काबुल, 29 अगस्त (आईएएनएस)। अफगानिस्तान के विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तानी सेना द्वारा नंगरहार और खोस्त प्रांतों में किए गए कथित हवाई हमलों को लेकर काबुल स्थित पाकिस्तान के राजदूत को तलब कर औपचारिक विरोध दर्ज कराया है। स्थानीय मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, तालिबान अधिकारियों ने इन हमलों की कड़ी निंदा की है, जिनमें तीन लोगों की मौत हो गई और सात अन्य घायल हो गए।
गुरुवार को भेजे गए विरोध पत्र में अफगान विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान की कार्रवाई को अफगान हवाई क्षेत्र का उल्लंघन और ड्यूरंड रेखा के पास नागरिक इलाकों में बमबारी को “अफगानिस्तान की क्षेत्रीय अखंडता का खुला उल्लंघन और उकसाने वाला कदम” करार दिया। मंत्रालय ने कहा कि अफगान संप्रभुता की रक्षा उसके लिए “लाल रेखा” है और चेतावनी दी कि “ऐसी गैर-जिम्मेदाराना कार्रवाइयों के परिणाम भुगतने होंगे।”
काबुल स्थित खामा प्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, नंगरहार और खोस्त प्रांतों में रातभर चले ड्रोन हमलों में कम से कम 13 लोग हताहत हुए, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं। नंगरहार के शिनवार जिले में एक आवासीय घर पर हमले में चार बच्चों और एक महिला सहित पांच लोग घायल हुए। उसी रात खोस्त प्रांत के स्पेरा जिले के सुरखख लाहौरी क्षेत्र में एक अन्य ड्रोन हमले में दो लोगों की मौत हो गई और छह अन्य घायल हुए। स्थानीय निवासियों ने आरोप लगाया कि पाकिस्तानी ड्रोन ने जानबूझकर नागरिक घरों को निशाना बनाया, जिससे लोगों में दहशत फैल गई।
पाकिस्तान पहले भी खोस्त और पक्तिका में इस तरह के ड्रोन हमले कर चुका है, जिनमें कई नागरिकों की जान गई थी। जनवरी में पक्तिका के बर्मल जिले पर पाकिस्तानी विमानों के हमले में कम से कम 46 लोगों की मौत हो गई थी, जिनमें ज्यादातर महिलाएं और बच्चे थे।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सीमा पार आतंकवाद को लेकर तनाव पहले से ही बढ़ा हुआ है। पाकिस्तान, तालिबान पर प्रतिबंधित तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) को शरण देने का आरोप लगाता रहा है, जिसने तालिबान के सत्ता में आने के बाद से पाकिस्तान में कई हमले किए हैं।
इस साल की शुरुआत में पाकिस्तान ने आतंकवादी हमलों में वृद्धि के बाद कई अहम सीमा चौकियां बंद कर दी थीं। इसके जवाब में अफगानिस्तान ने व्यापार और आवाजाही पर पाबंदियां लगा दीं। ताजा घटना दोनों देशों के बीच रिश्तों की नाजुक स्थिति को उजागर करती है। हाल के महीनों में दोनों देशों के बीच कई उच्चस्तरीय बैठकें हुई हैं, लेकिन सुरक्षा मुद्दों पर कोई ठोस प्रगति नहीं हो सकी है।