दिल्ली शब्दोत्सव 2026 : भारतीय सेना किसी भी परिस्‍थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार: पूर्व सैन्‍य अधिकारी

0
14

नई दिल्‍ली, 2 जनवरी (आईएएनएस)। दिल्ली में आयोजित तीन दिवसीय दिल्ली शब्दोत्सव-2026 के पहले दिन ‘स्वावलंबन से शौर्य’ विषय पर आयोजित एक कार्यक्रम में भारतीय नौसेना के पूर्व वाइस एडमिरल शेखर सिन्हा ने कहा कि स्वावलंबन के क्षेत्र में भारतीय नौसेना सबसे आगे रही है। उन्‍होंने कहा कि भारतीय सेना किसी भी परिस्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है।

वाइस एडमिरल (रिटायर्ड) शेखर सिन्हा ने कार्यक्रम के बाद आईएएनएस से बातचीत के दौरान भारत की सुरक्षा चुनौतियों और रक्षा तैयारियों पर विस्तार से अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि चीन को लेकर भारत के लिए सबसे बड़ा खतरा जमीन पर हमारी सीमाओं से जुड़ा हुआ है, जहां भारतीय सेना उसे रोकने में पूरी तरह सक्षम है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि समय के साथ-साथ तकनीक को लगातार उन्नत करना बेहद जरूरी है, क्योंकि यदि भारत तकनीकी रूप से पीछे रह गया तो चीन बढ़त हासिल कर सकता है, जिससे देश को नुकसान उठाना पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि चीन की गतिविधियां केवल जमीन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि हिंद महासागर में उसकी बढ़ती मौजूदगी भारत के लिए एक नई चुनौती है, क्योंकि समुद्र में कोई स्पष्ट सीमा नहीं होती और इस कारण चीन की नजर भारत की गतिविधियों पर बनी रह सकती है।

सिन्हा ने चेतावनी देते हुए कहा कि चीन, पाकिस्तान के साथ मिलकर भारत के लिए और अधिक जटिल सुरक्षा हालात पैदा कर सकता है। इसी संभावना को ध्यान में रखते हुए भारत अपनी सैन्य तैयारियों को लगातार मजबूत कर रहा है। उन्होंने भरोसा जताया कि भारतीय नौसेना किसी भी परिस्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है, लेकिन इसके लिए दीर्घकालिक रणनीति और तकनीकी आत्मनिर्भरता बेहद जरूरी है।

उन्होंने बताया कि रक्षा निर्माण के क्षेत्र में निजी क्षेत्र की भागीदारी आवश्यक है, क्योंकि सरकार अकेले सभी आवश्यकताओं को पूरा नहीं कर सकती। उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि लार्सन एंड टुब्रो जैसी कंपनियां पहले ही भारत के रक्षा क्षेत्र में महत्वपूर्ण निवेश कर चुकी हैं। इसके साथ ही उन्होंने रिसर्च एंड डेवलपमेंट पर बढ़ते खर्च को सकारात्मक कदम बताया और कहा कि भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए अनुसंधान में निवेश बेहद अहम है।

कार्यक्रम के संदर्भ में बात करते हुए वाइस एडमिरल सिन्हा ने कहा कि आमतौर पर लोगों की नजर इस पर नहीं जाती कि देश की सेना पर्दे के पीछे क्या कर रही है। उन्होंने कहा कि जब सेना सीमा पर तैनात होती है, तब आम लोग केवल समाचार पत्रों और रिपोर्ट्स पर ही भरोसा करते हैं। ऐसे में इस तरह के कार्यक्रमों का महत्व और बढ़ जाता है, जहां उन लोगों को सुनने का अवसर मिलता है, जो न केवल युद्ध जैसी परिस्थितियों का सामना करते हैं, बल्कि रणनीति और योजनाएं भी तैयार करते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे मंचों पर अनुभवी सैन्य अधिकारियों की बात सुनना गर्व की बात होती है और इस तरह के कार्यक्रम लगातार होते रहने चाहिए, ताकि समाज और सेना के बीच बेहतर समझ और संवाद बना रहे।