अगरतला, 7 जनवरी (आईएएनएस)। त्रिपुरा विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और माकपा की राज्य इकाई के सचिव जितेंद्र चौधरी ने बुधवार को मुख्यमंत्री माणिक साहा पर तीखा हमला करते हुए आरोप लगाया कि वह भाजपा–टिपरा मोथा पार्टी (टीएमपी) के सत्तारूढ़ गठबंधन के भीतर बढ़ती अंदरूनी खींचतान से ध्यान भटकाने के लिए वामपंथी दल के खिलाफ बार-बार “झूठ और निराधार प्रचार” कर रहे हैं।
माकपा पोलित ब्यूरो के सदस्य चौधरी ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री साहा संवैधानिक पद का दुरुपयोग कर रहे हैं और राज्य सरकार के कार्यकारी प्रमुख की बजाय भाजपा के प्रवक्ता की तरह व्यवहार कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि राज्य में हिंसा, समन्वय की कमी और भाजपा व उसकी सहयोगी टीएमपी के बीच अंदरूनी कलह समेत हर नकारात्मक घटनाक्रम के लिए मुख्यमंत्री माकपा को दोषी ठहरा रहे हैं।
चौधरी ने मुख्यमंत्री के इस आरोप को सिरे से खारिज कर दिया कि वामपंथी दल “पिछले दरवाजे से सत्ता हथियाने” की कोशिश कर रहा है। उन्होंने इसे “शासन के पतन” को छिपाने की हताश कोशिश बताया।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा, “मुख्यमंत्री असंसदीय भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं और गढ़ी हुई कहानियां फैला रहे हैं, जिससे जनता को गुमराह किया जा रहा है और पद की गरिमा को ठेस पहुंच रही है।” उन्होंने आरोप लगाया कि साहा को उनके करीबी लोग गलत सूचनाएं दे रहे हैं।
माकपा नेता ने यह भी दावा किया कि 2024 में औपचारिक रूप से सत्तारूढ़ गठबंधन में शामिल होने से पहले ही टीएमपी की भाजपा के साथ एक मौन समझ थी। उन्होंने कहा कि 2023 के विधानसभा चुनावों में टीएमपी की चुनावी रणनीति ने वामपंथी वोटों और समर्थन आधार को विभाजित किया, जिससे भाजपा की सत्ता में वापसी का रास्ता साफ हुआ।
चौधरी के अनुसार, मार्च 2024 में टीएमपी के भाजपा-नेतृत्व वाली सरकार में शामिल होने के बाद से ही अंदरूनी टकराव सामने आने लगे हैं, जिसके चलते सत्तारूढ़ सहयोगियों के बीच हिंसा और सार्वजनिक टकराव की घटनाएं हुई हैं।
विवरण देते हुए चौधरी ने मुख्यमंत्री के इस दावे का कड़ा खंडन किया कि त्रिपुरा में उग्रवाद की शुरुआत माकपा ने की थी। उन्होंने इस आरोप को “ऐतिहासिक रूप से गलत और नैतिक रूप से आपत्तिजनक” बताया और कहा कि वामपंथी नेता स्वयं उग्रवादी हिंसा के प्रमुख शिकार रहे हैं।
उन्होंने कहा, “त्रिपुरा में पहले एक प्रमुख मंत्री समेत माकपा के कई नेता, कार्यकर्ता और समर्थक उग्रवादियों द्वारा मारे गए थे।”
मुख्यमंत्री पर भाजपा–टीएमपी सत्ता संघर्ष में माकपा को घसीटने का आरोप लगाते हुए चौधरी ने सत्तारूढ़ गठबंधन में व्यापक भ्रष्टाचार का दावा किया और चेतावनी दी कि यदि मुख्यमंत्री कार्यालय का दुरुपयोग राजनीतिक हमलों के लिए जारी रहा, तो लोकतांत्रिक संस्थाओं में जनता का विश्वास कमजोर होगा।
उन्होंने मुख्यमंत्री से गलत सूचना फैलाना बंद करने की अपील की और याद दिलाया कि मुख्यमंत्री के रूप में वह पूरे राज्य का प्रतिनिधित्व करते हैं, न कि किसी एक राजनीतिक दल का।
उधर, त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा ने मंगलवार को कहा था कि भाजपा राज्य में स्वस्थ और विकासोन्मुखी राजनीति स्थापित करने के लिए काम कर रही है और हिंसा या तनाव के जरिए उसे दबाया नहीं जा सकता।

