‘अगर मैं प्रवासी हूं तो सोनिया गांधी अंदरूनी हैं या बाहरी?’, खड़गे को लहर सिंह सिरोया ने दिया जवाब

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नई दिल्ली, 13 फरवरी (आईएएनएस)। राज्यसभा सांसद लहर सिंह सिरोया ने कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा ‘माइग्रेंट’ (प्रवासी) कहे जाने पर जवाब दिया है और कहा है कि उनके इस बयान से उन्हें बहुत दुख पहुंचा है। उन्होंने सवाल उठाया है कि अगर मैं बाहरी हूं, तो राज्यसभा में खड़गे जी के बगल में बैठने वाली सोनिया गांधी अंदरूनी हैं या बाहरी?

लहर सिंह सिरोया ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा सदन में “माइग्रेंट” (प्रवासी) कहे जाने पर जवाब देते हुए पोस्ट लिखा, “कल जब मैं केंद्रीय बजट पर बोल रहा था, तब कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने मुझे “माइग्रेंट” (प्रवासी) कहा। उनका मतलब था कि मैं कर्नाटक का बाहरी हूं। इस बात से मुझे बहुत दुख पहुंचा।”

उन्होंने लिखा कि मेरा जन्मस्थान राजस्थान है, लेकिन मेरी कर्मभूमि कर्नाटक है। मुझे दोनों राज्यों पर गर्व है, जिनसे मेरी किस्मत जुड़ी है। मैं अक्सर कहता हूं कि मैं राजस्थानी से ज्यादा कन्नडिगा हूं। मैं बचपन में कर्नाटक आया और अपनी पूरी जिंदगी यहीं बिताई है। कर्नाटक के उदार लोगों ने मुझे बहुत प्यार और सम्मान दिया है। लेकिन, क्या राजस्थानी होना कोई अपराध है? मैं पूरी तरह से कर्नाटक में घुल-मिल गया हूं, लेकिन क्या अपनी जड़ों का सम्मान करना गलत है? कर्नाटक और राजस्थान दोनों महान लोगों और महान इतिहास की भूमि हैं।

उन्होंने कहा कि खड़गे जी खुद गुलबर्गा में पैदा हुए थे, जो उस समय निजाम के हैदराबाद का हिस्सा था। उन्होंने पढ़ाई भी हैदराबाद में की। भाषाई आधार पर राज्यों के पुनर्गठन के बाद ही वे मैसूर राज्य (कन्नड़ भाषी क्षेत्र) का हिस्सा बने। तो क्या इससे वे भी प्रवासी या बाहरी हो जाते हैं?

लहर सिंह सिरोया ने सवाल उठाया कि अगर मैं बाहरी हूं, तो राज्यसभा में खड़गे जी के बगल में बैठने वाली और जिन्हें वे अपना नेता मानते हैं, सोनिया गांधी अंदरूनी हैं या बाहरी? क्या वे भी प्रवासी हैं? क्या इटली कभी भारत का हिस्सा रहा है? राजस्थान तो हमेशा भारत का हिस्सा रहा है और सोनिया गांधी मेरी जन्मभूमि राजस्थान से राज्यसभा की सदस्य चुनी गई हैं। तो क्या वे राजस्थान में बाहरी हैं, अंदरूनी हैं या प्रवासी?

बता दें कि केंद्रीय बजट पर राज्यसभा में बोलते हुए लहर सिंह सिरोया ने कर्नाटक के विकास और राजनीतिक मुद्दों को भी उठाया था। लहर सिंह सिरोया का कहना है कि इस दौरान मल्लिकार्जुन खड़गे ने उन्हें प्रवासी कहा था।