देश में ‘बुलडोजर कल्चर’ विकसित होना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण: माजिद मेमन

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मुंबई, 7 जनवरी (आईएएनएस)। पुरानी दिल्ली की एक मस्जिद के पास चलाए गए तोड़फोड़ अभियान के दौरान पुलिस पर हुए पथराव को लेकर एनसीपी (एसपी) के वरिष्ठ नेता माजिद मेमन ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्‍होंने कहा क‍ि देश में ‘बुलडोजर कल्चर’ विकसित होना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।

उन्होंने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत करते हुए कहा कि देश में जिस तरह का ‘बुलडोजर कल्चर’ विकसित हो रहा है, वह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने याद दिलाया कि इस प्रवृत्ति पर उच्च न्यायपालिका भी आपत्ति जता चुकी है।

माजिद मेमन ने कहा कि जब धार्मिक स्थलों का सवाल हो तो प्रशासन को विशेष संयम बरतना चाहिए और कानून के तहत तय प्रक्रिया का पालन करना चाहिए। किसी भी कार्रवाई से पहले नोटिस देना, बातचीत करना और कानूनी विकल्प अपनाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि इस तरह की जल्दबाजी भरी कार्रवाइयों से यह संदेश जाता है कि एक खास समुदाय को निशाना बनाया जा रहा है, जो लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है।

माजिद मेमन ने साफ शब्दों में कहा कि लोकतंत्र में ‘बुलडोजर न्याय’ की कोई जगह नहीं है। उन्होंने इसे एक तरह का आतंक बताया और कहा कि अदालतें भी इस प्रवृत्ति पर नाराजगी जता चुकी हैं। खास तौर पर मंदिर, मस्जिद और गुरुद्वारा जैसे धार्मिक स्थलों के मामलों में किसी भी तरह की हड़बड़ी अनुचित है।

उन्होंने कहा कि दुर्भाग्य से मदरसों और मस्जिदों के खिलाफ की जा रही ऐसी कार्रवाइयों से समाज में गलत धारणा बनती है और लोगों को यह महसूस होने लगता है कि सरकार किसी विशेष समुदाय के खिलाफ है। मेमन ने आरोप लगाया कि हिंदुत्व को बढ़ावा देने के नाम पर कई बार कानून के दायरे से बाहर जाकर कदम उठाए जाते हैं। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश, असम और दिल्ली जैसे राज्यों में जहां भाजपा की सरकारें हैं, इस तरह की कार्रवाइयां ज्यादा देखने को मिल रही हैं, जो बेहद चिंताजनक है और ऐसी कार्रवाइयों से बचा जाना चाहिए।

उन्होंने उत्तर प्रदेश की एसआईआर ड्राफ्ट वोटर लिस्ट 2026 पर गंभीर सवाल उठाए। माजिद मेमन ने कहा कि अगर भाजपा उत्तर प्रदेश में कमजोर पड़ रही है या हार के डर से घिरी हुई है, तो प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के मन में यह आशंका हो सकती है कि आने वाले चुनावों में उन्हें वोट न देने वाले लोगों को किसी न किसी तरह चुनावी प्रक्रिया से बाहर कर दिया जाए। उन्होंने कहा कि इसी आशंका के चलते वोटर लिस्ट में बड़े पैमाने पर नाम काटे जाने की आशंका की गहन जांच होनी चाहिए।

मेमन ने सवाल उठाया कि क्या हटाए गए नाम गैर-भाजपाई मतदाताओं के थे। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग का संवैधानिक कर्तव्य है कि वह इस पूरे मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी और विस्तृत जांच करे, ताकि लोकतंत्र में लोगों का विश्वास बना रहे।

जेएनयू परिसर में विवादित नारेबाजी को लेकर माजिद मेमन ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का पक्ष लेते हुए कहा कि अगर जेएनयू में लगाए गए नारे सरकार के खिलाफ हैं तो वे लोकतांत्रिक व्यवस्था में जायज हैं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में यह समझना बेहद जरूरी है कि देश और सरकार दो अलग-अलग चीजें हैं, लेकिन आज जानबूझकर इस अंतर को धुंधला किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि राष्ट्र के प्रति सम्मान अनिवार्य है, लेकिन सरकारें बदलती रहती हैं और कुछ सरकारें नाकाबिल भी हो सकती हैं। ऐसी सरकारों को चुनौती देना लोकतंत्र का हिस्सा है और जरूरत पड़ने पर आंदोलन और विरोध के जरिए उन्हें हटाया भी जाता है। मेमन ने स्पष्ट किया कि सरकार के खिलाफ नारे लगाने का मतलब देशद्रोह नहीं होता। कोई व्यक्ति तभी देशद्रोही कहलाता है जब वह देश के खिलाफ बोलता या काम करता है, न कि किसी खास सरकार के खिलाफ।

शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत द्वारा भाजपा पर लगाए गए दोहरे मापदंड के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए माजिद मेमन ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी अपने सिद्धांतों और वैचारिक प्रतिबद्धता का दावा करती है। उन्होंने कहा कि भाजपा की वैचारिक आत्मा आरएसएस से जुड़ी है, जिसकी जड़ें नागपुर में हैं और जो हिंदुत्व की राजनीति का दावा करती है। इसके बावजूद सत्ता और सुविधा के लिए भाजपा ने उन दलों के साथ भी गठबंधन किया है, जिन्हें वह पहले गाली देती रही है और देशद्रोही तक कहती रही है।

मेमन ने कहा कि आखिरकार जनता ही इसका जवाब देगी और उस क्षेत्र के लोग तय करेंगे कि उनके वोट ऐसी पार्टी को मिलने चाहिए या नहीं। उनके मुताबिक, आने वाले चुनावी नतीजे ही इस राजनीति का अंतिम जवाब देंगे।