नई दिल्ली, 3 अप्रैल (आईएएनएस)। आम आदमी पार्टी द्वारा राज्यसभा में राघव चड्ढा को उपनेता पद से हटाए जाने और उसके बाद अशोक मित्तल की नियुक्ति पर जमकर बयानबाजी चल रही है। अब दिल्ली भाजपा प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने कहा है कि इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं है। वहीं भाजपा नेता शाजिया इल्मी ने भी आप पर तंज कसा है।
आईएएनएस से बातचीत में वीरेंद्र सचदेवा ने कहा कि राज्यसभा में उपनेता के पद से हटाना पार्टी का अपना निर्णय है। कोई भी पार्टी इस तरह के फैसले लेने के लिए स्वतंत्र है। हालांकि जिस तरह आम आदमी पार्टी ने राज्यसभा सचिवालय को पत्र लिखा है कि राघव चड्ढा को बोलने की अनुमति न दी जाए, यह अलोकतांत्रिक है।
उन्होंने कहा कि सांसद किसी भी पार्टी का हो, उसका नैतिक कर्तव्य होता है कि वह समाज, देश और क्षेत्र की समस्याओं और विचारों को सदन में रखे, लेकिन अरविंद केजरीवाल की तानाशाही है, क्योंकि वह एक डरे हुए इंसान हैं। वह पार्टी के अंदर और बाहर किसी ऐसे इंसान को पसंद नहीं करते हैं, जो बोलने का साहस रखता हो। राघव चड्ढा के मामले में शायद यही हुआ है।
वीरेंद्र सचदेवा ने कहा कि अरविंद केजरीवाल को आपराधिक छवि वाले लोग अधिक पसंद हैं। राघव चड्ढा ने ट्वीट किया है, लेकिन मुझे राघव चड्ढा से इतना ही कहना है कि उन्हें समय रहते संभल जाना चाहिए। राघव चड्ढा के प्रति संवेदनाएं व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि जिंदगी पर बस इतना ही लिख पाया हूं—बहुत मजबूत रिश्ते थे कुछ कमजोर लोगों से।
वहीं शाजिया इल्मी ने आम आदमी पार्टी पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि आम आदमी पार्टी की यही राजनीति है। जो उनकी चमचागिरी नहीं करेगा, उसे ऐसे ही बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा। संसद में अधिक लोकप्रिय न हों, ज्यादा बोलें नहीं, अपनी बातें न रखें, इसलिए यह सब किया जा रहा है। अरविंद केजरीवाल को मीडिया में जगह नहीं मिल पा रही है।
उन्होंने कहा कि अरविंद केजरीवाल को राघव चड्ढा को लेकर जरूर कोई असुरक्षा है। उन्हें लगता है कि यह आगे निकल रहा है, तो मेरा क्या होगा। यह आम आदमी पार्टी और अरविंद केजरीवाल की बातें नहीं करता, यह तो उन्हें नागवार ही गुजरेगा। अरविंद केजरीवाल उन्हीं लोगों को बर्दाश्त करते हैं, जिनका कोई वजूद न हो। राघव चड्ढा पहले कुछ नहीं थे, लेकिन अरविंद केजरीवाल ने उन्हें प्रमोट किया। अब केजरीवाल को लगने लगा है कि “मेरी बिल्ली मुझी से म्याऊं।”
शाजिया इल्मी ने कहा कि सोचने वाली बात यह है कि राज्यसभा में संजय सिंह को जिम्मेदारी क्यों नहीं दी गई? अशोक मित्तल को क्यों दी गई? क्योंकि अरविंद केजरीवाल जिनसे असुरक्षित महसूस करते हैं, ऐसे लोगों को वे प्रमोट नहीं करते।
उन्होंने कहा कि मैंने सबसे पहले पार्टी छोड़ी थी। प्रशांत भूषण और योगेंद्र यादव ने मुझे रोकने की कोशिश की थी, लेकिन क्या हुआ? उन्हें भी पार्टी से निकाल दिया गया। कुमार विश्वास को वादा किया था कि राज्यसभा भेजेंगे, लेकिन नहीं भेजा। यह खेल अभी जारी है।
उन्होंने आम आदमी पार्टी के कई नेताओं का उदाहरण देते हुए कहा कि अरविंद केजरीवाल की पॉलिसी है कि वह इस्तेमाल करते हैं और फेंक देते हैं। इसीलिए अब अरविंद केजरीवाल के आसपास जितने लोग भी हैं, उनका कोई वजूद नहीं है। उन्हें कोई जानता नहीं है। उन्हें लगता है कि अगर किसी का कद बढ़ जाएगा तो उनके लिए खतरा बन जाएगा। ।


