शिवकुमार का भाजपा को संदेश, ‘किसानों के मुद्दे को लेकर केंद्र पर निशाना साधें, राज्य पर नहीं’

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बेलगावी, 9 दिसंबर (आईएएनएस)। कर्नाटक में किसानों के मुद्दे को लेकर भाजपा द्वारा बड़े स्तर पर प्रदर्शन की योजना पर उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने निशाना साधा। उन्होंने मंगलवार को कहा कि विरोध प्रदर्शन राज्य सरकार के खिलाफ नहीं, बल्कि केंद्र सरकार के खिलाफ होना चाहिए।

डीके शिवकुमार ने आरोप लगाया कि केंद्र की नीतियों के कारण मक्का, गन्ना और एथेनॉल के संबंध में किसान गंभीर संकट में हैं, जबकि कर्नाटक को मिलने वाले कई बकाया अनुदान भी जारी नहीं किए गए हैं।

शिवकुमार ने कहा कि महादयी परियोजना किसानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण थी, लेकिन केंद्र ने अभी तक उसके मुद्दों को हल नहीं किया है।

उन्होंने कहा, “मेकेदाटू परियोजना में हमें न्याय लंबी लड़ाई के बाद मिला। भाजपा नेता दावा करते थे कि वे एक दिन में सभी मंजूरी दिला देंगे, लेकिन अब तक कुछ नहीं हुआ। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट में 5,400 करोड़ रुपये देने की घोषणा की थी, लेकिन एक पैसा भी जारी नहीं किया गया।”

उन्होंने भाजपा नेताओं पर “जिम्मेदारी से भागने” और संवेदनशील मुद्दों पर “चुप्पी साधने” का आरोप लगाया। डिप्टी सीएम ने कहा, “भाजपा नेताओं को ज़रा भी शर्म नहीं है। एक भी भाजपा सांसद इन मुद्दों पर आवाज़ नहीं उठा रहा।”

बेलगावी एयरपोर्ट पर पत्रकारों से बात करते हुए शिवकुमार ने कहा कि विधानसभा के जारी शीतकालीन सत्र में किसानों के मुद्दे, न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) और केंद्र द्वारा बकाया राशि जारी करने के लिए दबाव बनाने जैसे विषय प्रमुख रहेंगे।

उन्होंने सवाल उठाया, “केंद्र किसानों की समस्याओं में दखल क्यों नहीं दे रहा? एमएसपी की राशि क्यों नहीं दी जा रही? केंद्र फसलों की ख़रीद क्यों नहीं कर रहा? गन्ने का भाव बढ़ाए बिना चीनी की कीमतें 10 साल से क्यों रोक रखी हैं?”

शिवकुमार ने कहा कि उत्तर कर्नाटक के लिए भी तुरंत विकासात्मक निवेश की जरूरत है और राज्य सरकार केंद्र से फंड जारी करने का फिर से आग्रह करेगी।

भाजपा द्वारा किसानों के साथ मिलकर राज्य सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन पर उन्होंने कहा, “भाजपा सरकार ने अपने कार्यकाल में किसानों के हित में ऐसा कोई साहसिक फैसला कभी नहीं लिया। हमने मक्का खरीदने का निर्णय किया है और गन्ना किसानों के साथ खड़े हैं। शुगर फैक्टरी मालिक नुकसान की बात कर रहे हैं, लेकिन फसल का दाम तो केंद्र ही तय करता है। फिर केंद्र सरकार मदद क्यों नहीं कर रही?”

उन्होंने कहा कि यदि फैक्ट्रियों को घाटा भी हो, तब भी किसानों को बचाना सरकार की पहली प्राथमिकता है। लड़ाई केंद्र सरकार के खिलाफ होनी चाहिए। भाजपा के पास अब कोई मुद्दा नहीं बचा, इसलिए वे ऐसे बयान दे रही हैं।