-अलग दोषों से...
गयाजी, 27 सितंबर (आईएएनएस)। पितृपक्ष के दौरान बिहार का गयाजी दुनिया भर के सनातन श्रद्धालुओं की आस्था का सबसे बड़ा केंद्र बन जाता है। धार्मिक मान्यता है कि गयाजी में पिंडदान और तर्पण करने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है और उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है। यही वजह है कि हर साल देश-विदेश से लाखों लोग अपने पूर्वजों के निमित्त यहां पहुंचते हैं। शास्त्रों में गयाजी को पितृ कर्म के लिए सर्वोच्च तीर्थ बताया गयाजी है और कहा जाता है कि यहां विधि-विधान से पिंडदान करने पर सात पीढ़ियों तक के पितरों का उद्धार होता है।
पितृपक्ष : उज्जैन में पिंडदान का खास महत्व, माता पार्वती से जुड़ी है सिद्धवट...
नई दिल्ली, 26 सितंबर (आईएएनएस)। पितृ पक्ष में लोग अपने पूर्वजों को याद करते हैं। कोई घर पर श्राद्ध करता है, तो कोई पवित्र नदियों के किनारे जाकर तर्पण और पिंडदान करता है। मध्य प्रदेश की धार्मिक नगरी उज्जैन भी ऐसी ही जगहों में शामिल है, जहां पितरों के लिए किए जाने वाले इन कर्मों की पुरानी परंपरा रही है।
पितृपक्ष : काशी में विधि-विधान से श्राद्ध करने पर मिलती है प्रेत योनि से...
वाराणसी, 26 सितंबर (आईएएनएस)। पितृपक्ष शुरू होते ही लाखों श्रद्धालु अपने पितरों की मुक्ति के लिए गया, प्रयागराज और हरिद्वार की ओर रुख करते हैं, लेकिन काशी की धार्मिक परंपरा में एक मान्यता ऐसी है जो इसे सबसे अलग बनाती है। कहा जाता है कि यदि किसी की अकाल मृत्यु हुई हो तो गया जाने से पहले काशी में पिंडदान करना आवश्यक होता है। इसी वजह से काशी को पितरों के श्राद्ध का प्रथम द्वार भी कहा जाता है।
पितृपक्ष में कौवे को भोजन खिलाने से जुड़ी है ये पौराणिक कथा और मान्यता
नई दिल्ली, 26 सितंबर (आईएएनएस)। पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करने वाला पितृ पक्ष शनिवार से शुरू हो चुका है। भाद्रपद मास की पूर्णिमा से लेकर आश्विन मास की अमावस्या तक का समय श्राद्ध एवं पितृ पक्ष कहलाता है। पितृ पक्ष के दौरान पितरों की मृत्यु तिथि पर श्राद्ध पितृ दोष से मुक्ति मिलती है। पितरों के श्राद्ध का भोजन कौवे को खिलाने की परंपरा है।
हैदराबाद में खैरताबाद के बड़े गणेश की मूर्ति का विसर्जन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न...
हैदराबाद, 25 सितंबर (आईएएनएस)। हैदराबाद के प्रसिद्ध खैरताबाद गणेश जी की प्रतिमा का शुक्रवार को हुसैन सागर झील में भव्य विसर्जन किया गया। हजारों श्रद्धालु 'बड़ा गणेश' को विदाई देने के लिए उमड़ पड़े।
पितृपक्ष 2026: घर से दूर हैं तो कैसे करें श्राद्ध? इन उपायों से मिलेगी...
नई दिल्ली, 25 सितंबर (आईएएनएस)। सनातन धर्म में पितृपक्ष का विशेष महत्व है। यह समय पूर्ण रूप से पूर्वजों के लिए समर्पित होता है, जो इस वर्ष शनिवार को पूर्णिमा श्राद्ध के साथ शुरू होगा और 10 अक्टूबर तक चलेगा। पितृपक्ष के 16 दिनों की अवधि के दौरान लोगों द्वारा अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति और उनके प्रति श्रद्धा प्रकट करने के लिए तर्पण और पिंडदान किए जाते हैं। इसे 'सोलह श्राद्ध', 'श्राद्ध पक्ष', 'महालय पक्ष' आदि नामों से भी जाना जाता है।
