पहले दिन लालबागचा राजा के चरणों में चढ़ाया गया 48 लाख 50 हजार का...
मुंबई, 15 सितंबर (आईएएनएस)। पूरे देश में गणेश उत्सव की धूम है। पहले दिन लालबागचा राजा के चरणों में 48 लाख 50 हजार रुपए का दान श्रद्धालुओं ने किया। इसमें स्टेज बॉक्स में 27,50,00 रुपए का दान, जबकि कलर बॉक्स में 21 लाख रुपए का दान किया गया है। पिछले वर्ष गणेश उत्सव के पहले दिन 46 लाख रुपए का दान चढ़ाया गया था।
बिहार: गयाजी पितृपक्ष मेले में चार साल में चार गुना बढ़े श्रद्धालु, इस बार...
पटना, 15 सितंबर (आईएएनएस)। बिहार के गयाजी में पितरों के मोक्ष की कामना लेकर उमड़ने वाले लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है। पिछले चार वर्षों में पितृपक्ष मेले में आने वाले पर्यटकों की संख्या करीब 4 गुना बढ़ी है। वर्ष 2022 में 9.40 लाख पर्यटकों की संख्या दर्ज की गई थी जो 2025 में बढ़कर 34.79 लाख तक पहुंच गई।
जेनजी का गणपति सेलिब्रेशन, हंगामा और हुड़दंग नहीं, सांस्कृतिक मूल्य और धार्मिक अनुष्ठान सबसे...
नई दिल्ली, 15 सितंबर (आईएएनएस)। सोशल मीडिया, इंटरनेट और वर्चुअल वर्ल्ड में 'जेनजी' शब्द अचानक नहीं आया। इसका एक लंबा अरसा रहा है। देश-दुनिया में पिछले कुछ महीनों में ऐसी घटनाएं हुईं, जिसने जेनजी को मेनस्ट्रीम मीडिया, चर्चा और बयानों में भी शामिल कर दिया।
हिंदी दिवस विशेष: लेखिका अंकिता जैन बोलीं- फोन या लैपटॉप के एक सिस्टम की...
नई दिल्ली, 15 सितंबर (आईएएनएस)। ब्रज, अवधी, मैथिली, राजस्थानी और भोजपुरी जैसी समृद्ध लोक बोलियों की विरासत को अपने साथ जोड़ने वाली हिंदी भाषा ने देश की बहुसंख्यक आबादी तक अपनी पहुंच बनाई। हिंदी दिवस पर आईएएनएस ने लेखिका अंकित जैन से बातचीत की।
हिंदी दिवस विशेष: नई हिंदी को जन्मे 13-14 वर्ष हो गए हैं, वह अपने...
नई दिल्ली, 15 सितंबर (आईएएनएस)। हर वर्ष 14 सितंबर को हिंदी दिवस मनाया जाता है। इस वर्ष भी सोमवार को धूमधाम से हिंदी दिवस मनाया गया। वैश्विक स्तर पर हिंदी, तीसरी सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा है। हिंदी, सांस्कृतिक और जमीन से जुड़ी ऐसी भाषा है, जिसने कई स्थानीय भाषाओं को खुद में समाहित किया हुआ है। इस खास मौके पर आईएएनएस ने लेखक शैलेश भारतवासी से विशेष बातचीत की।
हिंदी से हिंग्लिश तक : लेखिका ने बताया- क्या यह क्षरण है या किसी...
नई दिल्ली, 15 सितंबर (आईएएनएस)। हिंदी सिर्फ एक भाषा नहीं है, बल्कि करोड़ों लोगों की स्मृतियों, भावनाओं, अनुभवों और रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा है। समय के साथ समाज बदला, लोगों की जीवनशैली बदली, संचार के माध्यम बदले और उसके साथ हिंदी भी बदलती गई। कभी साहित्य और संस्कृतनिष्ठ शब्दावली से पहचानी जाने वाली हिंदी आज अंग्रेजी, उर्दू, फारसी, अरबी, स्थानीय बोलियों और इंटरनेट की भाषा के साथ कदमताल करती दिखाई देती है। ऐसे में यह सवाल उठना भी स्वाभाविक है कि क्या यह हिंदी का क्षरण है या फिर किसी जीवित भाषा का स्वाभाविक विकास?
दक्षिण कोरिया में शुरू होगा ‘सारंग-भरत महोत्सव’, ओडिया नृत्य और कार्यशालाओं से दिखेगी भारतीय...
सियोल, 14 सितंबर (आईएएनएस)। दक्षिण कोरिया में भारत का वार्षिक सांस्कृतिक महोत्सव इस सप्ताह शुरू होगा। भारतीय दूतावास ने सोमवार को बताया कि इसमें देश भर के शहरों में पारंपरिक नृत्य प्रदर्शन और कार्यशालाएं होंगी।
जब दूसरी भाषाओं से शब्द उधार लेती रही है हिंदी, तो आखिर क्या है...
नई दिल्ली, 14 सितंबर (आईएएनएस)। पहले 'शुद्ध' और 'सही' हिंदी की चाबी कुछ गिने-चुने संपादकों, आचार्यों और पाठ्यपुस्तक निर्माताओं के हाथ में थी। भाषा ऊपर से नीचे तय होती थी। आज नए शब्द और नई शब्दावली लोग सोशल मीडिया पर खुद गढ़ रहे हैं।
हिंदी से ‘हिंग्लिश’ तक, क्या हम एक ‘नई हिंदी’ के जन्म के दौर में...
नई दिल्ली, 14 सितंबर (आईएएनएस)। भाषा ही एक ऐसी कड़ी है, जो हमें अपनी मिट्टी, अपने इतिहास और अपनी संस्कृति से जोड़ती है। हर भाषा एक इतिहास, लोक परंपरा और जीवन-दृष्टि को लेकर चलती है, जो नई पीढ़ी के संस्कार को भी आगे बढ़ाती है। यही भाषाई बहुलता भारत की 'विविधता में एकता' की भावना को सशक्त बनाती है।
किसी भी दौर में भाषा नई होती जाती है, अगर ऐसा नहीं होगा तो...
नई दिल्ली, 14 सितंबर (आईएएनएस)। हिंदी, सांस्कृतिक और जमीन से जुड़ी हुई ऐसी भाषा है, जिसने कई स्थानीय भाषाओं को खुद में समेटा है। हिंदी साहित्य ने ब्रज, अवधी, मैथिली, राजस्थानी और भोजपुरी जैसी समृद्ध लोक बोलियों की विरासत को अपने साथ जोड़ा, जिससे इसकी जड़ें गांवों और आम जन तक पहुंचीं। हिंदी दिवस के अवसर पर आईएएनएस ने लेखक और कवि नीलोत्पल मृणाल से खास बातचीत की।
