इंदौर : 24 जनवरी/ देश में स्वास्थ्य जांच और डायग्नोस्टिक्स की गुणवत्ता को नई दिशा देने वाली राष्ट्रीय स्तर की कॉन्फ्रेंस ‘काहो डायग्नोस्टिकॉन 2026’ का आयोजन 24 और 25 जनवरी, 2026 को इंदौर स्थित लोकमाता देवी अहिल्या सभागृह (डीएवीवी) में किया जा रहा है। यह मध्य प्रदेश में पहली बार आयोजित हो रही अपनी तरह की प्रमुख डायग्नोस्टिक कॉन्फ्रेंस है, जिसमें देशभर से 1600 से अधिक हेल्थकेयर और डायग्नोस्टिक प्रोफेशनल्स ने रजिस्ट्रेशन कराया है।
यह कॉन्फ्रेंस मान्यता प्राप्त स्वास्थ्य सेवा संगठनों का संघ (CAHO) द्वारा आयोजित की जा रही है और इसका मुख्य उद्देश्य डायग्नोस्टिक्स में गुणवत्ता, पेशेंट सेफ्टी और नई तकनीकों को बढ़ावा देना है। विशेषज्ञों के अनुसार, आज करीब 70 प्रतिशत मेडिकल निर्णय जांच रिपोर्ट्स पर आधारित होते हैं, ऐसे में सटीक और समय पर जांच की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है।
मध्य प्रदेश में पहली बार, पेशेंट सेफ्टी पर विशेष फोकस
CAHO द्वारा इंदौर में पहली बार इस तरह की डायग्नोस्टिक कॉन्फ्रेंस आयोजित की जा रही है, जिसमें डायग्नोस्टिक पेशेंट सेफ्टी को केंद्र में रखा गया है। संगठन अस्पतालों और डायग्नोस्टिक सेंटर्स को पेशेंट सेफ्टी से जुड़ी ट्रेनिंग पूरी तरह निःशुल्क उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य कर रहा है, ताकि मरीजों को सुरक्षित और भरोसेमंद जांच सेवाएं मिल सकें।
यह कॉन्फ्रेंस डायग्नोस्टिक के सभी विंग्स – लैब मेडिसिन, रेडियोलॉजी, मॉलीक्यूलर डायग्नोस्टिक्स सहित – के लिए उपयोगी है, जिससे जुड़े प्रोफेशनल्स इसमें भाग लेकर नई जानकारी और बेहतर कार्यप्रणालियों से परिचित हो सकेंगे।
विशेषज्ञों ने साझा किए विचार
कॉन्फ्रेंस को लेकर आयोजित मीडिया संवाद में डॉ. विनीता कोठारी (सेक्रेटरी, डायग्नोस्टिक डिवीजन, CAHO), डॉ. डी. पी. लोकवानी (फाउंडर वाइस चांसलर, एमपी मेडिकल साइंस यूनिवर्सिटी एवं डायरेक्टर, सुख सागर मेडिकल कॉलेज, जबलपुर) तथा डॉ. अपर्णा जयराम (चेयरमैन, डायग्नोस्टिक डिवीजन, CAHO) उपस्थित रहीं।
उन्होंने कहा कि बढ़ते रोग मामलों, नई बीमारियों के सामने आने और समय पर इलाज की आवश्यकता को देखते हुए मजबूत और मानकीकृत डायग्नोस्टिक सिस्टम आज की स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ बन चुका है।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य योजनाओं से जुड़ा थीम
काहो डायग्नोस्टिकॉन 2026 का थीम ‘नैदानिक उत्कृष्टता के माध्यम से स्वास्थ्य सेवा को सशक्त बनाना’ है, जो भारत सरकार की प्रमुख स्वास्थ्य पहलों – आयुष्मान भारत, यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज, डिजिटल हेल्थ मिशन और आत्मनिर्भर भारत- की सोच से जुड़ा हुआ है। यह कॉन्फ्रेंस इस बात पर जोर देती है कि सही और समय पर जांच किस तरह बेहतर मेडिकल निर्णय, रोगों की रोकथाम और समान स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता में सहायक होती है।
ज्ञान, नवाचार और सहयोग का राष्ट्रीय मंच
दो दिवसीय इस आयोजन में 1600 से अधिक हेल्थकेयर और डायग्नोस्टिक प्रोफेशनल्स, 100 से ज्यादा एक्सपर्ट फैकल्टी व स्पीकर्स तथा 70 से अधिक इंडस्ट्री एग्ज़िबिटर्स और पार्टनर्स भाग लेंगे। लैब मेडिसिन एक्सपर्ट्स, रेडियोलॉजिस्ट, पॉलिसी मेकर्स, रेगुलेटर्स, शिक्षाविद और इंडस्ट्री लीडर्स एक मंच पर आकर डायग्नोस्टिक्स से जुड़ी चुनौतियों और उनके समाधान पर चर्चा करेंगे।
तकनीक और नवाचार को मिलेगा बढ़ावा
कॉन्फ्रेंस के दौरान मेगा डायग्नोस्टिक एक्सपो, प्री-कॉन्फ्रेंस वर्कशॉप्स और लाइव टेक्नोलॉजी डेमो आयोजित किए जाएंगे, जिनके माध्यम से नई और उन्नत जांच तकनीकों, रिसर्च और इंडस्ट्री-अकादमिक सहयोग को प्रोत्साहन मिलेगा।
प्रमुख अतिथियों की उपस्थिति
इस राष्ट्रीय आयोजन में मध्य प्रदेश के माननीय स्वास्थ्य मंत्री एवं उपमुख्यमंत्री श्री राजेंद्र शुक्ला, इंदौर लोकसभा सांसद श्री शंकर लालवानी, एनएबीएल के डॉ. संदीप शाह, देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. राकेश सिंघाई और अमलतास मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के अध्यक्ष श्री मयंकराज भदोरिया मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे।
स्वास्थ्य निदान के भविष्य की ओर महत्वपूर्ण कदम
वर्ष 2021 से हैदराबाद, कोलकाता और दिल्ली जैसे शहरों में सफल आयोजनों के बाद, इंदौर में आयोजित हो रहा काहो डायग्नोस्टिकॉन 2026 अपने स्तर, प्रभाव और राष्ट्रीय महत्व के कारण एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है। यह आयोजन भारत में स्वास्थ्य निदान के भविष्य को मजबूत करने और एक सुरक्षित, समावेशी व गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य प्रणाली की दिशा में एक अहम पहल के रूप में देखा जा रहा है।


