नई दिल्ली, 6 जनवरी (आईएएनएस)। उत्तराखंड में हरिद्वार के घाटों पर गैर-हिंदुओं की एंट्री पर रोक लगाने की चर्चा के बीच कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित की कड़ी प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने इसे गलत बताते हुए कहा कि सार्वजनिक जगहों पर किसी भी जाति विशेष के लोगों के आने-जाने पर रोक लगाना सही नहीं है।
आईएएनएस से खास बातचीत में संदीप दीक्षित ने कहा, “हरिद्वार के घाटों पर गैर-हिंदुओं के जाने पर रोक से पहले ये सवाल उठता है कि क्या सरकार के पास ऐसा करने का अधिकार भी है? मुझे पक्का नहीं पता। दूसरा, भारत में मंदिर, मस्जिद और गुरुद्वारे जैसी कई धार्मिक जगहें प्राइवेट होती हैं, जहां परंपरा के अनुसार कभी-कभी सिर्फ एक धर्म या एक खास जाति के लोगों को ही अंदर जाने दिया जाता था, लेकिन समय के साथ इसमें से भी कई प्रथाएं बदल चुकी हैं।”
संदीप दीक्षित ने कहा कि हम पब्लिक प्रॉपर्टी की बात कर रहे हैं, मतलब ऐसी जगहें जो सबकी होती हैं, प्राइवेट नहीं। ऐसे में किसी को वहां जाने से रोकना मेरी समझ से परे है।
दीक्षित ने कहा कि कई जगहों पर लोगों की धार्मिक, सांस्कृतिक या राजनीतिक भावनाओं का ध्यान रखना ठीक है। जैसे कुछ इलाकों को वेजिटेरियन रखा गया है, कुछ जगहों में शराब पीने की मनाही है या सिगरेट पर रोक है। यह अलग-अलग लोगों की संवेदनशीलता के हिसाब से समझा जा सकता है, लेकिन अगर सार्वजनिक जगहों पर लोगों को आने-जाने से रोक दिया जाए, तो ये गलत कदम है।
वहीं, जेएनयू कैंपस में सोमवार रात हुई नारेबाजी पर भी संदीप दीक्षित ने अपनी राय दी। उन्होंने कहा कि किसी को किसी चीज का विरोध करने का हक है, यह आपका लोकतांत्रिक अधिकार है। कोर्ट के फैसले आते हैं और लोग उनका समर्थन कर सकते हैं या नहीं भी कर सकते हैं। यह व्यक्तिगत पसंद की बात है। लेकिन नारेबाजी या विरोध के दौरान हिंसक या धमकी भरी भाषा का इस्तेमाल बिलकुल मंज़ूर नहीं है। उन्होंने कहा कि किसी को भी, चाहे राजनीति में हो या कहीं और, चरमपंथी या हिंसक भाषा का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।

