कोच्चि में राहुल गांधी ने डॉ. एम लीलावती को दिया प्रियदर्शिनी साहित्य पुरस्कार

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कोच्चि, 19 जनवरी (आईएएनएस)। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सोमवार को वरिष्ठ मलयालम लेखिका और आलोचक डॉ. एम लीलावती को केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी (केपीसीसी) द्वारा स्थापित प्रियदर्शिनी साहित्य पुरस्कार प्रदान किया।

समारोह में राहुल गांधी ने कहा कि इस कार्यक्रम का हिस्सा बनना उनके लिए एक बहुत बड़ा सम्मान है। उन्होंने 98 वर्षीय डॉ. लीलावती को सिर्फ केरल ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए एक प्रेरणास्रोत और आइकन बताया। राहुल गांधी ने उनकी दिनचर्या और बौद्धिक अनुशासन की सराहना करते हुए कहा कि वह रोज सुबह 3 बजे उठती हैं, पढ़ती हैं और आज भी लिखना जारी रखती हैं।

उन्होंने कहा, “वह इस समय दुनिया में जाति पर पढ़ और लिख रही हैं। बहुत से लोग देश में इन विषयों पर सोचते हैं, लेकिन बोलने का साहस नहीं करते। डॉ. लीलावती उन लोगों में हैं, जो सच बोलने का साहस रखती हैं।”

राहुल गांधी ने इस बात पर जोर दिया कि महान देश और महान लोग चुप्पी से नहीं बनते, बल्कि विचारों को खुलकर व्यक्त करने से बनते हैं।

उन्होंने कहा कि कुछ लोग तब तक चुप रहते हैं जब तक उनकी व्यक्तिगत जिंदगी आरामदायक रहती है, जबकि समाज के प्रति जिम्मेदारी रखने वाले लोग अपने विचारों पर मजबूती से खड़े रहते हैं।

राहुल गांधी ने डॉ. लीलावती को सरल, विनम्र और अपनी जड़ों से जुड़ा हुआ व्यक्ति बताते हुए कहा कि उनमें उन्हें ‘केरल की असली आत्मा’ दिखाई देती है।

उन्होंने कहा, “हम सब इंतजार कर रहे हैं कि आप अपना शताब्दी वर्ष पूरा करें।”

पुरस्कार लेने करने के बाद डॉ. लीलावती ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का आभार जताया और कहा कि उन्हें यह सम्मान मिलना उनके लिए बेहद भावुक क्षण है, क्योंकि यह पुरस्कार पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के नाम पर दिया जाता है।

उन्होंने याद किया कि वर्ष 1981 में इंदिरा गांधी ने स्वयं उन्हें केरल साहित्य अकादमी पुरस्कार प्रदान किया था।

उन्होंने कहा, “करीब आधी सदी बाद आज उनके पोते से पुरस्कार मिल रहा है। यह एक अजीब और बेहद भावुक करने वाला संयोग है।”

डॉ. लीलावती ने गांधी परिवार की विरासत पर बोलते हुए कहा कि इस परिवार के दो सदस्य देश की सेवा में शहीद हुए हैं। उन्होंने इंदिरा गांधी की धर्मनिरपेक्षता के प्रति गहरी प्रतिबद्धता को याद करते हुए बताया कि कैसे उन्होंने बचपन में स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान एक कीमती विदेशी गुड़िया त्याग दी थी और बाद में अपने जीवन में भी धर्मनिरपेक्षता को सबसे ऊपर रखा।

उन्होंने कहा कि यही मूल्य उन्हें राजीव गांधी में भी दिखाई दिए, खासकर महिलाओं को नेतृत्व में आगे बढ़ाने के उनके प्रयासों में। डॉ. लीलावती ने कहा कि उन्हें यही गुण राहुल गांधी और प्रियंका गांधी में भी नज़र आते हैं। उन्होंने कहा, “मैं चाहती हूं कि दोनों सत्ता के शिखर तक पहुंचें। शायद मैं यह देख न पाऊं, लेकिन इसकी कल्पना जरूर कर सकती हूं।”

डॉ. एम लीलावती एक प्रतिष्ठित लेखिका, साहित्य आलोचक और शिक्षाविद हैं।

उन्होंने केरल के कई कॉलेजों में अध्यापन किया और गवर्नमेंट ब्रेनन कॉलेज, थलासेरी की प्राचार्य के रूप में सेवानिवृत्त हुईं। उनके लंबे और प्रभावशाली साहित्यिक जीवन को साहित्य अकादमी पुरस्कार और केरल साहित्य अकादमी पुरस्कार सहित कई बड़े सम्मानों से नवाजा गया है।