हाथ में संविधान, जेब में गाली की डिक्शनरी लेकर घूमते हैं: मुख्तार अब्बास नकवी

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नई दिल्ली, 29 अगस्त (आईएएनएस)। भाजपा नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने ‘वोटर अधिकार यात्रा’ के मंच से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दी गई अभद्र टिप्पणी को बेहद आपत्तिजनक बताया है। उन्होंने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि वे एक तरफ हाथ में संविधान, दूसरी तरफ जेब में गाली की डिक्शनरी लेकर घूमते हैं।

आईएएनएस से बातचीत में उन्होंने कहा कि कांग्रेस और उसके सहयोगियों की यह गाली-गलौज की रणनीति न केवल अनुचित है, बल्कि इससे वे खुद अपना नुकसान करेंगे।

नकवी ने इसे ‘गालीबाजों की कुंडली’ करार देते हुए कहा कि ऐसी हरकतों से कोई सकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा, बल्कि यह उनकी अपनी हार का कारण बनेगा। उन्होंने आगे कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश विकास और स्थिरता की दिशा में आगे बढ़ रहा है, और विपक्ष की इस तरह की नकारात्मक राजनीति से विपक्ष केवल अपनी स्थिति को कमजोर करेगा।

उन्होंने कांग्रेस और उनके सहयोगियों पर आरोप लगाया कि वे जानबूझकर प्रधानमंत्री के खिलाफ गंदी, सड़कछाप और घटिया भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं।

भाजपा नेता के अनुसार, ऐसी भाषा से न केवल विपक्ष की छवि खराब होती है, बल्कि यह जनता के बीच उनकी स्वीकार्यता को भी कम करता है।

राहुल गांधी पर तंज कसते हुए कहा कि वे एक हाथ में संविधान लेकर घूमते हैं, लेकिन जेब में गाली की डिक्शनरी रखते हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि विपक्ष की यह रणनीति पैर पर कुल्हाड़ी मारने जैसी है। उनकी नजर में, यह अभद्र व्यवहार विपक्ष को चुनावों में नुकसान पहुंचाएगा, और वे “हिट विकेट” या “रन आउट” होकर राजनीतिक रूप से हाशिए पर चले जाएंगे।

नकवी ने कहा कि विपक्ष को लगता है कि इस तरह की भाषा से वे कोई धमाल करेंगे, लेकिन वास्तव में यह उनकी हार का कारण बनेगा।

संभल रिपोर्ट पर उन्होंने कहा कि हमारे देश ने विभाजन की भयावहता देखी है, और हमने इसे सहा भी है और इससे बहुत कुछ सीखा भी है। कोई भी समाज, समुदाय या क्षेत्र जो विस्थापन की त्रासदी या सामूहिक पलायन की तबाही का अनुभव करता है, उसके दोषियों की पहचान की जानी चाहिए और उन्हें जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति समाज के लिए एक गंभीर चुनौती और अपमान है।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत के तीन दिवसीय व्याख्यानमाला की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह उद्बोधन तर्कों और तथ्यों पर आधारित था, जिसे इतिहास में एक महत्वपूर्ण संबोधन के रूप में याद किया जाएगा। नकवी ने इस व्याख्यानमाला को आर्थिक, राष्ट्रवादी, और सियासी क्षेत्रों में मजबूती प्रदान करने वाला बताया। उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग संघ के खिलाफ दुष्प्रचार करते रहे हैं, उनके लिए यह एक सबक है कि उन्हें संघ को समझना चाहिए और उसका सम्मान करना चाहिए।