नई दिल्ली, 10 अप्रैल (आईएएनएस)। मानसून से पहले जलभराव की समस्या से निपटने के लिए दिल्ली सरकार ने व्यापक तैयारी तेज कर दी है। इसी क्रमी में दिल्ली के सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने शुक्रवार को दो महत्वपूर्ण आईएफसीडी नालों, दिल्ली गेट नाला और बारापुला नाला का स्थलीय निरीक्षण किया। इस दौरान जमीनी स्तर पर चल रहे कार्यों की गति और गंभीरता स्पष्ट रूप से सामने आई।
एक अहम प्रगति के तहत दिल्ली गेट नाला, जो लगभग 40 वर्षों से स्लैब से ढका हुआ था, अब पूरी तरह खोलकर उसकी गहन सफाई की जा रही है। लंबे समय तक ढके रहने के कारण इस नाले की प्रभावी सफाई संभव नहीं हो पाती थी, जिससे आसपास के क्षेत्रों में बार-बार जलभराव की समस्या बनी रहती थी। चार दशकों में पहली बार स्लैब हटाकर नाले तक पूरी पहुंच बनाई जा रही है, ताकि इसकी क्षमता को बहाल किया जा सके।
मंत्री ने बताया कि दिल्ली गेट नाले में डिसिल्टिंग का कार्य 70 प्रतिशत से अधिक पूरा हो चुका है और अब तक 21,000 मीट्रिक टन से अधिक गाद निकाली जा चुकी है। मशीनों और श्रमिकों की तैनाती के साथ कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। वहीं, बारापुला नाले, जो एक प्रमुख आईएफसीडी ड्रेनेज चैनल है, पर डिसिल्टिंग का कार्य लगभग 78 प्रतिशत पूरा हो चुका है, जहां अब तक 31,000 मीट्रिक टन से अधिक गाद हटाई जा चुकी है। यह प्रगति दर्शाती है कि प्रमुख नालों को मानसून से पहले पूरी तरह तैयार करने के लिए समयबद्ध और केंद्रित प्रयास किए जा रहे हैं।
समग्र प्रगति की समीक्षा करते हुए मंत्री ने बताया कि चिन्हित 77 नालों में से लगभग 50 प्रतिशत डिसिल्टिंग कार्य पूरा हो चुका है और अब तक 14 लाख मीट्रिक टन से अधिक गाद निकाली जा चुकी है। विभाग ने इस वर्ष 28 लाख मीट्रिक टन गाद निकालने का लक्ष्य रखा है, जिसे तय समय सीमा में पूरा करने के लिए निरंतर कार्य जारी है।
निरीक्षण के दौरान सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने कहा, ‘यह केवल नालों की सफाई नहीं है, बल्कि वर्षों की उपेक्षा को सुधारने का प्रयास है। दिल्ली गेट नाला, जो करीब 40 साल से ढका हुआ था, अब खोलकर सही तरीके से साफ किया जा रहा है। इससे जमीनी स्तर पर वास्तविक बदलाव देखने को मिलेगा।’
उन्होंने आगे कहा, ‘हमारा लक्ष्य स्पष्ट है, समय से पहले काम शुरू करना, तेजी से काम करना और तय समय सीमा में पूरा करना। बारापुला और दिल्ली गेट पर हो रही प्रगति यह दिखाती है कि काम केवल कागजों पर नहीं, बल्कि ज़मीन पर हो रहा है। इन दोनों नालों के सुदृढ़ होने से दरीयागंज, जामा मस्जिद, फिरोज शाह रोड, आईटीओ, साउथ एक्सटेंशन और ओखला जैसे क्षेत्रों को इस मानसून में जलभराव से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।’
मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि इस वर्ष आईएफसीडी नालों में डिसिल्टिंग कार्य की हर स्तर पर सख्त निगरानी की जा रही है, ताकि किसी प्रकार की देरी या लापरवाही न हो और कार्य गुणवत्ता के साथ समय पर पूरा हो। दिल्ली सरकार का यह अभियान राजधानी के ड्रेनेज सिस्टम को मजबूत करने और मानसून के दौरान होने वाली परेशानियों को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिसमें सभी प्रमुख नालों पर तेजी से कार्य जारी है।

