मुंबई, 16 जनवरी (आईएएनएस)। पूर्व गैंगस्टर और पूर्व विधायक अरुण गावली की दोनों बेटियां बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) चुनाव हार गईं। गीता गावली और योगिता ने अरुण गावली द्वारा स्थापित अखिल भारतीय सेना (एबीएचएस) के टिकट पर मुंबई के बायकुला क्षेत्र से चुनाव लड़ा।
बीएमसी की तीन बार पार्षद रह चुकीं गीता वार्ड संख्या 212 से चुनाव हार गईं, जबकि उनकी बहन योगिता वार्ड संख्या 207 से हार गईं। गीता समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार अमरीन शहजाद अब्राहनी से हार गईं। पहली बार चुनाव लड़ रही योगिता भाजपा उम्मीदवार रोहिदास लोखंडे से पराजित हुईं।
सितंबर 2025 में, सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के बाद अरुण गावली नागपुर केंद्रीय जेल से रिहा हुए थे।
इस बीच, ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन ने महाराष्ट्र नगर निगम चुनावों में ऐतिहासिक प्रदर्शन किया है, जो राज्य में अल्पसंख्यक मतदान पैटर्न में एक बड़े बदलाव का संकेत देता है। पार्टी ने मतदान करने वाले 29 निगमों में से 13 में 125 सीटें जीतीं, जिससे कई क्षेत्रों में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस जैसी पारंपरिक पार्टियों को प्रभावी रूप से दरकिनार कर दिया। छत्रपति संभाजीनगर (औरंगाबाद) में, पार्टी ने सबसे अधिक सीटें जीतकर अपना दबदबा बरकरार रखा, जहां 33 पार्षद चुने गए।
मुंबई (बीएमसी) में एआईएमआईएम ने एक महत्वपूर्ण सफलता हासिल करते हुए आठ सीटें जीतीं, जिससे मुंबई के अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्रों में उसकी पैठ मजबूत हुई।
मालेगांव में, एआईएमआईएम ने मजबूत प्रदर्शन किया, लेकिन मालेगांव धर्मनिरपेक्ष मोर्चा के नेतृत्व वाली इस्लाम पार्टी 35 सीटों के साथ एक प्रमुख शक्ति के रूप में उभरी, जिससे वहां के महापौर के लिए रास्ता साफ हो गया। एआईएमआईएम ने नांदेड़ में 15 सीटें, अमरावती में 12, धुले में 10, नागपुर में छह और ठाणे में पांच सीटें हासिल कीं।
सोलापुर में एआईएमआईएम ने अभूतपूर्व सफलता हासिल करते हुए आठ सीटें जीतीं। वार्ड 14 और 20 में सभी उम्मीदवारों को पछाड़कर एआईएमआईएम सोलापुर नगर निगम में भाजपा के बाद दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। नागपुर में पार्टी ने छह सीटें जीतीं। गौरतलब है कि वार्ड 3-डी से अलीशा फहीम खान (फहीम खान की पत्नी) ने जीत हासिल की। वार्ड नंबर 6 में भी पार्टी ने तीनों सीटें जीतकर क्लीन स्वीप किया।

