1000 किलोग्राम के 600 एरियल बम की खरीद करेगी भारतीय वायुसेना

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नई दिल्ली, 4 अप्रैल (आईएएनएस)। स्वदेशी हथियारों के निर्माण और उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए सरकार नए इकोसिस्टम के विकास में जुटी है। अधिकांश रक्षा खरीद अब स्वदेशी कंपनियों से की जा रही है, और इसी दिशा में विशेष जोर दिया जा रहा है।

सेना अपनी आवश्यकताओं की जानकारी देश की हथियार निर्माण कंपनियों को देती है। इसी क्रम में भारतीय वायुसेना ने 1000 किलोग्राम के एरियल बम के लिए स्वदेशी कंपनियों से जानकारी मांगी है। खास बात यह है कि वायुसेना को अमेरिकी एमके-84 जैसा शक्तिशाली एरियल बम चाहिए।

इसके लिए वायुसेना और रक्षा मंत्रालय ने एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (ईओआई) जारी किया है। रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया 2020 के तहत 1000 किलोग्राम के एमके-84 के समान एरियल बम के स्वदेशी डिजाइन, विकास और खरीद के लिए रुचि की अभिव्यक्ति आमंत्रित की गई है। यह प्रोजेक्ट पहले मेक-II (इंडस्ट्री फंडेड) श्रेणी के तहत शुरू होगा और बाद में बाई (इंडियन-आईडीडीएम) श्रेणी के तहत इसकी खरीद की जाएगी।

इस परियोजना को दो चरणों में विभाजित किया जाएगा। पहले चरण में प्रोटोटाइप तैयार किए जाएंगे, जबकि दूसरे चरण में स्वदेशी कंपनियों से इनकी खरीद की जाएगी। पहले चरण में कुल 6 प्रोटोटाइप बनाए जाएंगे, जिनमें वास्तविक और डमी दोनों प्रकार के बम शामिल होंगे। इसके बाद उनका परीक्षण किया जाएगा और आवश्यक तकनीकी मानकों को अंतिम रूप दिया जाएगा। इस चरण में कम से कम 50 प्रतिशत सामग्री भारत में निर्मित होना अनिवार्य होगा।

इस बम को इस प्रकार विकसित किया जाएगा कि इसे भारतीय वायुसेना के स्वदेशी, रूसी और अन्य विदेशी विमानों पर आसानी से इस्तेमाल किया जा सके। यह बम अत्यधिक विस्फोटक क्षमता वाला होगा और दुश्मन पर अधिक प्रभाव डालने में सक्षम होगा। वर्तमान में भारतीय वायुसेना के पास इस प्रकार के एरियल बम मौजूद हैं, लेकिन वे विदेशों से खरीदे जाते हैं। पहले चरण के बाद दूसरे चरण में लगभग 600 बमों की खरीद की जाएगी।

ईओआई जारी होने से लेकर कॉन्ट्रैक्ट साइन होने तक लगभग 2.5 वर्ष का समय लगेगा, जिसमें डिजाइन, परीक्षण, मूल्यांकन और अन्य प्रक्रियाएं शामिल होंगी। सभी परीक्षण भारत में ही वायुसेना की यूनिट्स या निर्धारित स्थानों पर किए जाएंगे। विभिन्न प्लेटफॉर्म से इन बमों का परीक्षण किया जाएगा।

एमके-84 अमेरिका का एक भारी एरियल बम है, जिसे लड़ाकू या भारी बमवर्षक विमानों से गिराया जाता है। इसका वजन लगभग 900-1000 किलोग्राम (2000 पाउंड) होता है। यह एक जनरल-पर्पस बम है, जिसका उपयोग विभिन्न प्रकार के लक्ष्यों पर किया जा सकता है। इसकी विस्फोटक क्षमता बहुत अधिक होती है, जिससे बड़े स्तर पर नुकसान होता है। आमतौर पर इसका उपयोग दुश्मन के बंकर, इमारतों, रनवे और गोदाम जैसे मजबूत ठिकानों को नष्ट करने के लिए किया जाता है। आधुनिक प्रणालियों के साथ इसे जोड़कर इसे प्रिसिजन (सटीक) बम में भी बदला जा सकता है। यह बम वियतनाम युद्ध के दौरान विकसित किया गया था।