वरुथिनी एकादशी पर माथे पर बेलपत्र और डमरू से सजे बाबा महाकाल, दर्शन कर...
उज्जैन, 13 अप्रैल (आईएएनएस)। उज्जैन के प्रसिद्ध बाबा महाकालेश्वर मंदिर में वरुथिनी एकादशी के दिन बाबा का दिव्य शृंगार किया गया।
राजस्थान में भगवान देव नारायण की आस्था से जुड़ा अनोखा गांव, जहां नहीं लगते...
नई दिल्ली, 12 अप्रैल (आईएएनएस)। देश-दुनिया के कोने-कोने में कई खूबसूरत और आस्था को प्रगाढ़ करते देवालय हैं, जिनके शिखर मात्र से भक्तों का मन प्रसन्न हो जाता है। मात्र देवालय या शिखर ही नहीं बल्कि मंदिर के आस पास की जगह भी बेहद खूबसूरत और उससे जुड़ी कथा हैरत में डालती है। ऐसा ही नारायण को समर्पित राजस्थान में एक खूबसूरत गांव है, जो नारायण को समर्पित है।
ताशकंद में नीना मल्होत्रा, सांस्कृतिक और शैक्षिक संबंधों को सुदृढ़ बनाने पर जोर
ताशकंद, 12 अप्रैल (आईएएनएस)। उज्बेकिस्तान की अपनी यात्रा के दौरान, सचिव (दक्षिण) ने ताशकंद स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ ओरिएंटल स्टडीज (टीएसयूओएस) स्थित महात्मा गांधी सेंटर फॉर इंडोलॉजी का भी दौरा किया। उन्होंने इंडोलॉजिस्ट्स और छात्रों के साथ बातचीत की, और सांस्कृतिक-शैक्षिक संबंधों को और अधिक सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से हिंदी और अन्य भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देने के लिए सहयोग के विभिन्न अवसरों पर चर्चा की।
नागराज मंदिर: यहां भक्तों को प्रसाद में मिलती है जादुई रेत, दर्शन मात्र से...
नई दिल्ली, 11 अप्रैल (आईएएनएस)। भारत की हर दिशा में 33 कोटि देवी-देवताओं के निवास स्थान और चमत्कारों से भरे मंदिर देखने को मिल जाएंगे। उत्तर से लेकर दक्षिण में जहां भगवान भोलेनाथ के अलग-अलग मंदिर और ज्योतिर्लिंग स्थापित हैं, वहीं नागराज के मंदिर भी देखने को मिल जाते हैं। जहां भक्त काल सर्प दोष से मुक्ति पाने के लिए आते हैं, लेकिन हम कन्याकुमारी के ऐसे मंदिर के बारे में बताएंगे, जहां भक्तों को प्रसाद के रूप में रेत दिया जाता है।
भारत-इजरायल के बीच रिश्तों को नई दिशा देने की जरूरत, सामाजिक स्तर पर साझेदारी...
तेल अवीव/नई दिल्ली, 11 अप्रैल (आईएएनएस)। भारत और इजरायल को ज्यादा मजबूत, सामान्य और आगे की सोच वाली साझेदारी बनाने के लिए अपना सामाजिक आधार बढ़ाना होगा।
जोग फॉल्स: गर्मियों में एडवेंचर के शौकीनों के लिए खास जगह,1400 सीढ़ियां उतरकर मिलता...
नई दिल्ली, 11 अप्रैल (आईएएनएस)। भारत देश में प्रकृति से भरे स्थलों की कमी नहीं है, लेकिन कौन स्थल ज्यादा शांति और सुकून देने वाला है, इसको लेकर संशय हमेशा बना रहता है।
11वीं सदी में हुआ था इस सीढ़ीदार कुएं का निर्माण, उल्टे मंदिर जैसा दिखता...
पाटन, 11 अप्रैल (आईएएनएस)। भारत एक ऐसा देश है, जिसके कोने-कोने में खूबसूरती है, वह प्रकृति की हो या मानव रचित सभी बेमिसाल हैं। बात प्राचीन वास्तुकला की हो तो उसके लिए दुनिया भर में मशहूर है। गुजरात राज्य में भी एक ऐसी अनोखी धरोहर है, जो सीढ़ीदार कुएं सा दिखता है और इसका निर्माण 11वीं सदी में हुआ था। यह सीढ़ीदार कुआं उल्टे मंदिर जैसा दिखता है और जल वास्तुकला का बेमिसाल नमूना है। यह इतना खास है कि भारतीय 100 रुपए के नोट पर भी इसकी तस्वीर अंकित है।
केदारनाथ यात्रा के लिए हेलीकॉप्टर सेवाओं की बुकिंग आज से शुरू होगी
देहरादून, 11 अप्रैल (आईएएनएस)। श्री केदारनाथ धाम तीर्थयात्रा के लिए हेलीकॉप्टर सेवाओं की बुकिंग शनिवार शाम 6 बजे से शुरू होगी।
पाप, रोग और परेशानियों से मुक्ति दिलाएंगे उज्जैन के सप्तसागर, पुराणों में भी जिक्र
नई दिल्ली, 10 अप्रैल (आईएएनएस)। हमारे देश में मंदिर से लेकर सरोवर तक का पौराणिक महत्व है। बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन में जितना महत्व महादेव के मंदिरों का है, उतना ही सप्त सागर का है।
सीढ़ीदार भूलभुलैया में एक बावड़ी : 9वीं शताब्दी में बना राजस्थान का हैरत...
जयपुर, 10 अप्रैल (आईएएनएस)। देश के कोने-कोने में ऐसे कई खूबसूरत वास्तुशिल्प के साथ बने आध्यात्मिक स्थल हैं, जो न केवल आंखों को राहत देते हैं बल्कि उसकी कथा उसके पीछे का विज्ञान हैरत में भी डालता है। ऐसा ही एक स्थल राजस्थान की राजधानी जयपुर से करीब 90 किलोमीटर दूर स्थित है। 9वीं शताब्दी में बना यह कुआं 'प्रसन्नता की देवी' को है समर्पित है, इस स्थल को सीढ़ीदार भूलभुलैया में बनी एक बावड़ी भी कहा जाता है।

