नई दिल्ली, 19 जनवरी (आईएएनएस)। जर्मन और फ्रांसीसी वित्त मंत्रियों ने एक सुर में अमेरिकी टैरिफ धमकी के आगे न झुकने का दावा किया है। दोनों ने सोमवार को कहा कि यूरोपीय देशों को ब्लैकमेल नहीं किया जाएगा और ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिकी टैरिफ बढ़ाने की धमकियों का पूरी ताकत से स्पष्ट और एकजुट होकर जवाब दिया जाएगा।
जर्मन वित्त मंत्री ने फ्रांसीसी समकक्ष के साथ सोमवार को अपने कार्यालय में मुलाकात की। इस दौरान दोनों ने कहा कि यूरोपीय शक्तियां किसी भी ब्लैकमेल का शिकार नहीं होंगी और ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ज्यादा टैरिफ की धमकियों का स्पष्ट और एकजुट होकर जवाब दिया जाएगा।
ट्रंप ने शनिवार को वादा किया था कि जब तक अमेरिका को ग्रीनलैंड खरीदने की इजाजत नहीं मिल जाती, तब तक वह आठ यूरोपीय सहयोगियों पर टैरिफ बढ़ाएगा। ट्रंप के इस ऐलान के बाद डेनमार्क के विशाल आर्कटिक द्वीप के भविष्य को लेकर विवाद और बढ़ गया है।
जर्मन वित्त मंत्री लार्स क्लिंगबील ने कहा, “जर्मनी और फ्रांस इस बात पर अडिग हैं कि हम खुद को ब्लैकमेल नहीं होने देंगे।”
इसी कार्यक्रम में फ्रांसीसी वित्त मंत्री रोलैंड लेस्क्योर ने कहा, “250 साल के सहयोगियों के बीच ब्लैकमेल, दोस्तों के बीच ब्लैकमेल, जाहिर तौर पर अस्वीकार्य है।”
चर्चा है कि ईयू नेता गुरुवार को ब्रसेल्स में एक इमरजेंसी समिट में विकल्पों पर चर्चा करने वाले हैं। रॉयटर्स के अनुसार एक विकल्प 93 बिलियन यूरो (107.7 बिलियन डॉलर) के अमेरिकी आयात पर टैरिफ का एक पैकेज है जो छह महीने के सस्पेंशन के बाद 6 फरवरी को अपने आप लागू हो सकता है।
क्लिनबील ने कहा, “हम यूरोपीय लोगों को यह कहना होगा कि हद पार हो गई है। हमारा सहयोग के लिए हाथ बढ़ा हुआ है, लेकिन हम ब्लैकमेल होने के लिए तैयार नहीं हैं।”
लेस्क्योर ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि अटलांटिक पार के संबंध “धमकियों और ब्लैकमेल पर आधारित संबंध के बजाय मैत्रीपूर्ण और बातचीत पर आधारित” हो जाएंगे।
क्लिनबील ने कहा कि उन्हें तनाव बढ़ाने में कोई दिलचस्पी नहीं है, क्योंकि इससे अटलांटिक के दोनों किनारों की अर्थव्यवस्थाओं को नुकसान होगा।
बता दें कि, क्लिनबील और लेस्क्योर के अमेरिकी समकक्ष स्कॉट बेसेंट ने रविवार को कहा था कि वैश्विक स्थिरता के लिए और यूरोपीय “कमजोरी” के कारण ग्रीनलैंड पर अमेरिकी नियंत्रण आवश्यक है।
इस पर लेस्क्योर ने कहा, “आने वाले दिनों, हफ्तों, तिमाहियों और वर्षों में हमारा मकसद स्कॉट बेसेंट को विनम्रता से लेकिन मजबूती से यह समझाना है कि वह गलत हैं।”

